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सादगी के लिए जाने जाते हैं अजीम प्रेमजी, मौजूदा नेटवर्थ से 4 गुना संपत्ति पहले ही दान कर चुके हैं

2 वर्ष पहले
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  • रिटायरमेंट का ऐलान कर चुके 73 साल के प्रेमजी की मौजूदा नेटवर्थ 36 हजार करोड़ रुपए
  • प्रेमजी ने 2001 से चैरिटी शुरू की, अब तक 1.47 लाख करोड़ रुपए दान में दे चुके
  • अजीम प्रेमजी इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं, ऑटो-रिक्शा का भी इस्तेमाल कर लेते हैं

नई दिल्ली. विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी (73) ने गुरुवार को रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। 53 साल से विप्रो को संभाल रहे प्रेमजी 30 जुलाई को रिटायर हो जाएंगे। वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और फाउंडर चेयरमैन के तौर पर बोर्ड में रहेंगे। उनके बड़े बेटे रिशद प्रेमजी विप्रो के नए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनेंगे। प्रेमजी अपनी मौजूदा नेटवर्थ से चार गुना संपत्ति पहले ही दान कर चुके हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी मौजूदा नेटवर्थ 5.2 अरब डॉलर (करीब 36 हजार करोड़ रुपए) है। वे अब तक 21 अरब डॉलर (1.47 लाख करोड़ रुपए) दान कर चुके हैं।

 

अपनी मां के चैरिटेबल कामकाज से प्रेरित होकर प्रेमजी ने 2001 में अपनी दान यात्रा शुरू की थी। उन्होंने 875 करोड़ रुपए के साथ ‘द अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने इसके लिए 280 अरब रुपए और दान किए। उन्होंने इस साल मार्च में ही 52,750 करोड़ रुपए की वैल्यू के 34% शेयर दान किए थे। यानी अब तक वे शेयर्स से होने वाली अपनी 67% कमाई दान कर चुके हैं। 

 

प्रेमजी की सादगी और ईमानदारी के किस्से 
 

इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं, ऑटो-रिक्शा से भी परहेज नहीं
अजीम प्रेमजी जब कंपनी के काम से बाहर जाते हैं तो हमेशा ऑफिस गेस्ट हाउस में ही रुकते हैं। वे देश में यात्रा के दौरान इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं। एयरपोर्ट आने-जाने के लिए अपनी कार या टैक्सी की बजाय ऑटो से भी चले जाते हैं। ऐसा ही एक किस्सा उद्योगपति जमशेद गोदरेज ने सुनाया था। उन्होंने बताया था, \'एक शाम हमने अपने मांडवा के घर में डिनर के लिए अजीम को बुलाया। डिनर के बाद जब हम उन्हें गेट पर विदा करने गए तो देखा कि अजीम वहां कार से नहीं, बल्कि एक ऑटो से आए थे।\'

 

बिजली की बचत पर जोर देते हैं
प्रेमजी यह सुनिश्चित कराते हैं कि उनकी कंपनी का कोई भी कर्मचारी लाइट्स बंद किए बिना दफ्तर न छोड़े। वे यह भी सुनिश्चित कराते हैं कि उनके दफ्तरों के वॉशरूम में टॉयलेट पेपर का कम से कम इस्तेमाल हो। 

 

विप्रो की पहली फैक्ट्री जिस गांव में लगी, वहां के लोगों के पास 4,750 करोड़ रुपए के शेयर 

प्रेमजी के पिता ने विप्रो की शुरुआत महाराष्ट्र के जलगांव जिले के अमलनेर गांव में की थी। आज यह गांव करोड़पतियों से भरा हुआ है। 2.88 लाख आबादी वाले इस गांव के लोगों के पास विप्रो के 3% शेयर हैं। इनका मूल्य करीब 4,750 करोड़ रुपए है। इनमें से ज्यादातर शेयर 1970 के दशक में इन गांव वालों को कम कीमत पर दिए गए थे। जो शेयरहोल्डर्स हैं, उनमें किसान, किराना दुकान मालिक और सेवानिवृत्त लोग हैं। 

 

बिजली के लिए रिश्वत मांगी गई तो बोले हम खुद बना लेंगे बिजली 
1987 में विप्रो ने अपने तुमकूर (कर्नाटक) कारखाने के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया। कर्मचारी ने इसके लिए एक लाख रुपए रिश्वत मांगी। प्रेमजी ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नियम से सप्लाई नहीं मिलेगी तो हम अपनी बिजली बना लेंगे। विप्रो ने जेनरेटर से काम चलाया, जिससे 1.5 करोड़ रु. का नुकसान हुआ। 

 

पार्किंग सबकी है, अगर मुझे चाहिए तो ऑफिस पहले आना होगा 
एक बार विप्रो के एक कर्मचारी ने कार वहां पार्क कर दी, जहां अजीम अपनी कार खड़ी करते थे। अधिकारियों को पता चला तो सर्कुलर जारी किया गया कि कोई भी भविष्य में उस जगह पर गाड़ी खड़ी न करे। प्रेमजी ने जब यह देखा तो सर्कुलर का जवाब भेजा। उन्होंने लिखा कि कोई भी खाली जगह पर वाहन खड़े कर सकता है। यदि मुझे वही जगह चाहिए तो मुझे दूसरों से पहले ऑफिस आना होगा।

 

स्ट्रीट फूड से परहेज नहीं
विप्रो की 2000 में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग हुई। तब कंपनी ने सिंगापुर में एक रोड शो किया। उस समय प्रेमजी को मॉर्गन स्टेनली के ऑफिस में लंच का न्योता मिला। लेकिन उन्होंने सिंगापुर में स्ट्रीट फूड खाने का फैसला किया। इसी तरह मुंबई में भी वे अक्सर वड़ा पाव खाने चले जाया करते थे।

 

जिन्ना ने प्रेमजी के पिता को पाकिस्तान का वित्त मंत्री बनने का प्रस्ताव दिया था 
अजीम प्रेमजी के पूर्वज बर्मा में रहते थे और चावल का कारोबार करते थे। किन्हीं कारणों से परिवार भारत में गुजरात के कच्छ आ गया। यहां भी पहले अजीम के पिता एम.एच प्रेमजी ने चावल का कारोबार किया, फिर अंग्रेजों की नीतियों से परेशान होकर उन्होंने वनस्पति घी के कारखाने की शुरुआत की। इस तरह 29 दिसंबर 1945 को वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड कंपनी अस्तित्व में आई, जो बाद में विप्रो के नाम से जानी गई। एम.एच. प्रेमजी भारत के बड़े व्यापारी बन चुके थे। इसीलिए बंटवारे के वक्त मोहम्मद अली जिन्ना ने उन्हें पाकिस्तान चलकर वहां का वित्त मंत्री बनने का प्रस्ताव दिया। इसे प्रेमजी ने ठुकरा दिया। 

 

पिता की मौत के बाद 21 साल की उम्र में कंपनी संभाली
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान 11 अगस्त 1966 को अजीम प्रेमजी के पास भारत से एक फोन कॉल आया। उस जमाने में ज्यादातर ट्रंक कॉल्स दहलाने वाली खबरें लेकर आती थीं। ऐसा ही हुआ। फोन पर दूसरी तरफ उनकी मां गुलबानू थीं, जिन्होंने उन्हें पिता की मौत की खबर दी। अब कंपनी की जिम्मेदारी अजीम पर आ चुकी थी। उन्हें 21 साल की उम्र में कंपनी संभालनी पड़ी। 

 

प्रेमजी ने 53 साल में रेवेन्यू 45 हजार और मार्केट कैप 26 हजार गुना बढ़ाई
अजीम प्रेमजी ने जब कंपनी की बागडोर संभाली तब कंपनी का सालाना रेवेन्यू करीब 1.30 करोड़ रुपए था। 53 साल बाद अब जब उन्होंने कंपनी छोड़ने का ऐलान किया है, तब कंपनी का सालाना रेवेन्यू 58,500 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। यानी इन 53 सालों में कंपनी का रेवेन्यू 45,000 गुना बढ़ा। कंपनी के मार्केट कैप में भी 26 हजार गुना बढ़ोतरी हुई। 1965 के दौर में कंपनी की मार्केट वैल्यू 7 करोड़ थी, जो अब 1.84 लाख करोड़ रुपए है। 

 

प्रेमजी ने कहा था- विप्रो वही संभालेगा जो इस लायक होगा
2006 में एक इंटरव्यू में अजीम प्रेमजी ने कहा था कि इतने बड़े और जटिलताओं वाले संस्थान को बेटों के हाथों में यूं ही नहीं दिया जा सकता। मुझे लगता है कि जो भी इसे संभालेगा, उसे इसके लायक बनना पड़ेगा। इसके लिए उचित योग्यता और परिपक्वता की जरूरत है। यह बहुत कठिन जॉब है। अगले ही साल 2007 में रिशद ने विप्रो ज्वॉइन की। लेकिन उससे पहले उन्होंने यूरोप में एक ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म में काम किया और इससे पहले लंदन में जनरल इलेक्ट्रिक एंड कंसल्टेंसी फर्म बेन एंड कंपनी में काम किया।

 

रिशद ने 2015 में दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वे विप्रो में एक आम कर्मचारी की तरह ही शामिल हुए थे। उन्होंने बताया था कि, ‘\"विप्रो में जाना मेरा व्यक्तिगत फैसला था। गिरिश परांजपे ने मेरा इंटरव्यू लिया था, जब वे लंदन में थे। मैंने उन्हें उसी तरह अप्रोच किया जैसे बाकी लोग नई नौकरी के लिए करते थे। मैं बिना किसी उम्मीद के उनके पास गया था। मैं सिर्फ एक नई नौकरी ढूंढ रहा था।’’

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