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अफसरों का दावा: िसंचाई के लिए मिल रहा पानी जांच में सच: टीम को कई गांवों में नहर टूटी मिली

दरिमा क्षेत्र के घाघी जलाश्य से सिंचाई के लिए पानी देने के विभाग के दावे की जांच में ऐसी पोल खुली कि अधिकारियों के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:00 AM IST

अफसरों का दावा: िसंचाई के लिए मिल रहा पानी 
जांच में सच: टीम को कई गांवों में नहर टूटी मिली
दरिमा क्षेत्र के घाघी जलाश्य से सिंचाई के लिए पानी देने के विभाग के दावे की जांच में ऐसी पोल खुली कि अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं था। कुनियाकला, रकेली व नवानगर जैसे गांवों में नहरों की खस्ताहालत के कारण गांवों में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। ताज्जुब की बात तो यह है कि जिला पंचायत की सामान्य सभा में इसकी शिकायत पर अधिकारी जानकारी दे रहे थे कि पानी मिल रहा है। जांच हुई तो कहीं नहर टूटी हुई तो कहीं झाड़ियों में गुम मिली। रकेली में नहर बनने के बाद पहली ही बारिश में बह गई थी लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। जिला पंचायत अध्यक्ष के अनुसार विभागीय योजनाओं के अलावा मनरेगा से यहां पिछले सालों में पचास लाख खर्च हुए हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष फुलेश्वरी सिंह मामले में शिकायत पर नहरों की मरम्मत नहीं कराए जाने पर अधिकारियों को लेकर कुछ गांवों में पिछले दिनों जांच के लिए खुद पहंुची थीं। उन्होनंे बताया कि जांच में सच्चाई सामने आई तो अधिकारी गोल मोल जवाब देने लगे और कहा कि काम चल रहा है। क्षेत्र से लौटने के बाद उन्होंने बताया कि क्षेत्र में ज्यादातर नहरों का यही हाल है। रकेली, कुनियाकला और नवानगर में आधा दर्जन नहरें हैं लेकिन फिर भी पानी नहीं मिल रहा है। कई नहरें टूटी हुई हैं। कुछ नहरों की मरम्मत कराई गई थी लेकिन उसके बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। एक नहर की खेतों से ऊंचाई कम है और पानी चढ़ नहीं पाता। रकेली में एक नहर की मरम्मत के लिए पिछले साल मनरेगा से 18 लाख रूपए स्वीकृत हुए थे। इसमें 80 हजार रूपए से अधिक मरम्मत के नाम पर मजदूरी भुगतान पर खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है लेकिन कहीं मरम्मत नहीं कराई गई। लोगों का कहना है कि कभी काम हुआ ही नहीं है।

कुछ ग्रामीण खुद से कच्ची नाली तैयार किए हैं जिससे पानी आ रहा है। नहरें ठीक रहती तो खेती के लिए पानी मिलता लेकिन ज्यादातर लोगों के खेत सूखे हुए हैं। िसंचाई विभाग के ईई को इस संबंध में जानकारी के लिए संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।

अधिकारियों को लेकर जांच के लिए पहंुचीं अध्यक्ष तो कई गांवों में नहरों की हालत बदहाल मिली

इस तरह से खराब है नहरों की हालत अब तो झाड़ियां भी उग आई हैं।

लोकपाल के फैसले के बाद भी ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं

पिछले सालों में मनरेगा के तहत जिन कामों में गड़बड़ी को लेकर योजना की निगरानी के लिए नियुक्त लोकपाल ने फैसले दिए हैं उनमें अधिककतर काम सिंचाई के कामों के हैं। कहीं स्टाप डेम तो कहीं नहर और तालाब गहरीकरण के काम में गड़बड़ी हुई है। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर और वसूली के आदेश हुए हैं लेकिन ज्यादातर बड़े मामलों में कार्रवाई नहीं हुई।

भास्कर संवाददाता|अंबिकापुर

दरिमा क्षेत्र के घाघी जलाश्य से सिंचाई के लिए पानी देने के विभाग के दावे की जांच में ऐसी पोल खुली कि अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं था। कुनियाकला, रकेली व नवानगर जैसे गांवों में नहरों की खस्ताहालत के कारण गांवों में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। ताज्जुब की बात तो यह है कि जिला पंचायत की सामान्य सभा में इसकी शिकायत पर अधिकारी जानकारी दे रहे थे कि पानी मिल रहा है। जांच हुई तो कहीं नहर टूटी हुई तो कहीं झाड़ियों में गुम मिली। रकेली में नहर बनने के बाद पहली ही बारिश में बह गई थी लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। जिला पंचायत अध्यक्ष के अनुसार विभागीय योजनाओं के अलावा मनरेगा से यहां पिछले सालों में पचास लाख खर्च हुए हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष फुलेश्वरी सिंह मामले में शिकायत पर नहरों की मरम्मत नहीं कराए जाने पर अधिकारियों को लेकर कुछ गांवों में पिछले दिनों जांच के लिए खुद पहंुची थीं। उन्होनंे बताया कि जांच में सच्चाई सामने आई तो अधिकारी गोल मोल जवाब देने लगे और कहा कि काम चल रहा है। क्षेत्र से लौटने के बाद उन्होंने बताया कि क्षेत्र में ज्यादातर नहरों का यही हाल है। रकेली, कुनियाकला और नवानगर में आधा दर्जन नहरें हैं लेकिन फिर भी पानी नहीं मिल रहा है। कई नहरें टूटी हुई हैं। कुछ नहरों की मरम्मत कराई गई थी लेकिन उसके बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। एक नहर की खेतों से ऊंचाई कम है और पानी चढ़ नहीं पाता। रकेली में एक नहर की मरम्मत के लिए पिछले साल मनरेगा से 18 लाख रूपए स्वीकृत हुए थे। इसमें 80 हजार रूपए से अधिक मरम्मत के नाम पर मजदूरी भुगतान पर खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है लेकिन कहीं मरम्मत नहीं कराई गई। लोगों का कहना है कि कभी काम हुआ ही नहीं है।

कुछ ग्रामीण खुद से कच्ची नाली तैयार किए हैं जिससे पानी आ रहा है। नहरें ठीक रहती तो खेती के लिए पानी मिलता लेकिन ज्यादातर लोगों के खेत सूखे हुए हैं। िसंचाई विभाग के ईई को इस संबंध में जानकारी के लिए संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।

सुराज अभियान में शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई- अध्यक्ष

जिला पंचायत अध्यक्ष फुलेश्वरी सिंह ने बताया कि सिंचाई योजनाओं की बदहाली और अधूरे कामों को लेकर विभाग के अधिकारी गोल मोल जबाब देते आ रहे थे। जांच के लिए पहंुची तो अधिकारियों के सुर बदल गए हैं और जो अधिकारी पानी मिलने की बात कह रहे थे वे ही कहने लगे कि काम चल रहा है। मामले की शिकायत शासन-प्रशासन को की गई है।

कई काम अधूरे तो कई शुरू नहीं हुए, सिंचाई विभागों के अफसरों को नोटिस

सिंचाई योजनाओं की बदहाली यहीं तक सीमित नहीं है। जिले में इस तरह के 181 काम ऐसे हैं जो कहीं शुरू ही नहीं हुए तो कहीं अधूरे पड़े हैं। 30 करोड़ के अधिक के ये काम मनरेगा के तहत स्वीकृत हुए थे। लोगों को रोजगार देने के साथ सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होना था। जिला पंचायत की सामान्य सभा में कई बार इस मुद्दे पर हंगामा हुआ लेकिन नहरें ठीक नहीं हुई। जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई विभाग के ईएनसी और ईई को पत्र जारी किया गया है। काम नहीं कराए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

मनरेगा के करोड़ों के काम स्थल पर कहीं भी बोर्ड नहीं

मनरेगा के तहत जो काम स्वीकृत हुए हैं निर्माण स्थल पर सूचना बाेर्ड लगाना अनिवार्य है। निर्माण एजेंसी को एक बोर्ड के लिए पांच हजार रूपए अलग से दिए गए हैं लेकिन ज्यादातर जगहों पर बोर्ड नहीं लगे हैं। बोर्ड नहीं लगने से जिस क्षेत्र में काम स्वीकृत हुए हैं वहां के लोगों को ही पता नहीं है। बोर्ड में काम के नाम, लागत की राशि और कितने दिन में काम पूरे करने हैं इसका उल्लेख करना अनिवार्य है।

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