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लॉन्ग टर्म में फायदेमंद:EPF के लिए सरकार का बड़ा सुझाव, योगदान और निवेश के हिसाब से बेनेफिट वाला सिस्टम अपनाना सही

7 दिन पहले
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  • अभी क्या: डिफाइंड बेनेफिट वाले ट्रेडिशनल प्लान में रिटायरमेंट पर बेनेफिशियरी को सैलरी और सर्विस के साल पर पहले से तय पेंशन मिलता है
  • नया क्या: डिफाइंड कंट्रिब्यूशन वाले सिस्टम में रिटायरमेंट बेनेफिट कर्मचारी की तरफ से होने वाले निवेश के परफॉर्मेंस पर निर्भर करेगा

सरकार चाहती है कि एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड (EPF) जैसे पेंशन फंड्स में सब्सक्राइबर को बेनेफिट उसके योगदान और निवेश के प्रदर्शन के हिसाब से दिया जाए। यानी कर्मचारी ने कितना योगदान किया है और उसके पैसे निवेश पर कितना रिटर्न मिला है। इसके लिए 'डिफाइंड बेनेफिट' सिस्टम खत्म करके उसकी जगह 'डिफाइंड कंट्रिब्यूशन' वाला सिस्टम लाने की बात है। सरकार का कहना है कि EPF जैसे पेंशन फंड को मौजूदा स्वरूप में लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल होगा। श्रम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह बात इसी हफ्ते श्रम मंत्रालय की संसदीय समिति के सामने रखी है।

सिस्टम बदला तो बाजार की चाल पर निर्भर करेगा बेनेफिट

डिफाइंड बेनेफिट वाले यानी ट्रेडिशनल प्लान में रिटायरमेंट पर बेनेफिशियरी को सैलरी और सर्विस के साल पर पहले से तय पेंशन मिलता है। लेकिन डिफाइंड कंट्रिब्यूशन वाले सिस्टम में रिटायरमेंट बेनेफिट सब्सक्राइबर की तरफ से होने वाले निवेश के परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। इस सिस्टम में खासतौर पर एंप्लॉयी का योगदान होता है और एंप्लॉयर चाहे तो वह भी कंट्रिब्यूशन दे सकता है। ऐसे में डिफाइंड बेनेफिट सिस्टम की जगह डिफाइंड कंट्रिब्यूशन वाला सिस्टम लाने से पूरे योगदान की जिम्मेदारी एंप्लॉयी की हो जाती।

सरकार के लिए लॉन्ग टर्म में सपोर्ट देते रहना होगा मुश्किल

सूत्रों के मुताबिक, श्रम मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति को बताया कि ईपीएफओ के 23 लाख से ज्यादा पेंशनधारियों को एक हजार रुपये मासिक दिए जा रहे हैं जबकि उनका कंट्रिब्यूशन बेनेफिट के हिसाब से जरूरी रकम से एक चौथाई से भी कम है। बताया जाता है कि उन्होंने समिति से यह भी कहा है कि डिफाइंड कंट्रिब्यूशन वाला सिस्टम नहीं अपनाने पर सरकार के लिए इस फंड को लंबे समय तक सपोर्ट देते रहना मुश्किल हो जाएगा।

3,000 रुपये के मंथली पेंशन से पड़ेगा 14,595 करोड़ रुपये का बोझ

समिति ने पेंशन की रकम बढ़ाने वाली सिफारिशें लागू करने में श्रम मंत्रालय के नाकाम रहने पर पिछले साल सवाल उठाया था। EPFO के ट्रस्टियों के सेंट्रल बोर्ड ने मिनिमम मंथली पेंशन को बढ़ाकर 2000 या 3000 रुपये करने का सुझाव दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि सब्सक्राइबर को हर महीने 2,000 रुपये का पेंशन देने की सूरत में 4,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मंथली पेंशन बढ़ाकर 3,000 रुपये करने से सरकार पर पड़ने वाला बोझ 14,595 करोड़ रुपये हो जाएगा।

कोविड-19 के चलते स्टॉक इनवेस्टमेंट का रिटर्न हुआ नेगेटिव

श्रम मंत्रालय के अधिकारियों ने इस हफ्ते हुई बैठक में समिति को बताया था कि शेयर मार्केट में लगाई ईपीएफओ की रकम का बड़ा हिस्सा फंस गया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के चलते शेयर बाजार में हुई उथल-पुथल से फंड के स्टॉक इनवेस्टमेंट का रिटर्न नेगेटिव हो गया।

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