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क्या होगा नए ई-कॉमर्स रूल का असर:बढ़ेगी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों की लागत, अमेजन और वॉलमार्ट को बदलना होगा कारोबारी ढांचा

5 महीने पहले
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सरकार ने ई-कॉमर्स के लिए जो नियम बनाए हैं, उनसे खास तौर पर ऑनलाइन रिटेल कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक अमेजन और वॉलमार्ट की फ्लिपकार्ट को अपने कारोबारी ढांचे में बदलाव लाना होगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स 2020 में संशोधन का मसौदा जारी किया है।

फ्लैश सेल पर लगाम

संशोधन मसौदे में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फ्लैश सेल को सीमित करने और प्राइवेट ब्रांड को बढ़ावा देने की कवायद पर लगाम लगाने के प्रावधान शामिल हैं। कंपनियों की तरफ से कंप्लायंस ऑफिसर अपॉइंट किए जाने और सेलर की अनदेखी से कस्टमर को नुकसान होने पर उसकी जिम्मेदारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डालने का भी प्रावधान किया गया है।

2026 तक 200 अरब डॉलर का हो जाएगा बाजार

जानकारों के मुताबिक, इस नियम से टाटा की बिगबास्केट, रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियोमार्ट, सॉफ्टबैंक के सपोर्ट वाली स्नैपडील से लेकर अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे मार्केट लीडर वाले भारतीय ई-रिटेल मार्केट पर गहरा असर होगा। एक अनुमान के मुताबिक, इसका साइज 2026 तक बढ़कर 200 अरब डॉलर का हो सकता है।

ई-कॉमर्स कंपनियों की कारोबारी लागत बढ़ेगी

लॉ फर्म एपी एंड पार्टनर्स के पार्टनर अर्जुन सिन्हा के मुताबिक, 'नियमों का हर तरह के ई-कॉमर्स पर गहरा असर होगा और इससे कारोबारी लागत बढ़ेगी। छोटी-बड़ी, हर तरह की ईकॉमर्स कंपनियां नई पॉलिसी को स्टडी कर रही हैं। वे इसको लेकर अपनी चिंताओं से सरकार को जल्द अवगत कराएंगी।'

सुझाव और टिप्पणी के लिए 6 जुलाई तक का समय

ई-कॉमर्स कंपनियों को प्रस्तावित नियमों पर सुझाव और टिप्पणी भेजने के लिए 6 जुलाई तक का समय दिया है। इसके जरिए सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता लाना चाहती है। उसके बाद सरकार उन नियमों की समीक्षा करेगी या उसको लागू करेगी।

इंपोर्टेड प्रॉडक्ट की लिस्टिंग के साथ देसी विकल्प देना होगा

नियम में प्रस्तावित बदलाव का एक अहम पहलू यह है कि ई-रिटेलर को अपने प्लेटफॉर्म पर इंपोर्टेड प्रॉडक्ट की लिस्टिंग के साथ ग्राहकों को विकल्प भी देना होगा। टेकलेजिस एडवोकेट्स के पार्टनर सलमान वारिस के मुताबिक, 'इससे घरेलू प्रॉडक्ट को बढ़ावा मिलेगा। यह मेड इन इंडिया प्रॉडक्ट्स के लिए तो सही है, लेकिन प्लेटफॉर्म के लिए नहीं।'

दोषी को कैद और 25,000 रुपए तक का जुर्माना

वारिस ने कहा कि नियम लागू होने के बाद, उनका पालन नहीं होने पर उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े नियमों के मुताबिक, दोषी को कैद हो सकती है और उस पर 25,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार ने सोमवार को कहा था कि ई-कॉमर्स स्पेस में धोखाधड़ी और कारोबार के गलत तौर-तरीके अपनाए जाने की शिकायतों के बाद नोटिफिकेशन जारी किए जा रहे हैं।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सेलर नहीं बन पाएगी अपनी यूनिट

नए नियमों से सबसे ज्यादा झटका फ्लिपकार्ट और अमेजन को लगेगा। उनमें कुछ ऐसे क्लॉज शामिल हैं, जिसके मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियों की कोई यूनिट उनके प्लेटफॉर्म पर सेलर के तौर पर खुद को लिस्ट नहीं करा पाएगी। उसकी कोई सहयोगी कंपनी भी उसके प्लेटफॉर्म पर अपने प्रॉडक्ट नहीं बेच पाएगी।

विदेशी निवेश के प्रावधानों के मुताबिक अपने प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट सेल मना

अमेजन के टॉप सेलर एंटिटी में से दो में ई-कॉमर्स फर्म का इनडायरेक्ट इनवेस्टमेंट है। घरेलू रिटेल कंपनियों की शिकायत है कि अमेजन और फ्लिपकार्ट अपने प्लेटफॉर्म पर चुनिंदा सेलर्स के जरिए अपनी होलसेल यूनिट के प्रॉडक्ट्स इनडायरेक्ट तरीके से बेचती है। विदेशी निवेश के प्रावधानों के मुताबिक वे अपने प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट सेल नहीं कर सकतीं।

विदेशी निवेश के सख्त नियम लागू करने की सरकार की कोशिश

इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, अमेजन और फ्लिपकार्ट इन प्रस्तावों का विरोध कर सकती है। कुछेक का मानना है कि सरकार इस तरह विदेशी निवेश के सख्त नियम लागू करने की कोशिश कर रही है। इन नियमों के लागू होने से फ्लिपकार्ट और अमेजन सेलर्स के साथ खास तरह के कारोबारी करार नहीं कर सकेंगी।

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