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टैक्स-सेविंग इन्वेस्टमेंट का मिलेगा नया विकल्प:म्यूचुअल फंड्स लॉन्च कर सकेंगे पैसिव ELSS, सेबी से मिली परमिशन

नई दिल्ली3 महीने पहले
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म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले निवेशकों को जल्द टैक्स-सेविंग इन्वेस्टमेंट का एक नया विकल्प मिलेगा। बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को पैसिव इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) लॉन्च करने की अनुमति दे दी। पैसिवली-मैनेज्ड फंड में परफॉर्मेंस के आधार पर नियमित रूप से पोर्टफोलियो से कोई शेयर हटाया या नया शेयर जोड़ा नहीं जाता है।

टॉप 250 कंपनियां ही शामिल होंगी
पैसिवली-मैनेज्ड ELSS ऐसे इंडेक्स पर आधारित होंगे, जिसमें मार्केट कैप के हिसाब से टॉप 250 कंपनियां ही शामिल हों। इसमें एक खास शर्त भी जोड़ी गई है कि कोई भी फंड हाउस या तो पैसिवली-मैनेज्ड ELSS चला सकेगा या फिर एक्टिवली-मैनेज्ड ELSS की पेशकश कर सकेगा। एक ही म्यूचुअल फंड कंपनी दोनों तरह की स्कीम नहीं चला सकेगी।

नियामक ने पैसिव डेट फंड में निवेश की सीमा भी तय की

  1. जिस इंडेक्स का 80% एक्सपोजर डेट सिक्योरिटीज में है, उसका सिंगल AAA-रेटेड सिक्युरिटीज में 15% से ज्यादा एक्सपोजर नहीं होगा।
  2. एए-रेटेड सिक्युरिटीज के लिए एक्सपोजर लिमिट 12.5%, जबकि A-रेटेड सिक्युरिटीज के लिए 10% है।
  3. हाइब्रिड इंडेक्स (कॉरपोरेट और सरकारी सिक्युरिटीज, दोनों) के मामले एक्सपोजर सीमा 15% तक है।
  4. कॉरपोरेट डेट एक्सपोजर 80% तक तो सिंगल AAA-रेटेड सिक्युरिटी की अधिकतम हिस्सेदारी 10%।
  5. सरकारी कंपनियों के मामले में सिंगल सिक्यु. एक्सपोजर 15% तक।

क्या हैं पैसिव फंड?
यह म्यूचुअल फंड का ही एक प्रकार है। इसमें एक ऐसे पोर्टफोलियो में निवेश किया जाता है, जो निफ्टी और सेंसेक्स आदि जैसे मार्केट इंडेक्स की नकल करता है। पोर्टफोलियो में उनके अनुपात के साथ-साथ सभी सिक्योरिटीज भी उसी तरह की होंगी जैसे इंडेक्स फंड ट्रैक कर रहा होता है। पैसिव फंडों में, फंड मैनेजर सक्रिय रूप से यह नहीं चुनता है कि स्टॉक क्या फंड बनाएंगे। यह एक कारण है कि पैसिव फंड में एक्टिव फंडों की तुलना में निवेश करना आसान है।

निवेशक पैसिव फंड तब खरीदते हैं जब वे चाहते हैं कि उनका रिटर्न बाजार के अनुरूप हो। ये फंड कम लागत वाले फंड हैं, क्योंकि स्टॉक का चयन करने और शोध में कोई लागत शामिल नहीं है। पैसिव फंड में गोल्ड फंड और इंडेक्स फंड सहित कई अन्य फंड आते हैं।