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अमेरिका-चीन टेंशन:चीन की कंपनियों पर अमेरिका का U-Turn, अब चाइनीज टेलीकॉम कंपनियों के शेयर न्यूयॉर्क एक्सचेंज से नहीं होंगे बाहर

मुंबई10 महीने पहले
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डीलिस्टिंग मामले पर एक्सचेंज ने अचानक अपना रुख क्यों बदला इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं जारी किया गया है।                          -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
डीलिस्टिंग मामले पर एक्सचेंज ने अचानक अपना रुख क्यों बदला इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं जारी किया गया है। -फाइल फोटो

US-चीन तनाव के बीच अमेरिका ने थोड़ी नरमी बरती है। अब न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) से चीन की तीन प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के शेयर डीलिस्ट नहीं किए जाएंगे। एक्सचेंज का यह फैसला डिलिस्टिंग के ऐलान के चार दिन बाद आया है। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने 35 चाइनीज कंपनियों में निवेश पर भी बैन लगाने का फैसला लिया था।

खबर से शेयरों में तेजी

खबर के बाद मंगलवार को हॉन्गकॉन्ग के शेयर बाजार में चाइना मोबाइल लिमिटेड, चाइना टेलीकॉम कॉर्पोरेशन और चाइना यूनिकॉम हॉन्गकॉन्ग लिमिटेड के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इनमें 7% तक की रैली रही। इन तीनों शेयरों के अलावा सरकारी ऑयल उत्पादक कंपनी क्नूक लि. (Cnooc ltd) के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई। इसको भी पेंटागन ने अपनी लिस्ट में शामिल किया है। दरअसल, इन कंपनियों पर आरोप है कि इनका संबंध चीनी आर्मी के साथ है।

फैसले को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किए गए

डीलिस्टिंग मामले पर एक्सचेंज ने अचानक अपना रुख क्यों बदला इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं जारी किया गया है। हालांकि इससे पहले मामले पर चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा को ढाल बना रही है, और इसका गलत इस्तेमाल कर रही है। चीन ने कहा था कि ट्रम्प के इस आदेश से अमेरिकी और दुनियाभर के अन्य निवेशक प्रभावित होंगे। मामले पर हम भी सख्ती से निपटेंगे।

चीन पर अमेरिका की सख्ती

बता दें कि बीते दो साल से भी अधिक समय से दोनों देशों के बीच तनाव जारी है। इस दौरान ट्रम्प प्रशासन चीनी कंपनियों पर खासकर टेक कंपनियों पर सख्ती बरत रही है। इसमें हुवावे टेक्नोलॉजी जैसी कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि चीन अमेरिकी टेक्नोलॉजी का चोरी कर अपनी आर्मी के एडवांस कर रही है। इसके अलावा चीन से इंपोर्ट पर भारी टैरिफ भी लगाया गया है। तनाव के बीच राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि अमेरिका में निवार्चित राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन की शुरुआत के बाद US-चीन संबंधों में राहत की संभावना है।

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