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अावारा कुत्तों की नसबंदी कराने के लिए निगम ने तीसरी बार निकाला टेंडर, दो बार नहीं मिले ठेकेदार

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:00 AM IST

Ambikapur News - शहर में अावार कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर निगम ने फिर टेंडर कॉल किया है। एक साल के भीतर तीसरी बार इस तरह का टेंडर...

अावारा कुत्तों की नसबंदी कराने के लिए निगम ने तीसरी बार निकाला टेंडर, दो बार नहीं मिले ठेकेदार
शहर में अावार कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर निगम ने फिर टेंडर कॉल किया है। एक साल के भीतर तीसरी बार इस तरह का टेंडर निकाला गया है। पिछले दो बार टेंडर में ठेकेदार नहीं मिले।

पहली बार पुणे की एक कंपनी को ठेका मिला था लेकिन अनुबंध कराने के बाद ठेकेदार ने नसबंदी करने से हाथ खड़े कर लिए। दूसरी बार टेंडर निकाला गया तो एक भी आवेदन नहीं आया। तीसरी बार पांच लाख रूपए का टेंडर निकाला गया है। निगम के अनुसार शहर में एक हजार से अधिक अावारा कुत्ते हैं। सफाई विभाग के माध्मम से अावारा कुत्तों का सर्वे कराया गया है। 22 फरवरी तक टंेडर डालने का समय है। शहर में अावारा कुत्तों के लगातार बढ़ रहे आतंक को देखते हुए निगम को फिर टेंडर काॅल करना पड़ा है।

एक कुत्ते की नसबंदी के लिए आठ सौ आया था रेट

पहली बार कुत्तों की नसबंदी के लिए पुणे की एक कंपनी ने टेंडर डाला था। साढ़े आठ सौ रूपए एक कुत्ते की नसंबदी के लिए रेट डाला गया था लेकिन बाद में कंपनी नसबंदी के लिए तैयार नहीं हुई। राजनांदगांव में भी इसी कंपनी ने कुत्तों का बधियाकरण किया था और भुगतान का विवाद हो गया था। इसके बाद कंपनी यहां नसबंदी के लिए तैयार नहीं हुई। इस बार लागत अधिक आने का अनुमान है। रेट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

हर महीने 70 से 80 लोग पहंुच रहे इलाज के लिए

कुत्तों का आंतक किस तरह से बढ़ गया है इसका इसी से पता चलता है कि हर महीने 70 से 80 लोग मेडिकल कालेज अस्पताल में कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए पहंुचते हैं। पिछले साल करीब एक हजार लोगों को कुत्तों ने काट दिया था। इनमें ज्यादातर संख्या शहर की थी। भीड़ भाड़ और बाजारों में कुत्तों का आतंक ज्यादा है। झुंड में कुत्ते सड़कों पर जब चलते हैं तो वहां से आना-जाना मुश्किल हो जाता है।

कुत्तों का आतंक रोकने के लिए बधियाकरण जरूरी

ननि के मुख्य स्वच्छता निरीक्षक अवधेश पांडेय ने बताया कि अावारा कुत्तों के आंतक पर रोक लगाने के लिए नसबंदी जरूरी है। तीसरी बार टेंडर निकाला गया है और कोशिश है कि इस बार कोई न कोई ठेकेदार मिल जाए। ठेकेदार को कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण करना है। नसंबदी के लिए सुरक्षित जगह चाहिए क्योंकि नसबंदी के बाद कुत्तों को नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा रहता है।

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