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केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग:मंत्रिमंडल की बैठक में क्रिप्टोकरेंसी बिल पर चर्चा की संभावना, जानें इस बिल को लेकर अब तक क्या-क्या आया सामने

नई दिल्लीएक महीने पहले
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केंद्रीय मंत्रिमंडल की आज की बैठक में 'द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021' पर चर्चा की संभावना है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में बताया था कि बिल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अगर आज इस बिल को कैबिनेट में मंजूरी नहीं मिलती है तो शीतकालीन सत्र में बिल आने की संभावना काफी कम रह जाएगी। सरकार ने बिल को संसद के इस सत्र में लाने के लिए लिस्ट किया था।

भारत के क्रिप्टो बिल को लेकर अब तक क्या आया सामने?

  • सरकार शीतकालीन सत्र में द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल पेश कर सकती है।
  • अब तक जो जानकारी सामने आई है उससे पता चलता है कि प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर रोक लग सकती है।
  • सरकार इस बिल के जरिए कुछ क्रिप्टोकरेंसी को एक्सेप्शन के रूप में काम करने की छूट दे सकती है।
  • छूट किन करेंसीज को मिलेगी और छूट दिए जाने का आधार क्या होगा यह अभी साफ नहीं है।
  • अभी ये भी साफ नहीं है कि सरकार प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी किसे मानेगी।
  • कानून को तोड़ने पर 20 करोड़ तक का जुर्माना और 1.5 साल की जेल हो सकती है।
  • बिल का मकसद निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेड कर रहे लोगों को कटऑफ डेट जाएगी, जिसके तहत उन्हें अपने एसेट डिक्लेयर करने होंगे।

प्राइवेट और पब्लिक क्रिप्टोकरेंसी में अंतर?
दुनिया में प्राइवेट और पब्लिक क्रिप्टोकरेंसी में अंतर प्राइवेसी के आधार पर किया जाता है।

पब्लिक क्रिप्टोकरेंसी

  • बिटकॉइन, इथीरियम और लाइटकॉइन जैसी करेंसी पब्लिक क्रिप्टोकरेंसी कहलाती है।
  • पब्लिक क्रिप्टो में आपका नाम, पता नहीं दिखता, लेकिन आपके डिजिटल वॉलेट का नाम दिखता है।
  • यदि किसी को पता चल जाए कि वॉलेट का एड्रेस आपका है, तो सारी गोपनीयता खत्म हो जाती है।

प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी
मोनेरो, जीकैश, डैश और होरिजन जैसी कई क्रिप्टोकरेंसी है, जिन्हें प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी कहा जाता है।
इसमें वॉलेट का एड्रेस ही नहीं ट्रांजैक्शन डीटेल तक छिपाकर रखी जाती है।
इन वजहों से यूजर को इन क्रिप्टोकरेंसीज में ज्यादा प्राइवेसी मिलती है।

अलग-अलग देशों में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कानून
दुनियाभर की सरकारें और रेगुलेटर क्रिप्टोकरेंसी को लेकर डिवाइडेड हैं। अल सल्वाडोर जैसा देश बिटकॉइन को लीगल टेंडर के तौर पर अपनाने वाला दुनिया का पहला देश है, तो वहीं चीन ने क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह से बैन लगा रखा है।

  • चीन ने 2019 में क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाया था, लेकिन फॉरेन एक्सचेंज्स के माध्यम से ये ऑनलाइन जारी रहा।
  • इस साल की शुरुआत में चीन ने क्रिप्टोकरेंसी में होने वाले ट्रांजैक्शन को पूरी तरह से गैर-कानूनी बना दिया।
  • नेपाल ने अगस्त 2017 में ही क्रिप्टोकरेंसी को अवैध घोषित किया था।
  • वियतनाम में क्रिप्टोकरेंसी को अवैध घोषित किया गया है और पेमेंट में इस्तेमाल करने पर जुर्माना लगता है।
  • जुर्माना करीब 50,000 रुपए से लेकर 65,000 रुपए तक का लगाया जाता है।
  • रूस ने क्रिप्टोकरेंसी को एक एसेट के रूप में मान्यता दी है और इस पर टैक्स लगाया जाता है।
  • फ्रांस की सरकार ने भी क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगाती है।
  • इजराइल में क्रिप्टोकरेंसी को एसेट माना जाता है और इस पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है।