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यश बिरला पर प्रतिबंध:GDR में गड़बड़ी, 4 लोगों को 59 करोड़ रुपए वापस लौटाने का सेबी का आदेश

मुंबईएक महीने पहले
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सेबी ने ऑर्डर में कहा कि कंपनी ने निवेशकों के लिए कई सारे मामलों का खुलासा नहीं किया। अरुण पंचारिया पैन एशिया एडवाइजर्स में डायरेक्टर थे। पैन एशिया GDR की लीड मैनेजर थी। अरुण पंचारिया 12 आरोपियों में से 7 आरोपियों से जुड़े थे। GDR को हर चरण पर अरुण पंचारिया ही कंट्रोल कर रहे थे। सेबी ने इसके बाद सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया - Dainik Bhaskar
सेबी ने ऑर्डर में कहा कि कंपनी ने निवेशकों के लिए कई सारे मामलों का खुलासा नहीं किया। अरुण पंचारिया पैन एशिया एडवाइजर्स में डायरेक्टर थे। पैन एशिया GDR की लीड मैनेजर थी। अरुण पंचारिया 12 आरोपियों में से 7 आरोपियों से जुड़े थे। GDR को हर चरण पर अरुण पंचारिया ही कंट्रोल कर रहे थे। सेबी ने इसके बाद सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया
  • 12 लोगों को शेयर बाजारों में कारोबार करने पर प्रतिबंध भी लगा दिया है
  • जीडीआर का मतलब विदेशी बाजारों में शेयरों को लिस्ट कराना है

शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी ने एक बड़ा फैसला दिया है। जेनिथ बिरला के ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसिप्ट (GDR) में गड़बड़ी के मामले में 4 लोगों को 59.06 करोड़ रुपए वापस लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही 12 लोगों को शेयर बाजारों में कारोबार करने पर प्रतिबंध भी लगा दिया है। इसमें यश बिरला भी शामिल हैं।

6 पर्सेंट की दर से ब्याज भी देना होगा

इस पर 6 पर्सेंट सालाना ब्याज भी देना होगा। इस रकम को 45 दिनों के अंदर जमा कराना होगा। अगर ये रकम जमा नहीं होती है तो सभी पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। यह प्रतिबंध तब तक रहेगा, जब तक यह रकम जमा नहीं होगी।

92 पेज का ऑर्डर जारी किया

सेबी ने मंगलवार की देर रात 92 पेज का ऑर्डर जारी किया। इसमें जेनिथ बिरला, अरुण पंचारिया और विेंटेज पर 3 साल का प्रतिबंध लगाया है। बाकी लोगों पर 1 से 2 साल का प्रतिबंध लगाया है। सेबी के मुताबिक, उसने जेनिथ बिरला द्वारा जारी किए गए GDR की जांच की थी। GDR का मतलब भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों के बाजार में इश्यू जारी कर पैसा जुटाने से है।

1.81 मिलियन जीडीआर जारी किया गया

सेबी ने पाया कि जेनिथ ने 1.81 मिलियन GDR जारी किया था। इसकी रकम 22.99 मिलियन डॉलर थी। यह GDR 28 मई 2010 में जारी किया गया था। सेबी के मतुाबिक, यह GDR लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुआ था। यूरोपियन अमेरिकन इन्वेस्टमेंट बैंक एजी ने विेंटेज एफजेडई को 12 मई 2020 को GDR सब्सक्राइब करने के लिए लोन दिया था। यह पाया गया कि विंटेज ने इस लोन का GDR को खरीदने में उपयोग किया। GDR का पूरा शेयर विंटेज ने ही खरीद लिया था।

लोन एग्रीमेंट साइन किया

इसके बाद अरुण पंचारिया ने विंटेज के प्रबंध निदेशक के रूप में लोन एग्रीमेंट साइन किया। यह भी पाया गया कि मुकेश चौरडिया भी विंटेज के प्रबंध निदेशक थे। जांच में यह खुलासा हुआ कि कंपनी ने GDR की पूरी रकम औरम बैंक के पास गिरवी रख दिया। इसके लिए कंपनी ने एक गिरवी एग्रीमेंट भी बनाया था। इस पर पीवीआर मूर्थि ने साइन किया था। यही नहीं, जांच में पाया गया कि 12 लोगों में से 4 लोग न केवल साइनिंग अथॉरिटी थे, बल्कि वे जेनिथ के डायरेक्टर भी थे।

4 लोग बोर्ड मीटिंग में शामिल हुए

सेबी के मुताबिक, 4 लोग जेनिथ की बोर्ड मीटिंग में भी शामिल हुए थे। जांच में पता चला कि 22.99 मिलियन डॉलर के लोन में विंटेज ने 14 दिसंबर 2012 तक केवल 8.53 मिलियन डॉलर का ही लोन का पेमेंट किया। यह पेमेंट औरम बैंक को कई चरणों में किया गया। इसके बाद बाकी का लोन भरने में कंपनी डिफॉल्ट हो गई।

गिरवी जीडीआर को सेट ऑफ किया

इसके बाद पीवीआर मूर्थि ने गिरवी रखे गए GDR को बाकी के लोन के एवज में सेट ऑफ करने की मंजूरी दे दी। इसके बाद औरम बैंक ने गिरवी शेयरों को लोन के एवज में एडजस्ट कर दिया। सेबी ने जांच में पाया कि जो भी GDR जारी किया गया था वह बिना किसी सोच समझ के किया गया था।

जीडीआर कैंसल किया गया

जांच में पता चला कि 18.1 लाख GDR कैंसल कर दिया गया और इसे इक्विटी शेयर के रूप में बदल दिया गया। कैंसल के बाद यह पाया गया कि जेनिथ के 4.77 करोड़ शेयरों को 13.77 लाख जीडीआर में बदला गया। इसे भारतीय सिक्योरिटीज बाजार में विदेशी निवेशकों (एफआईआई) के उप खातों के जरिए बेचा गया। इसमें इंडिया फोकस कार्डिनल फंड नामक एफआईआई शामिल था। इसी तरह जेनिथ के 1.15 करोड़ शेयरों को 3.19 लाख GDR में बदला गया। इसे भी भारतीय बाजार में बेचा गया। इसे हाई ब्लू स्काई इमर्जिंग मार्केट फंड के जरिए बेचा गया।

जीडीआर को इक्विटी शेयरों में बदला

जांच में यह भी सामने आया कि कुल 18.1 लाख GDR में से विंटेज ने 16.9 लाख GDR को इक्विटी शेयर में बदल दिया और इसे 59.06 करोड़ रुपए में बेच दिया। जबकि कंपनी 14.50 मिलियन डॉलर के कीमत के GDR को प्रोसेस करने में फेल रही। सेबी ने ऑर्डर में कहा कि कंपनी ने निवेशकों के लिए कई सारे मामलों का खुलासा नहीं किया।

सेबी ने जांच में कहा कि अरुण पंचारिया पैन एशिया एडवाइजर्स में डायरेक्टर थे। पैन एशिया GDR की लीड मैनेजर थी। अरुण पंचारिया 12 आरोपियों में से 7 आरोपियों से जुड़े थे। GDR को हर चरण पर अरुण पंचारिया ही कंट्रोल कर रहे थे। सेबी ने इसके बाद सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और इसी के बाद मंगलवार को ऑर्डर जारी कर दिया।

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