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फ्यूचर Vs अमेजन:जेफ बेजोस और अंबानी के बीच जंग हुई तेज, अमेजन ने एड पब्लिश कर रिलायंस पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप

नई दिल्ली9 महीने पहले
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भारत के रिटेल मार्केट सेगमेंट में रिलायंस और अमेजन के बीच लड़ाई जारी है। मंगलवार को कंपनियों के वकील ने सुप्रीम कोर्ट पर दलील दी कि क्या फ्यूचर के रिटेल असेट्स को रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचा जा सकता है। साथ ही अमेजन और फ्यूचर दोनों ने कहा कि वे सिंगापुर में मध्यस्थता की कार्यवाही फिर से शुरू करना चाहेंगे जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक दिया था। बुधवार को इस मामले की सुनवाई कोर्ट में होगी।

वहीं इस बीच अमेजन इंक ने मंगलवार को अखबारों में ऐसे विज्ञापन निकाले, जिनमें फ्यूचर रिटेल और रिलायंस पर 'धोखाधड़ी' का आरोप लगाया गया। अमेजन फ्यूचर ग्रुप की रिटेल एसेट्स की रिलायंस को 3.4 बिलियन डॉलर (करीब 26 हजार करोड़ रुपए) की बिक्री के प्लान का विरोध कर रहा है। जिसकी सुनवाई भारतीय सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।

अखबार में पब्लिश नोटिस की फोटो।
अखबार में पब्लिश नोटिस की फोटो।

अमेजन का कहना-धोखाधड़ी करके गुप्त तरीके से हुई डील
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश के प्रमुख समाचार पत्रों में "सार्वजनिक नोटिस" शीर्षक वाले विज्ञापनों में, अमेजन का कहना है कि "इन कार्यों को भारत में संवैधानिक अदालतों पर धोखाधड़ी करके गुप्त तरीके से किया गया है। बल्कि अब उनके पास रिटेल सेलर्स को खरीदने के लिए 3.4 बिलियन डॉलर के लड़ाई में सभी कार्ड हैं।" हालांकि अभी तक अमेजन इस कदम पर फ्यूचर और रिलायंस ने तुरंत जवाब नहीं दिया।

पिछले 2 साल से चल रही लड़ाई
एशिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार मुकेश अंबानी और जेफ बेजोस के बीच की जंग दिलचस्प होती जा रही है। बिग बाजार चलाने वाली कंपनी फ्यूचर के टेक ओवर और भारतीय रिटेल मार्केट पर कब्जा करने के लिए दोनों के बीच पिछले 2 साल से लड़ाई चल रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाल ही में बिग बाजार के स्टोर्स का कंट्रोल अपने हाथों में लेना शुरू कर दिया। इसके जवाब में अमेजन भी अपनी कार्रवाई कर रही है।

अमेजन-फ्यूचर के बीच क्या है विवाद?
साल 2019 में अमेजन ने 1500 करोड़ रुपए में फ्यूचर कूपन (फ्यूचर ग्रुप की होल्डिंग कंपनी) में 49% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस डील के तहत अमेजन को 3 से 10 साल के भीतर फ्यूचर रिटेल में हिस्सेदारी खरीदने का भी अधिकार मिला था। लेकिन 2020 में फ्यूचर ग्रुप ने अपने रिटेल, होलसेल और लॉजिस्टिक्स बिजनेस को रिलायंस रिटेल को 24,713 करोड़ रुपए में बेचने की घोषणा की। इसी के बाद से ये विवाद शुरू हुआ।

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