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हैफेड के गोदाम फिर अटके, हर महीने पौने ३ करोड़ का हो रहा नुकसान

हैफेड के गोदाम फिर अटके, हर महीने पौने ३ करोड़ का हो रहा नुकसान

Danik Bhaskar | Dec 02, 2017, 03:36 PM IST

चंडीगढ़। पिछली कांग्रेस सरकार में बनकर तैयार हुए करीब 22 जगह के गोदाम अब हरियाणा स्टेट को-ऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फैडरेशन लिमिटेड (हैफेड) के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। हर महीने किराया राशि के रूप में करीब 2.76 करोड़ रुपए का नुकसान उठाने के बावजूद इन पर छत तक नहीं डल पा रही है।

वह भी तब जब इसके लिए टेंडर होकर फाइनल हो चुके हैं। हाई पावर परचेज कमेटी की ओर से कंपनी को वर्क अलॉट किया जा चुका है। यहां तक कि हैफेड भी अपनी बोर्ड मीटिंग में इन गोदामों को जल्दी तैयार करवाने के लिए अपनी हरी झंडी दे चुका है।


लाल फीताशाही में अटके इन गोदामों पर छत न लग पाने के लिए अब तक किसी इंजीनियर अथवा अफसर की जिम्मेदारी तक तय नहीं हो पाई है। बल्कि, इसमें अफसरों की लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए अब गोदामों की दीवारों (स्ट्रक्चर) की मजबूती (स्ट्रेंथ) की बात तो की जा रही है, लेकिन यह मामला भी पिछले कई महीने से फाइलों में घूम रहा है।


हैफेड के चेयरमैन हरविंदर कल्याण का कहना है कि इन गोदामों को लेकर हम जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहते। इसलिए इन गोदामों के सिविल स्ट्रक्चर (दीवारों) की क्वालिटी, स्ट्रेंथ आदि सुनिश्चित करने के बाद ही इन पर छतें डालने का काम कराया जाएगा। उनकी कोशिश है कि जो गलतियां पिछली सरकार में हुईं, उन्हें दोहराने के बजाय ठीक करके ही आगे काम कराया जाए। सिविल वर्क की क्वालिटी जांच के बाद इस काम जल्दी ही पूरा कराया जाएगा।


ऐसे अटका रहे हैं अफसर काम...

सूत्रों के मुताबिक गोदामों पर छत डालने का वर्क ऑर्डर लेने वाली कंपनी को यह काम 3 महीने में ही पूरा करना है। हाइ पावर परचेज कमेटी ने मार्च में वर्क अलॉट किया था। उसके हिसाब से काम पूरा करने की अवधि जून में पूरी हो गई थी। लेकिन, हैफेड अफसरों की अडंगेबाजी के चलते यह काम पूरा नहीं हुआ। पेनल्टी लगने के डर से हैफेड अफसरों ने कंपनी से काम की अवधि बढ़वाई। इसके बाद अब पिछले महीने ही 26 अक्टूबर की बोर्ड मीटिंग में हैफेड ने इस काम को समयबद्ध तरीके से जल्दी पूरा कराए जाने को हरी झंडी दे दी थी। यहां तक कि किन-किन गोदामों पर पहले छत लगाई जानी है। इसकी प्राथमिकता भी तय कर दी गई थी। स्ट्रक्चर स्ट्रेथन के नाम पर यह मामला फिर अटका दिया गया। जबकि कंपनी ने साइट पर मार्च में ही मैटेरियल डाल दिया था। इसी महीने 1, 2 और 3 नवंबर को हैफेड के अधिकारियों ने छत मैटेरियल के नमूने भी कटवा लिए। लेकिन इन्हें टेस्टिंग के लिए अभी तक लैब में भी नहीं भेजा गया है।


सिविल स्ट्रक्चर की क्वालिटी पर भी है विवाद...

दरअसल, इन गोदामों के वर्ष 2014 में बने सिविल स्ट्रक्चर की क्वालिटी को लेकर इंजीनियरों में ही विवाद बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि कुछ गोदामों की दीवारें और फर्श खराब हो चुके हैं। हैफेड के इंजीनियर अब इस बात से डरे हुए हैं कि इन गोदामों की दीवारें छत का वजन झेल ही नहीं पाएं और उल्टा ज्यादा नुकसान हो जाए। फिर इसकी जिम्मेदारी उन पर न आ जाए। इसीलिए इस मुद्दे को इधऱ-उधर घुमाया जा रहा है। हालत यह है कि इन गोदामों के सिविल स्ट्रक्चर की जांच पहले हैफेड के ही दो इंजीनियरों ने की। फिर थर्ड पार्टी इंस्पेक्सन के नाम पर टेंडर करके इसका काम डॉ. आईसी स्याल को दिया गया। लेकिन, उनके साथ भी हैफेड के दो इंजीनियर अटैच कर दिए गए। लेकिन, गोदामों पर छत डालने को लेकर दोनों इंजीनियर एकमत नहीं हुए। इसके बाद डॉ. स्याल की रिपोर्ट को क्रॉस चैक करवाने के लिए पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) को भेजा गया। पीडब्ल्यूडी ने इस मामले में अपनी कोई भी राय देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वे भी इस तरह के मामलों में प्राइवेट सलाहकार डॉ. स्याल से ही सलाह लेते हैं। उन्हें बिल्डिंग बनाने का खासा अनुभव है। हैफेड उनकी राय पहले ही ले चुका है। इसलिए इन गोदामों के बारे में भी हैफेड अपने स्तर पर ही फैसला ले। इसके बावजूद हैफेड अब फिर सिविल स्ट्रक्चर की क्वालिटी को लेकर कोई फैसला नहीं कर पा रहा है।