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लोन मोरेटोरियम पर सुनवाई:सुप्रीम कोर्ट ने सभी पार्टियों को दिया एक हफ्ते का वक्त, कहा- सरकार के एफिडेविट पर तय समय में जवाब दें, अब 13 को सुनवाई

मुंबईएक वर्ष पहले
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इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) की ओर से वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले में देरी से बैंकों को नुकसान हो रहा है - Dainik Bhaskar
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) की ओर से वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले में देरी से बैंकों को नुकसान हो रहा है
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैसलों को लागू करने के लिए आरबीआई या केंद्र ने ठोस आदेश या सर्कुलर नहीं जारी किया
  • कोर्ट ने कहा- सरकार को ऑर्डर पास करना चाहिए ताकि लोगों को यह पता चल सके कि उन्हें क्या फायदा हो रहा है

सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम के मामले में केंद्र सरकार के एफिडेविट का जवाब देने के लिए सभी पार्टियों को एक हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट ने कहा है कि रियल एस्टेट एसोसिएशंस और अन्य के मुद्दों पर भी विचार किया जाना चाहिए। आज सुबह सुप्रीम कोर्ट में 10.55 को सुनवाई शुरू हुई। 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि फैसलों को लागू करने के लिए सरकार या आरबीआई द्वारा कोई ठोस आदेश या सर्कुलर जारी नहीं किए गए हैं। साथ ही कामथ समिति की रिपोर्ट को रिकॉर्ड में नहीं लाया गया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केंद्र के हलफनामे में कई मुद्दों पर कार्रवाई नहीं की गई है।

क्रेडाई ने कहा सरकार के आंकड़े बिना किसी आधार के

रियल एस्टेट की संस्था क्रेडाई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार ने एफिडेविट में जो ढेर सारे आंकड़े दिए हैं, वो बिना किसी आधार के दिए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार और आरबीआई को इस पर निश्चित रूप से ऑर्डर पास करने चाहिए ताकि लोगों को यह पता लगे कि उन्हें क्या लाभ मिल रहा है। कोर्ट ने कहा कि मामला यह नहीं है कि कामथ कमेटी की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी जाए, बल्कि इसे लागू करने का मामला है।

आईबीए ने कहा मामले में देरी से बैंकों को नुकसान

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) की ओर से वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले में देरी से बैंकों को नुकसान हो रहा है। यदि सुनवाई टाली भी जाती है तो यह केवल जवाब देने के लिए टाली जाए और वह भी 2-3 दिनों से ज्यादा का समय नहीं दिया जाए।

आरबीआई की ओर वकील वी.गिरि ने कहा कि ज्यादातर लोग यह महसूस कर रहे हैं कि ब्याज पर ब्याज उन्हें बुरी तरह प्रभावित करेगा। इसमें आगे और सिफारिशें आनी चाहिए और उन पर विचार करना चाहिए। उधर बैंकों का कहना है कि सरकार के पास दो तरफा अप्रोच है।