जलवायु परिवर्तन:कोयले पर निर्भर है भारत, कार्बन उत्सर्जन की वजह से वैश्विक तापमान में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी

नई दिल्ली2 महीने पहले
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दुनियाभर में कार्बन एमिशन को कम करने के लिए ग्रीन एनर्जी को अपनाया जा रहा है। हालांकि भारत में कोयले पर निर्भरता कम नही हुई है। भारत के कुल एनर्जी प्रोडक्शन मे कोयले की हिस्सेदारी करीब 70% है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन उत्सर्जक है।

जीवाश्म ईंधन एनर्जी के मुख्य सोर्स कोयला, क्रू़ड ऑयल और नेचुरल गैस हैं। वैश्विक स्तर पर एनर्जी के लिए इन तीनों का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन में जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। कार्बन उत्सर्जन की वजह से वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। लोगों को ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिमी देश भारत से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कह रहे हैं। एमिशन को कम करने के लिए हमें कोयले पर निर्भरता कम करनी होगी।

आय के लिए कोयले पर निर्भर है लोकल कम्युनिटी
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कोयला इंडस्ट्री से लगभग 40 लाख लोग जुड़े हैं। अधिकतर कोयला की खदानें झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्यों में हैं। इन इलाकों में अर्थव्यवस्था काफी हद तक कोयले पर निर्भर है। लोकल कम्युनिटी के लोग आय के लिए कोयले की खदानों में मजदूरी करते हैं।

केंद्रीय मंत्री सुदर्शन मोहंती कहते हैं, कोयले से ग्रीन एनर्जी में शिफ्ट करने के एक सोची-समझी रणनीति की जरूरत है। क्योंकि इन इलाकों में कोयले से जुड़े रोजगार पर बहुत से लोग निर्भर हैं। अगर खदानें बंद होती हैं तो बहुत से लोगों का रोजगार छिन जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिटी के दबाव मे हम कोयले का उत्पादन नहीं रोक सकते।

भारत में बढ़ी है कोयले की खपत
पिछले एक दशक में भारत में कोयले की खपत लगभग दोगुनी हो गई है। भारत बड़ी संख्या में कोयले का आयात करता है। आने वाले सालों में भारत नई खदानें शुरू करने का प्लान बना रहा है। हालांकि, अभी भी ब्रिटेन या अमेरिकी देशों की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति पॉवर कंजम्पशन बहुत कम है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक अगले 20 साल में भारत की ऊर्जा जरूरत किसी भी दूसरे देश की तुलना में ज्यादा बढ़ेगी। इस बढ़त का कारण यहां की 130 करोड़ से भी ज्यादा की आबादी है।

ग्रीन एनर्जी के लिए भारत का लक्ष्य
भारत ग्रीन एनर्जी की तरफ शिफ्ट कर रहा है। देश ने 2030 तक अपनी स्थापित इलेक्ट्रिक पावर के 40% प्रोजेक्ट्स में एनर्जी उत्पादन के लिए गैर-जीवाश्म ईंधन के प्रयोग का लक्ष्य रखा है। दिल्ली मेट्रो में रोज की बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए 60% से ज्यादा सौर एनर्जी का यूज किया जाता है।

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