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बजट 2019 / कैसे तैयार होता है बजट, कैसी होती है इसे बनाने वाली टीम; गुप्त रहती है प्रक्रिया



Budget 2019: What is Budget, Know How Union Budget is Prepared; Basics, Process & More
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Budget 2019: What is Budget, Know How Union Budget is Prepared; Basics, Process & More

  • बजट में सरकार पेश करती है अपने आय-व्यय का लेखा-जोखा
  • बजट तैयार करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है 'हलवे की रस्म'

Dainik Bhaskar

Jul 04, 2019, 08:11 PM IST

नेशनल डेस्क. केंद्रीय वित्तमंत्री की ओर से पेश की जाने वाली वार्षिक वित्त रिपोर्ट को ही 'आम बजट' कहा जाता है। इस दस्तावेज में सरकार अपनी राजस्व आय और खर्चों के अनुमान के बारे में बताती है। बजट में बताया जाता है कि किन-किन तरीकों से सरकार को राजस्व आय होने की संभावना है और किन-किन योजनाओं के जरिए वो उन पैसों को विकास योजनाओं में खर्च करेगी। भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 112’ में आय-व्यय का लेखा-जोखा पेश करने के बारे में लिखा गया है।

 

भारत में बजट का इतिहास

 

देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। आजादी के बाद पहला बजट देश के पहले वित्तमंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक की अवधि के लिए था। भारतीय गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को पेश किया गया था। इस बजट में योजना आयोग की स्थापना का वर्णन किया था। 

 

बजट निर्माण के उद्देश्य

 

बजट बनाने के दौरान सरकार का लक्ष्य आय के साधन बढ़ाते हुए योजनाओं के लिए धन आवंटन करना, देश की आर्थिक विकास दर में बढ़ोतरी करने के लिए योजनाएं बनाना, लोगों की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाने समेत गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने के लिए योजनाएं बनाना शामिल है। साथ ही देश में आधारभूत ढांचे के निर्माण, रेल, बिजली, सड़क के लिए धनराशि आवंटित करने के लिए भी बजट में प्रावधान रहते हैं। सरकार की आय के प्रमुख साधनों में विभिन्न प्रकार के कर और राजस्व, सरकारी शुल्क, जुर्माना, लाभांश, दिए गए ऋण पर ब्याज आदि तरीके शामिल है।

 

बजट निर्माण के चरण

 

1. बजट की रूपरेखा
2. बजट के दस्तावेज
3. संसद की स्वीकृति
4. बजट का निष्पादन
5. वित्तीय कोषों का लेखांकन और लेखा परीक्षण

 

पांच तरह के होते हैं बजट

 

1. पारम्परिक अथवा आम बजट
2. निष्पादन बजट
3. शून्य आधारित बजट
4. परिणामोन्मुख बजट
5. लैंगिक बजट

 

कौन तैयार करता है बजट?

 

भारत का केंद्रीय बजट कई विभागों के आपसी विचार-विमर्श के बाद तैयार होता है। इसमें वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और सरकार के कई अन्य मंत्रालय शामिल रहते हैं। वित्त मंत्रालय खर्च के आधार पर गाइडलाइन जारी करता है, इस पर अलग-अलग मंत्रालय अपनी ओर से फंड की मांग बताते हैं। जिसके बाद वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economics Affairs) की 'बजट डिवीजन' इसे तैयार करती है। 

 

बजट निर्माण की प्रमुख एजेंसियां

 

योजना आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, प्रशासनिक मंत्रालय, वित्त मंत्रालय

 

इस तरह तैयार होता है केंद्रीय बजट

 

केंद्र सरकार के बजट बनने की प्रक्रिया सामान्य स्थितियों में सितंबर से शुरू हो जाती है। इस दौरान आर्थिक मामलों के विभाग की बजट डिवीजन सभी मंत्रालयों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों, स्वायत्त निकायों और रक्षाबलों को सर्कुलर जारी करता है। जिसमें उनसे आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए उनके खर्चों का अनुमान लगाते हुए जरूरी फंड बताने के लिए कहा जाता है। फिर अलग-अलग विभागों के बीच फंड देने को लेकर चर्चा होती है। इसके साथ ही बजट डिवीजन राजस्व विभाग, उद्योग संघों, वाणिज्य मंडलों, किसान संघों, ट्रेड यूनियनों, अर्थशास्त्रियों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के हितधारकों के साथ चर्चा करते हुए बजट प्रावधान तैयार करते हैं।

 

किस विभाग को मिले कितनी रकम, ऐसे होता है तय

 

बजट के दौरान हर मंत्रालय अपने विभाग के लिए ज्यादा से ज्यादा फंड पाने की कोशिश में रहता है, ताकि वो योजनाओं पर ज्यादा पैसा खर्च कर सके। लेकिन सीमित आमदनी की वजह से सारे मंत्रालयों की इच्छा पूरी नहीं हो सकती। ऐसे में किस विभाग को कितनी रकम का आवंटन हो, इस बात को तय करने के लिए वित्त मंत्रालय अक्टूबर-नवंबर के दौरान अन्य मंत्रालयों के साथ बैठक करते हुए एक ब्लूप्रिंट बनाता है। बैठक में प्रत्येक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी फंड आवंटन के लिए वित्त मंत्रालय के साथ मोलभाव करते हैं।

 

बेहद गोपनीय होते हैं बजट दस्तावेज

 

बजट दस्तावेज बेहद गोपनीय रहते हैं। बजट तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी से लेकर अधीनस्थ कर्मचारी, स्टेनोग्राफर्स, टाइपराइटर्स, प्रिंटिग प्रेस के कर्मचारी और अन्य लोग दफ्तर में ही रहकर काम करते हैं। गोपनीयता को बनाए रखने के लिए आखिरी वक्त पर उन्हें अपने परिवार से बात करने की भी इजाजत नहीं रहती है। इस दौरान बजट तैयार करने वाले और इसके प्रकाशन से जुड़े लोगों पर कड़ी नजर रखी जाती है। बजट प्रक्रिया में वित्तमंत्री का भाषण सबसे सुरक्षित दस्तावेज होता है। जिसे बजट घोषणा से सिर्फ दो दिन पहले ही छपने के लिए भेजा जाता है। 

 

बजट तैयारी का अहम हिस्सा है 'हलवे की रस्म'

 

बजट से संबंधित दस्तावेजों की छपाई प्रक्रिया शुरू होने से पहले नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्म निभाई जाती है। जिसमें वित्त मंत्री बजट तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हलवा वितरण करते हैं। इस रस्म के होने के बाद से बजट पेश होने तक वित्त मंत्रालय के संबधित अधिकारियों को सात दिन तक सबसे दूर रखा जाता है। इस दौरान उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं करने दिया जाता। संसद में बजट पेश हो जाने के बाद ही उन्हें बाहर आने दिया जाता है।

 

राष्ट्रपति की अनुमति लेकर पेश होता है बजट

 

बजट की पहली ड्राफ्ट कॉपी को सबसे पहले वित्त मंत्री के सामने रखा जाता है। इसका पेपर नीले रंग का होता है। बजट पेश करने से पहले केंद्र सरकार को राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होती है। इसके बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाता है। फिर इसे संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है। आम बजट दो हिस्सों में बंटा होता है। पहले हिस्से में सामान्य आर्थिक सर्वे और नीतियों का ब्यौरा होता है तथा दूसरे हिस्से में आने वाले साल के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष करों के प्रस्ताव रखे जाते हैं।

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