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टाटा संस सबसे बड़ा प्रमोटर:लिस्टेड कंपनियों में टाटा समूह की हिस्सेदारी की वैल्यू सरकार की हिस्सेदारी की वैल्यू से ज्यादा हुई

मुंबई10 महीने पहले
  • पिछले 20 सालों में ऐसा पहली बार हुआ जब सरकार पीछे हुई है
  • सरकारी कंपनियों के शेयरों में गिरावट से मार्केट कैप में कमी आई

देश के सबसे बड़े इंडस्ट्री समूह, टाटा संस के लिए 2021 अच्छी खबर लेकर आया है। लिस्टेड कंपनियों में टाटा समूह की हिस्सेदारी की वैल्यू सरकार की हिस्सेदारी की वैल्यू से ज्यादा हो गई है। लिस्टेड कंपनियों में टाटा की हिस्सेदारी की वैल्यू 9.28 लाख करोड़ रुपए है जबकि सरकार की हिस्सेदारी की वैल्यू 9.24 लाख करोड़ रुपए है।

टाटा संस सबसे बड़ा प्रमोटर

इस तरह से अब टाटा संस देश में लिस्टेड कंपनियों का सबसे बड़ा प्रमोटर बन गया है। पिछले 20 सालों में यह पहली बार हुआ जब सरकार पीछे हो गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सरकारी कंपनियों के शेयरों में गिरावट से उनके मार्केट कैपिटलाइजेशन में कमी आई है।

टाटा की वैल्यू 34.4 पर्सेंट बढ़ी

लिस्टेड कंपनियों में टाटा संस की हिस्सेदारी की वैल्यू पिछले एक साल में 34.4 पर्सेंट बढ़ी है। यह अब 9.28 लाख करोड़ रुपए है। इस दौरान सरकार की हिस्सेदारी की वैल्यू 19.7 पर्सेंट गिरी है। दिसंबर 2019 में सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी की वैल्यू टाटा संस की तुलना में 67 पर्सेंट ज्यादा थी। मार्च 2015 में लिस्टेड सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी की वैल्यू टाटा संस से करीबन ढाई गुना ज्यादा थी।

2015 में सरकारी हिस्सेदारी की वैल्यू ढाई गुना ज्यादा थी

टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 31 दिसंबर 2020 तक 15.6 लाख करोड़ रुपए था, जबकि सरकारी कंपनियों का मार्केट कैप 15.3 लाख करोड़ रुपए था। 2019 में लिस्टेड सरकारी कंपनियों की वैल्युएशन 18.6 लाख करोड़ रुपए थी जबकि टाटा ग्रुप की कंपनियों की वैल्यू 11.6 लाख करोड़ रुपए थी।

टाटा की 29 कंपनियां लिस्टेड

टाटा समूह की 29 कंपनियां लिस्टेड हैं। इस समय ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेस (टीसीएस) है। इसका मार्केट कैप 11 लाख करोड़ रुपए के करीब है। ग्रुप की अन्य प्रमुख कंपनियों में टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाइटन आदि हैं। टाटा ग्रुप मार्केट कैप के मामले में रिलायंस ग्रुप और एचडीएफसी ग्रुप से आगे है और इस लिहाज से सबसे बड़ा ग्रुप है।

सरकारी कंपनियों के शेयरों में मार्च से तेजी

सरकारी कंपनियों के शेयरों में मार्च से अच्छी तेजी आई है। पर इनके एक साल की तुलना देखें तो इनके शेयरों में अभी भी काफी गिरावट है। एसबीआई जैसे बड़े बैंकों के शेयर ने एक साल में घाटा ही दिया है। हालांकि विशेषज्ञ उम्मीद लगा रहे हैं कि इस साल सरकारी कंपनियों के शेयरों में तेजी आ सकती है।