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यस बैंक पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना:एटी 1 बांड के मामले में सेबी का फैसला, 3 और लोगों पर 1.5 करोड़ रुपए की इसी मामले में पेनाल्टी

मुंबई8 महीने पहले
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शेयर बाजार रेगुलेटर ने एटी1 बांड के मामले में यस बैंक पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसी के साथ इसी मामले में विवेक कंवर पर 1 करोड़ रुपए, आशीष नासा और जसजीत सिंह बांगा पर 50-50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है - Dainik Bhaskar
शेयर बाजार रेगुलेटर ने एटी1 बांड के मामले में यस बैंक पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसी के साथ इसी मामले में विवेक कंवर पर 1 करोड़ रुपए, आशीष नासा और जसजीत सिंह बांगा पर 50-50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है
  • राणा कपूर को 16 अप्रैल को जवाब देने का समय दिया गया है
  • राणा कपूर अभी तलोजा जेल में बंद हैं, वे भी इसमें आरोपी हैं

शेयर बाजार रेगुलेटर ने एटी1 बांड के मामले में यस बैंक पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसी के साथ इसी मामले में विवेक कंवर पर 1 करोड़ रुपए, आशीष नासा और जसजीत सिंह बंगा पर 50-50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। सेबी ने सोमवार को 61 पेज का ऑर्डर जारी किया। इस ऑर्डर में सेबी ने इस रकम को 45 दिनों के अंदर भरने का आदेश दिया है।

सेबी को मिली थी शिकायतें

सेबी ने आदेश में कहा कि उसे निवेशकों की ओर से बेसल-3 के तहत एडिशनल टियर 1 बांड्स (AT1 Bonds) की बिक्री के मामले में काफी शिकायतें मिली थीं। इसमें से कुछ शिकायतों को सेबी ने अपने आदेश में भी दिया है। इसके मुताबिक, हरि प्रकाश ने पिछले साल 18 नवंबर को शिकायत की कि उन्होंने 5 लाख रुपए का निवेश इस बांड्स में किया था। इस बांड्स में निवेशकों को सुपर एफडी के जैसे रिटर्न का दावा किया गया। इस पैसे को निप्पोन इंडिया इक्विटी हाइब्रिड फंड में निवेश किया गया।

सही जानकारी नहीं दी गई

दूसरे निवेशक कार्तिक शर्मा ने अक्टूबर 2020 में 9.69 लाख रुपए निवेश किया। उन्होंने कहा कि एटी1 बांड के अप्लीकेशन के लिए जो जरूरी डॉक्यूमेंट में जानकारी दी गई थी, वह सही नहीं थी। एन राममूर्ति ने 10.57 लाख रुपए लगाए थे। उन्होंने शिकायत की कि यस बैंक मेनिपुलेशन यानी जुगाड़ में लगा था। क्वालीकेम इंडस्ट्री ने 80 लाख रुपए निवेश किया। उसने शिकायत की कि उसे बांड के बारे में एफडी से ज्यादा सुरक्षित बताया गया था। इसी तरह ढेर सारे निवेशकों ने काफी पैसे लगाए लेकिन सबने किसी न किसी आधार पर शिकायत सेबी के पास की।

सेबी ने शिकायतों पर जांच शुरू की

इस तरह की शिकायत के बाद सेबी ने इसकी जांच शुरू की। सेबी ने 1 दिसंबर 2016 से 29 फरवरी 2020 के बीच जांच की। सेबी ने इस मामले में यस बैंक, तब के सीईओ राणा कपूर, यस बैंक के प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट टीम के प्रमुख विवेक कंवर, आशीश नासा और जसजीत सिंह बंगा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। सेबी ने पाया कि बैंक ने संस्थागत और रिटेल निवेशकों को इस बांड की बिक्री की। हालांकि जो व्यक्तिगत निवेशक थे, उन्हें इसके जोखिम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

निवेशकों को गलत तरीके से बांड बेचा गया

सेबी ने आदेश में कहा कि व्यक्तिगत निवेशकों को यह बांड गलत तरीके से बेचा गया। इसमें इन आरोपियों ने सेबी के नियमों का उल्लंघन किया। सेबी ने हालांकि जब नोटिस भेजी तो राणा कपूर की नोटिस वापस लौट आई। सेबी ने कहा कि उसे मीडिया के जरिए पता चला कि राणा कपूर तलोजा जेल में बंद हैं। राणा कपूर को 26 मार्च 2021 को फिर से सुनवाई का मौका दिया गया। यह नोटिस उन्हें तलोजा जेल में दी गई। हालांकि फिर भी इस मामले में राणा कपूर से सेबी की कोई बात नहीं हुई और अब उन्हें 16 अप्रैल 2021 को जवाब देने को कहा गया है। उन पर सुनवाई बाद में होगी।

हर रिटेल निवेशक ने 70 लाख रुपए लगाए

सेबी ने कहा कि इस बांड में औसतन हर रिटेल निवेशक ने 70 लाख रुपए का निवेश किया। हालांकि इतनी बड़ी राशि से ये लोग एचएनआई की कैटिगरी में आ गए। इस बांड में कुल 1346 रिटेल निवेशकों ने पैसे लगाए थे। इसमें से 1311 निवेशक बैंक के ग्राहक थे। इसमें से 277 निवेशकों ने बैंक की अपनी एफडी समय से पहले तोड़ कर बांड में पैसे लगाए थे। बैंक ने इस बांड को 23 दिसंबर 2016 का लांच किया था और 3 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य था। जबकि 18 अक्टूबर 2017 को बेसल 3 का जो अतिरिक्त टियर 1 बांड जारी किया गया उससे 5,415 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया।

सेबी ने जांच में पाया कि यस बैंक और इसके अधिकारियों ने एटी1 बांड को बेचने में काफी गलत काम किया। गलत जानकारी दी और निवेशकों के पैसे को डुबोया। इस आधार पर सेबी ने सोमवार को चारों के खिलाफ ऑर्डर पास कर दिया।