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एग्रीकल्चर छात्र गांव में प्रशिक्षण लेकर करेंगे खेती

सरगुजा सहित आसपास के जिलों में खेती पर आधारित रोजगार तैयार किए जाएंगे। इसी साल जून-जुलाई से मिशन पर काम शुरू हो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:00 AM IST

सरगुजा सहित आसपास के जिलों में खेती पर आधारित रोजगार तैयार किए जाएंगे। इसी साल जून-जुलाई से मिशन पर काम शुरू हो जाएगा। एग्रीकल्चर कॉलेज के छात्रों को इस मिशन से जोड़ा जा रहा है, जो अपने -अपने गांव में जाकर संभावना तलाश करेंगे और उसी आधार पर रोजगार खड़े किए जाएंगे।

पूरा मिशन विज्ञानिकों के दिशा-निर्देशन में चलेगा। सरगुजा में जीराफूल धान, मैनपाट में टाउ और खरीफ के आलू के अलावा आॅफ सीजन खेती के लिए क्लाइमेंट अच्छी है। इसलिए इन पर विशेष जोर दिया जाएगा। कुछ क्षेत्रों में फलों की खेती और डेयरी के संभावना अच्छी है और यहां इसमें से आधारित रोजगार तैयार किए जाएंगे। राजमोहनी देवी कृषि महाविद्यालय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। अिभयान को चलो गांव की ओर नाम दिया गया है। अधियान के तहत विद्यार्थियों को आने-जाने के लिए सरकार खर्च देगी। हर हफ्ते शनिवार व रविवार को कॉलेज के छात्र गांवों में मॉडल मिशन पर काम करेंगे। पढ़ाई के आखिरी चौथे साल में ये 6 माह गांव में पूरा समय दंेगे। अफसरों के अनुसार पढ़ाई के दौरान छात्र जो सीखेंगे उसी पर गांवों में काम करेंगे। बाकी छात्र जो प्रदेश के अलग-अलग जिलों के हैं, उन्हें पास के कॉलेजों में शिफ्ट किया जाएगा।

वैज्ञानिकों के दिशा-निर्देशन में स्टूडेंट तलासेंगे संभावना, फिर विभागों के माध्यम से तैयार करेंगे रोजगार के संसाधन

ऑफ सीजन फल व सब्जी खेती के साथ डेयरी पर जोर

इस मिशन में लोगों को अधिक लाभ मिल सके इसके लिए ऑफ सीजन फल और सब्जी की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। बरसात में टमाटर व ऐसे फल जो यहां देर से पहुंचते हैं, इस तरह का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। क्लोमेट और सिंचाई के साधन और बाकी जरूरी सुविधाओं को देखते हुए इसका निर्धारण किया जाएगा। सरगुजा जिले में फूलों की खेती के हिसाब से सभी क्लाइमेंट अच्छा है और इस पर भी जोर दिया जाएगा। यहां डेयरी की संभावना है। इससे आधारित रोजगार तैयार किए जाएंगे।

विद्यार्थियों के साथ पालकों को भी करेंगे मोटिवेट

अजिरमा स्थिति राजमोहनी देवी कृषि महाविद्यालय के डीन डाॅ. आरके मिश्रा ने बताया इस अिभयान के लिए एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों के साथ उनके अिभवावकों को भी मोटिवेट करेंगे, जिससे रोजगार खड़ा करने में सुविधा हो। माता-पिता बच्चों को पढ़ाने के बाद नहीं चाहते कि वे खती करें। लोगों में यह ऐसी धारणा बनती जा रहीं है कि नई पीढ़ी खेती से दूर हो रही है। सरकार एग्रीकल्चर के एक छात्र पर दस से बारह लाख खर्च करती है और बाद में नौकरी की तलाश में वे बाहर चले जाते है। गांव में ही जब रोजगार मिलेगा तो लोग बाहर नहीं जाएंगे।

मॉडल बनने वाले गांव के लोगों को मिलेगा रोजगार

अधिकारियाें ने बताया जिस गांव में कृषि आधारित रोजगार खड़े किए जाएंगे वहां पूरे गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा। किसी के पास 5 एकड़ खेती है तो उसमें सौ लोगों को राेजगार मिलने लगेगा। किसी क्षेत्र में सुगंधित जीरा, फूल, धान की संभावना पर्याप्त है पर इसे रोजगार के रूप में तैयार नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए न तो सुविधाएं है और न ही लोग इस स्तर पर खेती कर रहे हैं। उद्योग के रूप में इसके लिए अवसर तैयार कर लिए गए तो लोग खुद इंड्रस्ट्रीज लगाने आगे आएंगे। दिल्ली जैसी बड़े शहरों में सुगंधित जीरा फूल चावल की डिमांड काफी है।

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