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विनिवेश:सरकार ने दूसरी बार बीपीसीएल के प्राइवेटाइजेशन की बोली लगाने की समय सीमा बढ़ाई, अब 45 दिन बढ़कर 31 जुलाई हुई

2 वर्ष पहले
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स्ट्रेटेजिक विनिवेश प्रक्रिया के लिए डेलॉय टच तोहमत्सू इंडिया एलएलपी को ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया - Dainik Bhaskar
स्ट्रेटेजिक विनिवेश प्रक्रिया के लिए डेलॉय टच तोहमत्सू इंडिया एलएलपी को ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया
  • बुधवार को शेयर 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़त के साथ बंद हुआ
  • मार्च में कंपनी का शेयर 550 रुपए से ऊपर कारोबार कर रहा था

सरकार ने दूसरी बार भारत की दूसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी भारत पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड (बीपीसीएल) के प्राइवेटाइजेशन (निजीकरण) के लिए बोली लगाने की समय सीमा 45 दिन बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है। उधर बीपीसीएल का शेयर बुधवार को 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 329 रुपए पर बंद हुआ। हालांकि मार्च में यह शेयर 550 रुपए के ऊपर कारोबार कर रहा था।

बीपीसीएल में पूरी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

कैबिनेट ने पिछले साल नवंबर में बीपीसीएल में सरकार की पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी थी। इसे खरीदने में दिलचस्पी (ईओआई) वाले ऑफर के लिए बोलियां 7 मार्च को आमंत्रित की गई थीं। ईओआई जमा करने की समय सीमा 2 मई थी, लेकिन 31 मार्च को इसे बढ़ाकर 13 जून कर दिया गया। फिर बुधवार को सरकार ने कहा कि इस समय सीमा को आगे 31 जुलाई तक बढ़ाया जा रहा है।

सरकार की हिस्सेदारी 52.98 प्रतिशत है

पब्लिक असेट मैनेजमेंट और निवेश के विभाग (DIPAM) ने एक नोटिस में कहा कि इच्छुक बिडर्स से प्राप्त और मौजूदा स्थिति को देखते हुए, प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) पर लिखित प्रश्नों को प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि को फिर से 23 जून, 2020 तक बढ़ा दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार बीपीसीएल में अपनी पूरी शेयरहोल्डिंग के रणनीतिक विनिवेश (strategic disinvestment) का प्रस्ताव कर रही है जिसमें 114.91 करोड़ इक्विटी शेयर शामिल हैं। यह बीपीसीएल की इक्विटी शेयर पूंजी का 52.98 प्रतिशत है।

नुमालीगढ़ रिफाइनरी को किसी सरकारी कंपनी को बेचा जाएगा

सरकार नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड की हिस्सेदारी सरकारी स्वामित्व वाली तेल एवं गैस फर्म को बेचेगी। बोली दो चरणों में होगी। पहले ईओआई चरण में योग्य बिडर्स को दूसरे दौर में वित्तीय बोली लगाने के लिए कहा जा रहा है। ऑफर डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) प्राइवेटाइजेशन में भाग लेने के पात्र नहीं हैं। इसमें कहा गया है कि कोई भी निजी कंपनी जिसकी नेटवर्थ 10 अरब अमेरिकी डॉलर है, वह बोली के लिए पात्र है और चार से अधिक फर्मों के कंसोर्टियम को बोली लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कंसोर्टियम के लीड मेंबर की 40 फीसदी होनी चाहिए हिस्सेदारी

क्राइटीरिया के मुताबिक, कंसोर्टियम के लीड मेंबर की 40 फीसदी हिस्सेदारी होनी चाहिए और दूसरों के पास 1 अरब अमेरिकी डॉलर की मिनिमम नेटवर्थ होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि कंसोर्टियम में बदलाव की अनुमति 45 दिनों के भीतर है, लेकिन लीड मेंबर को बदला नहीं जा सकता।बीपीसीएल, खरीदारों को भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता के 14 फीसदी और दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजार में ईंधन बाजार हिस्सेदारी का करीब एक चौथाई हिस्सा तैयार करने का अवसर देगा।

68,223 करोड़ रुपए है मार्केट कैपिटलाइजेशन

बीपीसीएल का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 68,223 करोड़ रुपए है और मौजूदा कीमतों पर सरकारी हिस्सेदारी करीब 36,159 करोड़ रुपए की है। बीपीसीएल का निजीकरण 21 लाख करोड़ रुपए के जरूरी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के बजट में विनिवेश आय से निर्धारित किया है।बीपीसीएल मुंबई (महाराष्ट्र), कोच्चि (केरल), बीना (मध्य प्रदेश) और नुमालीगढ़ (असम) में चार रिफाइनरियों का संचालन करता है। इसकी संयुक्त क्षमता 38.3 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जो भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता 249.4 मिलियन टन का 15 प्रतिशत है।

बीपीसीएल का 15,177 पेट्रोल पंप देश भर में है

एक तरफ नुमालीगढ़ रिफाइनरी को बीपीसीएल से अलग कर पीएसयू को बेचा जाएगा, वहीं कंपनी के नए खरीदार को 35.3 मिलियन टन रिफाइनिंग क्षमता मिलेगी। बीपीसीएल देश में 15,177 पेट्रोल पंपों और 6,011 एलपीजी (लिक्विफीड पेट्रोलियम गैस) डिस्ट्रीब्यूटर एजेंसियों की भी मालिक है। इसके अलावा इसमें 51 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट हैं। कंपनी इस साल मार्च तक देश में खपत होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों का 21 प्रतिशत वितरित करती है और इसके पास देश कुल 250 विमानन ईंधन स्टेशनों में पांचवें हिस्से का अधिकर है।

सरकार ने स्ट्रेटेजिक विनिवेश प्रक्रिया के लिए डेलॉय टच तोहमत्सू इंडिया एलएलपी को अपना ट्रांजेक्शन सलाहकार नियुक्त किया है।

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