• Hindi News
  • Business
  • Voting Ends In 5 States, So The Price Can Increase By Rs 20 25, Crude Also Reached $140

महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल:5 राज्यों में वोटिंग खत्म इसलिए दाम 20-25 रुपए तक बढ़ सकते हैं, क्रूड भी 140 डॉलर पर पहुंचा

नई दिल्ली9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

पेट्रोल-डीजल के दाम आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं। इसकी बड़ी वजह 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव का खत्म होना है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और चुनाव का ट्रेंड बताता है कि मोदी सरकार चुनावों से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी से बचती रही है। हालांकि चुनाव खत्म होते ही वह कीमतों को बढ़ाने में देर नहीं करती।

इसी वजह से पेट्रोल-डीजल में 20-25 रुपए की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। ट्रेंड यह भी कहता है कि दामों में बढ़ोतरी एक बार में न होकर, रोज थोड़ी-थोड़ी होगी। यानी आज करीब 15 रुपए दाम बढ़ा दिए जाए और फिर धीरे-धीरे कर 5-10 रुपए की बढ़ोतरी और की जाए।

तेल कंपनियों ने 3 नवंबर से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि क्रूड ऑयल रिकॉर्ड 140 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर पहुंच गया है। ऐसे में खबर है कि सरकार और तेल कंपनियों ने पेट्रोल तथा डीजल के दाम बढ़ाने पर मंथन शुरू कर दिया है।

एक्सपर्ट के मुताबिक कच्चे तेल के दाम चढ़ने से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को पेट्रोल-डीजल पर 15-20 रुपए प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है। क्रूड के दाम लगातार बढ़ने से कंपनियों का घाटा भी लगातार बढ़ रहा है।

रूस-यूक्रेन जंग से बढ़े क्रूड के दाम
24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर रूस के आक्रामण के तुरंत बाद दुनियाभर के शेयर बाजार धराशाई हो गए, सोने की कीमतें बढ़ गई और क्रूड ऑयल रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। युद्ध वाले दिन क्रूड करीब 100 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जो अब 140 तक पहुंच चुका है। यानी 13 दिनों में ही कच्चा तेल 40% महंगा हो गया है। वहीं दिसंबर 2021 में क्रूड का औसत मूल्य 73 डॉलर के करीब था।

रूस ऑयल और नेचुरल गैस का बड़ा उत्पादक है। BP स्टैटिकल रिव्यू के अनुसार 2020 में रूस क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस कंडेनसेट के उत्पादन के मामले में दूसरे नंबर पर था। इस दौरान रूस ने प्रति दिन 10.1 मिलियन बैरल का उत्पादन किया। रूस के आक्रामण के कारण कई पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए है। इसी वजह से क्रूड की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता है और दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

क्रूड की 85% आपूर्ति के लिए भारत अन्य देशों पर निर्भर
भारत क्रूड ऑयल की 85% से ज्यादा आपूर्ति के लिए अन्य देशों पर निर्भर है। रूस के तेल एक्सपोर्ट का लगभग आधा- करीब 25 लाख बैरल प्रति दिन- जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, पोलैंड, फिनलैंड, लिथुआनिया, ग्रीस, रोमानिया और बुल्गारिया सहित यूरोपीय देशों को भेजा जाता है।

हालांकि, भारत काफी कम तेल रूस से इंपोर्ट करता है। 2021 में भारत ने रूस से प्रति दिन 43,400 बैरल तेल का इंपोर्ट किया। ये भारत के तेल इंपोर्ट का केवल 1% है। रूस पर लगी पाबंदियों की वजह से भारत की तेल सप्लाई तो ज्यादा प्रभावित नहीं होगी, लेकिन क्रूड के दाम बढ़ने का सीधा असर होगा।

एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सकती है सरकार
एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सकती है। केंद्र सरकार ने कोरोना की पहली लहर में दो बार में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।

हालांकि इसके बाद 3 नवंबर को पेट्रोल पर 5 और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी की कटौती की थी। अगर सरकार दाम बढ़ाने के बाद एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं करती है तो महंगाई बेकाबू हो सकती है।

पेट्रोल-डीजल की कीमत कैसे निर्धारित होती है?
जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे बदला जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी, लेकिन 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑयल कंपनियों को सौंप दिया। अभी ऑयल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करती हैं।

रुपए की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता
डॉलर के मुकाबले रुपया 83 पैसे की कमजोरी के साथ 77 रुपए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। शुक्रवार को रुपया 25 पैसे की कमजोरी के साथ 76.16 रुपए के स्तर पर बंद हुआ था। इस साल रुपए में अब तक 3.60% की गिरावट आ चुकी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार रुपया 78 के लेवल तक जा सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपए का कमजोर होने के सीधा असर इंपोर्ट पर पड़ता है। जैसे-जैसे रुपया गिरता है, कच्चे तेल के इंपोर्ट बिल में भी बढ़ोतरी होती है।

ईरान की न्यूक्लियर डील से घट सकता है क्रूड
एक्सपर्ट अनुमान जता रहे हैं कि ईरान की 2015 की न्यूक्लियर डील रिवाइव होने के बाद क्रूड के दामों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, डील के बाद भी ईरान के तेल को मार्केट में आने में समय लग सकता है। एनालिस्ट का कहना है कि अगर इस हफ्ते भी डील फाइनल हो जाती है तब भी ईरान के ऑयल को मार्केट तक आने में मई से जून तक का समय लग जाएगा। इसके बाद क्रूड सस्ता हो सकता है। दुनिया भर के ज्यादातर रिफाइनर भी कई सालों से ईरानी ऑयल नहीं ले रहे हैं और ईरान से इंपोर्ट को फिर से शुरू में 2-3 महीनों की जरूरत होगी।

क्या है ईरान की न्यूक्लियर डील?
साल 2015 में ईरान ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस और जर्मनी के साथ अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर डील की थी। इस डील के तहत ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को सीमित करने के बदले उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में छूट दी गई थी। हालांकि, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस डील के आलोचक थे। उनका कहना था कि प्रतिबंध हटने से ईरान के पास काफी पैसा आ गया है। इन पैसों से आतंकवाद की फंडिंग होगी।

इस वजह से मई 2018 में ट्रंप ने अमेरिका को इस डील से अलग कर लिया। कई आर्थिक पाबंंदियां लगा दी। जंग जैसे हालात पैदा हो गए। इसका असर ईरान की इकोनॉमी के साथ-साथ भारत और अन्य देशों पर भी पड़ा। 2018 तक भारत ईरान से ऑयल इंपोर्ट में नंबर दो पर था। अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरान का सस्ता तेल खरीदना बंद कर दिया। इससे पेट्रोल-डीजल के साथ अन्य चीजें महंगी हो गई।