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बैचेनी हुई तो उठी मां, बच्चों को देख गिरते -पड़ते पड़ोसियों को बुलाया पर तीनों की मौत हो चुकी थी

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:00 AM IST

भोर में मां की नींद खुली तो तीनाें बच्चे मिले बेसुध, हो चुकी थी मौत, ग्रामीणों ने मां को अस्पताल में कराया भर्ती ...
भोर में मां की नींद खुली तो तीनाें बच्चे मिले बेसुध, हो चुकी थी मौत, ग्रामीणों ने मां को अस्पताल में कराया भर्ती

हादसे में हीरा बाई का उजड़ गया परिवार, गांव में पसरा मातम

हादसे में हीरा बाई का परिवार उजड़ गया है। अब हीरा बाई के अलावा उसके परिवार में उसका पति मोहर साय रह गया हैं। मोहर साय आदिवासी सम्मेलन में डोंगरगढ़ गया हुआ है। उसे बच्चों की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। उसे बच्चे के बीमार होने की बात कहकर रिश्तेदारों ने बुलाया है। वह घर आने के लिए वहां से लौट गया है। उसके आने के बाद ही उसके बच्चों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। घटना से गांव में मातम पसर गया है।

छोटे कमरे में पटाव की है छत, खिड़की भी थी बंद

हीरा बाई जिस कमरे में बच्चों के साथ सोयी थी वह काफी छोटा है। कमरे की छत पटाव वाली है। उसमें एक खिड़की है जो रात में ठंड के कारण उन्होंने बंद कर दी थी। इससे कोयले के जलने से कमरे में भरे कार्बन मोनो आक्साइड गैस को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। कम उम्र होने के कारण कमरे में सो रहे तीनों बच्चों पर इसका असर ज्यादा हुआ जिससे उनकी मौत हो गई।

मामले का निरीक्षण करते पुलिस अधिकारी।

परिवार को तात्कालिक सहायता राशि दी गई

घटना की सूचना पर एसडीएम डा. नितिन गौड़, तहसीलदार मो. इरशाद अहमद, टीआई एसके केरकेट्‌टा सहित अन्य अधिकारी पहुंचे थे। अधिकारियों के सामने ही पुलिस ने तीनों बच्चों का पंचनामा कर पीएम उपरांत शव उनके नाना छतरू राम को सौंप दिया। इसके साथ छह हजार रुपए की तात्कालीन सहायता भी छतरू को प्रदान की गई है।

खाना बनाकर रोज कमरे से निकाल देती थी सिगड़ी

हीराw बाई के यहां कोयले की सिगड़ी पर भी खाना बनता है। आस-पास के ग्रामीणों के अनुसार खाना बनाने के बाद हीरा बाई कमरे से सिगड़ी बाहर निकाल दिया करती थी। बुधवार की रात उसने बच्चों के साथ ही कमरे के अंदर ही कोयले की सिगड़ी पर खाना बनाया था। इसके बाद खाना खाकर आठ बजे के आस-पास सभी सो गए थे लेकिन बुधवार को वह सिगड़ी नहीं निकाल पाई थी। इससे इतना बड़ा हादसा हो गया।

ग्रामीणों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया तो बच गई जान

ग्रामीणों ने हीरा बाई को एंबुलेंस से तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लखनपुर में ले जाकर भर्ती कराया। वहां डाक्टरों ने भी तत्परता दिखाई। उसका इलाज शुरू हुआ जिससे उसकी जान बच गई। उसका लखनपुर अस्पताल में ही इलाज चल रहा है। अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। डाक्टरों के अनुसार कोयले के जहरीली गैस के असर से महिला को सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। यदि अस्पताल लाने में देर होती तो उसकी भी जान जा सकती थी।

कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा बढ़ने से मौत

बंद कमरे में कोयला जलने से उससे निकले कार्बन मोनोआक्साड की मात्रा बढ़ गई। कमरे में आक्सीजन के आने की जगह नहीं होने से उसमें सो रहे लोग कार्बन मोनाआक्साडड ही सांस से लेते रहे। यह जहरीली गैस है। शरीर में आक्सीजन खत्म हो गया और धीमे श्वसन से बच्चों की मौत हो गई। महिला पर भी इसका असर हुआ लेकिन बड़ी होने के कारण उसकी जान बच गई। -एसके सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, एफएसएल, अंबिकापुर

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Web Title: बैचेनी हुई तो उठी मां, बच्चों को देख गिरते -पड़ते पड़ोसियों को बुलाया पर तीनों की मौत हो चुकी थी
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