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मल्टीपरपज स्कूल में हर कक्षा में दोगुने स्टूडेंट, सुविधा की कमी से सैकड़ों विद्यार्थियों को नहीं मिलता प्रवेश

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 06:25 AM IST

Ambikapur News - शहर के मल्टी परपज स्कूल में भवन और शिक्षकों की कमी से सीबीएसई में हर साल चार से पांच सौ बच्चों का एडमिशन नहीं हो पा...

Ambikapur News - chhattisgarh news multipurpose school doubling students in every class lack of convenience hundreds of students do not get admission
शहर के मल्टी परपज स्कूल में भवन और शिक्षकों की कमी से सीबीएसई में हर साल चार से पांच सौ बच्चों का एडमिशन नहीं हो पा रहा है। ऐसे स्टूडेंट पब्लिक स्कूल या फिर हिन्दी माध्यम से पढ़ने के लिए मजबूर हैं।

पब्लिक स्कूलों में भारी भरकम फीस नहीं पटा पाने वाले अभिभावक यहां बच्चों के एडमिशन के लिए आस लगाकर आते हैं और उन्हें मायूस लौटना पड़ता है, क्योंकि यहां जगह ही नहीं है। शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले यहां सेटअप से दोगुने बच्चों का एडमिशन हो चुका है, जबकि कई लोग एडमिशन के लिए मंत्री, नेताओं के पास सिफारिश के लिए चक्कर लगा रहे हैं। स्कूल भवन बन जाए तो सेक्शन बढ़ाए जा सकते हैं, जिससे यह समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह स्कूल सौ साल से ऊपर का हो गया है फिर भी बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहा है। चार साल पहले स्कूल के शताब्दी समारोह पर यहां कोयला खदानों से सीएसआर मद से मिलने वाली राशि से दो करोड़ से 24 कमरों के लिए सीएम से भूमि पूजन कराया था, पर एक भवन बनाकर छोड़ दिया और बाकी बचे कमरों के लिए जिम्मेदार पहल नहीं कर रहे हैं। सरगुजा जिला ही नहीं पूरे संभाग का यह एक मात्र यही सरकारी स्कूल है, जहां सीजी के साथ सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई होती है। कक्षा छठवीं से कक्षा बारहवीं तक दोनों पैटर्न में करीब चार हजार बच्चे यहां पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल में भीड़ इतनी है कि सीबीएसई के बायलॉज से दोगुने बच्चे एक-एक कक्षा में हैं। कई कक्षाओं में 70 से 80 बच्चे हैं।

सीबीएसई के साथ सीजी पैटर्न का संभाग में एक मात्र सरकारी स्कूल

सीबीएसई का बॉयलॉज को फाॅलो करने का दबाव

मंत्री-नेताओं का यहां एडमिशन के लिए दबाव है, दूसरी ओर सीबीएसई बायलॉज को फाॅलो करने पर जोर है। शिक्षकों का कहना है कि स्थिति ऐसी है कि मान्यता पर संकट खड़ा होता दिख रहा है। सीबीएसई के बायलॉज के अनुसार एक कक्षा में 40 बच्चे होने चाहिए, जबकि सभी विषयों के शिक्षक अनिवार्य हैं, लेकिन यहां दोनों समस्याएं हैं। सबसे बड़ी समस्या यहां भवन की है, जिससे सेक्शन नहीं बढ़ पा रहे हैं। स्टेट जमाने का भवन अब कम पड़ने लगा है।

शिक्षकों के संघर्ष से बची है सीबीएसई की मान्यता

मल्टी परपज स्कूल में सीबीएसई पैटर्न को बचाए रखने में यहां के शिक्षकों का अहम रोल है, जो कड़ी मेहनत कर मान्यता को बचाकर रखे हैं। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद 2002 में सभी जिला मुख्यालयों के अलावा सभी ब्लाॅकों में गर्ल्स और ब्वॉयज के दो-दो स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न से भी पढ़ाई शुरू कराई गई, लेकिन एक-दो साल में ही सभी स्कूल इस चला नहीं पाए और सीजी में मर्ज कर दिया गया।

मल्टी परपज स्कूल सुविधाओं के लिए तरस रहा

कुछ साल पहले बने अतिरिक्त कमरे भी हो गए बेकार।

दस पद खाली, दूसरे विषयों के शिक्षक यहां पढ़ा रहे

इस स्कूल में सेटअप के हिसाब से शिक्षक नहीं हैं। व्याख्याता के 44 में से दस पद खाली हैं। मैथ्स के चार में से दो शिक्षक हैं। से फिजिक्स के भी चार में से दो ही शिक्षक हैं, केमेस्ट्री के चार में एक पद खाली हैं। एग्रीकल्चर के एक भी व्याख्याता नहीं है। दूसरे विषयों के शिक्षक इन विषयांे की पढ़ाते हैं। सत्र शुरू होने पर हर साल मामला उठता है और दूसरे कुछ शिक्षकों को अटैच कर देते हैं और फिर वही स्थिति बन जाती है।

स्टेट जमाने के मल्टी परपज स्कूल का इतिहास गौरवशाली रहा है। शिक्षा के साथ कई क्षेत्रों में यहां निकले स्टूडेंट ने मुकाम हासिल किया। अविभाजित मध्यप्रदेश में इस स्कूल ने टॉपर दिए हैं। यहां से निकले स्टूडेंट देश के साथ विदेशों में अलग-अलग क्षेत्रों में बड़े पदों पर पहुंचे हैं।

गरीब परिवारों के लिए है सहारा फिर भी ध्यान नहीं

गरीब परिवारों के लिए मल्टी परपज स्कूल सहारा है, क्योंकि यहां सीबीएसई में कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा आठवीं तक फीस नहीं लगती है। इसी प्रकार कक्षा नवमीं से लेकर कक्षा बारहवीं तक साल में सिर्फ तीन हजार रुपए ही फीस है। इस बार बारहवीं में 87 प्रतिशत से अधिक स्टूडेंट पास हुए हैं और इनमें एक स्टूडेंट 92 प्रतिशत से अधिक अंक से उर्त्तीण हुआ था, जबकि दसवीं का रिजल्ट 94 प्रतिशत था।

  टीएस सिंहदेव, प्रभारी मंत्री

कमियां जल्द दूर कराएंगे


-पिछली सरकार में इस पर ध्यान नहीं दिया, इससे समस्या बनी है।


-सीएसआर मद से स्कूल भवन के लिए मंजूरी मिली थी और इस पर काम करना चाहिए था। काम क्यों नहीं हुआ इस बारे में पता कराते हैं


-विधायक के रूप में भवन के लिए लगातार ध्यान दिलाता रहा। विपक्ष का विधायक यही तो कर सकता है।


-शहर का यह सबसे बड़ा स्कूल है और यहां जो भी यहां कमियां हैं उसे दूर कराएंगे। जुगाड़ के बजट से व्यवस्था ठीक नहीं की जा सकती। सरकारी बजट से स्कूल भवन के लिए फंड का प्रावधान कराया जाएगा। खाली पदों पर होने वाली भर्ती से शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी। इसी तर्ज पर और भी स्कूलों को बेहतर करने की जरूरत है, क्योंकि यहां भीड़ अधिक है।

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