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कोविड-19 का इलाज:हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने सिंगल-यूज्ड सामग्री को अब नॉन-मेडिकल आइटम माना, अस्पताल के बिल में शामिल ऐसे आइटम का पेमेंट नहीं कर रहीं

नई दिल्ली4 महीने पहले
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कोविड-19 के सामान्य उपचार के लागत पहले 50,000 से 1 लाख रुपए तक थी, जो अब बढ़कर 1 लाख से 2 लाख रुपए हो गई है
  • पीपीई किट, नाइट्राइल ग्लब्ज, ट्रांसपेरेंट गॉगल, एन-95 मास्क, शू कवर और फेस शील्ड का इस्तेमाल हो रहा
  • अगर कोरोना संक्रमित व्यक्ति सिर्फ कमरे में है, तो इंक्रीमेंटल कॉस्ट लगभग 1500 रुपए प्रतिदिन होती है

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी आमतौर पर किसी मरीज के उपचार के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों को कवर नहीं करती हैं। हालांकि, कोरोनावायरस के बाद इन पॉलिसी में बदलाव हुआ है। दरअसल, कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की संख्या लगातार बढ़ रही है।

दिल्ली स्थित इंश्योरेंस ब्रोकर चंदन डी एस डांग जो securenow.in में एग्जीक्युटिव डायरेक्टर हैं, उन्होंने कहा, "कोविड-19 के सामान्य उपचार के लागत पहले 50,000 से 1 लाख रुपए तक थी, जो अब बढ़कर 1 लाख से 2 लाख रुपए हो गई है। वहीं इसके उपचार में 6 से 7 लाख रुपए का खर्च आ रहा है और महंगे अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है।"

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के उपचार में सिंगल-यूज्ड सामग्रियों का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें अब नॉन-मेडिकल आइटम माना जा रहा है। इसी वजह से मेडिकल बीमा पॉलिसियों में इनका पेमेंट नहीं किया जा रहा।

कोविड-19 के उपचार की लागत क्यों बढ़ गई?

अस्पताल को कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए पीपीई किट, एक जोड़ी नाइट्राइल ग्लब्ज, सिंगल यूज कवरॉल, ट्रांसपेरेंट ग्लास गॉगल, एन-95 मास्क, शू कवर और फेस शील्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। इलाज में इस्तेमाल होने वाले इन सभी आइटम को अलग-अलग माना जाता है। इसी वजह से कोविड-19 के उपचार में उपयोग होने वाले सामग्रियों की संख्या बढ़ रही है।

प्रोबस इंश्योरेंस ब्रोकर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक, राकेश गोयल ने कहा कि औसत रूप से इस्तेमाल सामग्रियों की लागत उपचार लागत का 10 प्रतिशत है। हालांकि, कोविड-19 उपचार में इस्तेमाल सामग्रियों की लागत काफी बढ़ जाती है, क्योंकि यह संक्रमण की गंभीरता और अस्पताल में भर्ती होने की अवधि से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, 14 दिनों की अनिवार्य क्वारेन्टाइन की वजह से इस्तेमाल होने वाली सामग्री बढ़ गई है, जैसे पीपीई किट, गॉगल, जूते, सैनिटाइटर का इस्तेमाल जरूरी है।

डांग ने बताया कि कोविड-19 के उपचार में उपयोग सामग्रियों की सूची बढ़ जाती है और कुल उपचार लागत का लगभग 25 प्रतिशत हो सकता है। नियामक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोविड उपचार की लागत में उपयोग सामग्रियों की संपूर्ण लागत को शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि अगर व्यक्ति सिर्फ कमरे में है, तो इनक्रीमेंटल कॉस्ट लगभग 1,500 रुपए प्रतिदिन है। नर्स, डॉक्टर और कर्मचारी दिनभर इन सूटों को पहनते हैं, इसलिए लागत बढ़ जाती है। हालांकि, एक सर्जरी के दौरान इनक्रीमेंटल कोस्ट लगभग 6,000 रुपए प्रति सर्जरी होती है, जो 5 पीपीई सूट पर लगभग 1,200 रुपए प्रति सूट होती है।

प्रत्येक सर्जरी के बाद इन्हें त्यागने की आवश्यकता होती है। इसलिए सर्जरी के साथ सप्ताह भर तक अस्पताल में भर्ती होने पर 16,500 रुपए देने होते हैं। इसमें 7 दिनों तक प्रति दिन का चार्ज 1500 रुपए और सर्जरी कोस्ट 6000 रुपए शामिल है।

कोविड-19 के इजाल में उपयोग होने वाली सामग्री महंगी है, ज्यादातर बीमाकर्ता इसका पेमेंट नहीं करते

अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कोविड-19 के इजाल में इस्तेमाल होने वाली पीपीई किट और अन्य सामग्रियों की लागत को कवर नहीं करती हैं। कुछ बीमाकर्ताओं ने इन सामग्रियों को नॉन-पेअबल मेडिकल आइटम के रूप में माना है। इसका खर्च बीमाधारक को खुद उठाना पड़ रहा है।

पॉलिसीएक्स.कॉम के सीईओ और संस्थापक, नवल गोयल ने कहा कि कोविड-19 के कारण अस्पताल पीपीई जैसी सामग्रियों का चार्ज ले रहे हैं। अस्पतालों ने पुष्टि की कि कोविड-19 उपचार के लिए आवश्यक सामग्रियों के कारण बिल में लगभग 25% की वृद्धि हुई है। हालांकि, बीमा कंपनियां क्लेम निपटाने के दौरान पीपीई लागत को कवर नहीं करती हैं। यह केस टू केस बेसिस पर निर्भर करता है।

स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक डॉ. एस प्रकाश बताते हैं कि कुछ उपयोग सामग्री मेडिक्लेम पॉलिसियों के दायरे में नहीं आती हैं। जो भी सामग्रा बेहद जरूरी है और उचित रूप से चार्ज की जाती हैं, उन्हें हेल्थ पॉलिसी के तहत कवर किया जाता है। हालांकि, समस्या कुछ वस्तुओं के साथ होती है जिनमें व्यापार मार्जिन बहुत अधिक है। क्योंकि ऐसी सामग्री का भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन नहीं होता।

पॉलिसीधारक क्या कर सकते हैं?

बीमा कंपनियों के पास अपने हेल्थ कवर में उपयोग सामग्रियों को शामिल करने, बाहर करने और उसके अनुसार प्रीमियम चार्ज करने की छूट है। बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमाकर्ताओं के विवेक पर छोड़ दिया है कि वे पीपीई किट जैसी इस्तेमाल में आने वाली सामग्रियों के लिए भुगतान करना चाहते हैं या नहीं।

प्रकाश ने कहा कि अधिकांश स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी जिनमें प्रीमियम कम होता है, आमतौर पर इनमें से कुछ उपयोग सामग्रियों को कवर किया जा सकता है। वहीं, यदि पॉलिसी का प्रीमियम ज्यादा है और यदि यह एक हाई-एंड पॉलिसी है तो यह आमतौर पर उपचार में उपयोग होने वाली अधिकांश सामग्रियों को कवर करती है।

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