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  • The Labour Force Participation Rate (LFPR) Among Women In The Country, Already One Of World’s Lowest Unemployment; Fall Has Sharpest In 15 24 Years Age Group

रोजगार के मामले में दुनिया में सबसे बदतर हालात में भारतीय महिलाएं, 15 से 24 वर्ष के वर्ग में सबसे ज्यादा बेरोजगारी

एक वर्ष पहले
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  • पिछले कुछ साल में महिला रोजगार में गिरावट दर्ज की जा रही है
  • 15-24 साल की महिलाओं में बेरोजगार में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है

नई दिल्ली. दुनियाभर में 8 मार्च को महिला दिवस मनाया गया है। इस दौरान भारत में भी महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया। लेकिन वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाएं रोजगार के मामले में निचले पायदान पर खड़ी हैं। भारतीय महिलाएं पुरुषों के मुकाबले रोजगार के मोर्चे पर काफी पीछे हैं। महिलाओं में साक्षरता दर बढ़ने के बावजूद पिछले कुछ पिछले कुछ वर्षों में कामकाजी महिलाओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं नौकरी से लिए ज्यादा असुरक्षित है। वर्ल्ड इकोनॉमिक्स फोरम ने बेन एंड कंपनी और गूगल की साझा इनपुट्स के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है।

15-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में सबसे ज्यादा बेरोजगारी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय महिलाओं का श्रम योगदान यानी लेबर फोर्स पार्टिसिपेंट्स रेट (एलएफपीआर) दुनिया में सबसे कम है, जिसमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रोजगार में 15-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में सबसे ज्यादा गिरावट रही है। एलएफपीआर में 16-64 साल के ऐसे लोग रजिस्टर्ड है, जो या तो कार्यरत है या फिर नौकरी ती तलाश में है।

भारत में कुल बेरोजगारी दर 7 फीसदी है
वर्तमान में भारत में कुल बेरोजगारी दर 7 फीसदी है। लेकिन महिलाओं में बेरोजगारी दर 18 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है, "अगर तत्काल आधार पर इस पर काम नहीं किया जाएगा, तो पुरुषों और महिलाओं के बीच आर्थिक और रोजगार की खाई और बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले सालों में अकेले महिलाओं के लिए लगभग 400 मिलियन नौकरियों की आवश्यकता होगी।

बेरोजगारी की समस्या बढ़ सकती है
बैन एंड कंपनी-गूगल की रिपोर्ट में वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ वुमन पॉलिसी रिसर्च की ओर से 2019 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि महिलाएं ज्यादातर प्रशासनिक और डेटा-प्रोसेसिंग भूमिका निभाती हैं। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से डेटा प्रोसेसिंग और प्रशानिक सेक्टर में नौकरी की कमी हो सकती है। इससे महिलाओं की नौकरी छिनने का खतरा पैदा हो सकता है।

महिला उद्यमी स्थायी समाधान
रिपोर्ट में कहा गया कि नौकरी के अवसर पैदा करना समय की जरूरत है। इसके अलावा महिलाओं को उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करना लंबे वक्त के लिए स्थायी समाधान होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई नौकरियों के पैदा होने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य और शिक्षा में महिलाओं के बीच निवेश बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।