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12 सौ से अधिक बूथों पर जीत-हार का अब तक बड़ा अंतर रहा इसलिए अंतिम चरण में दोनों दलों का इन इलाकों पर फोकस

Ambikapur News - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बुधवार को सरगुजा संसदीय सीट पर अलग-अलग जगह चार सभाएं करेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद बघेल...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 06:25 AM IST
Ambikapur News - chhattisgarh news there is a huge difference of victory over the more than 12 hundred booths so the two teams will focus on these areas in the final phase
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बुधवार को सरगुजा संसदीय सीट पर अलग-अलग जगह चार सभाएं करेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद बघेल की सरगुजा में पहली बार एक ही दिन में बतौली, रामानुजगंज, बतरा और देवनगर में चार सभाएं हो रही हैं।

मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव हर सभा में शामिल होंगे। साढ़े पांच महीने पहले ही हुए विधानसभा के चुनाव में लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभा की सभी 8 सीटों पर क्लीन स्वीप के बाद भी कांग्रेस को जीत के लिए जोर लगाना पड़ रहा है क्योंकि पिछले चुनाव में विधानसभा की सात सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस लोकसभा में करीब डेढ़ लाख वोटों से हार गई थी। पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस को इसी तरह से हार का सामना करना पड़ा है जबकि भाजपा अपराजेय है। इस बार भाजपा की जीत को रोकने के लिए सीएम बघेल और सिंहदेव तीनों जिलों में सभाएं करने जा रहे हैं। बुधवार को सीएम की सभाओं के बाद सिंहदेव की बचे हुए दिनों में बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर, सामरी क्षेत्र के डिपाडीह तथा प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र के चंदननगर जैसे इलाकों में सभाएं हैं। कांग्रेस के अन्य स्टार प्रचारकों की सभाओं की अब उम्मीद नहीं है। इधर भाजपा आखिरी चरण में तीन बड़ी सभाओं की तैयारी में जिसमें स्टार प्रचारकों के साथ पूर्व सीएम डाॅ. रमन सिंह की सभाएं भी हैं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उमा भारती और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सभाओं की तैयारी है। तीन जिलों में बंटे इस लोकसभा सीट पर पिछले लोकसभा चुनावों के हिसाब से देखा जाए तो सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर जिले की 2148 बूथों में से 12 सौ से अधिक बूथों पर कांग्रेस को बढ़त बनाने की तो भाजपा के सामने लीड बरकरार रखने की चुनौती है। ये ऐसे बूथ है जो भाजपा को बड़े अंतर से जीत दिलाते आए हैं जबकि कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। पिछले लोकसभा चुनाव में अंबिकापुर ग्रामीण ब्लाक को छोड़कर कांग्रेस को तीनों जिलों के लगभग सभी ब्लाकों में हार का सामना करना पड़ा था। 4 सौ बूथ पर ही कांग्रेस आगे थी जबकि इतने ही बूथ पर दोनों के बीच अंतर काफी कम था। कांग्रेस को सूरजपुर जिले में सात सौ से अधिक बूथों में से 4 सौ से अधिक बूथों पर बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इधर अंबिकापुर शहर कांग्रेस भाजपा से पीछे थी।

अव्यवस्था
डॉक्टरों के रूम एसी से कूल, मरीजों के वार्डों में लगे ज्यादातर कूलर खराब, सुधरवाने बजट नहीं

भास्कर संवाददाता|अंबिकापुर

तीखी धूप से अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही गर्मी के तेवर तीखे होने से शहर का पारा 39 डिग्री के ऊपर पहुंचने लगा है लेकिन संभाग के सबसे बड़े मेडिकल काॅलेज अस्पताल में मरीजों को इससे राहत के लिए प्रबंधन ने कोई तैयारी ही नहीं की है। वार्डों में लगे 60 फीसदी से ज्यादा कूलर किसी काम के नहीं हैं तो गाइनिक व शिशु विभाग वाले एमसीएच भवन में पानी की किल्लत है। बदइंतजामी का आलम यह है कि वार्डों में लगे किसी कूलर में खस सड़ गया है तो किसी का पंप खराब हो गया है।

मरीज सीलिंग फैन के गर्म हवा भरोसे हैं। एमसीएच भवन के वार्डों में पानी नहीं आ रहा है। पानी के लिए चौथी मंजिल से मरीज के परिजनों को कैंपस में लगे हैंडपंप से पानी ढोना पड़ रहा है। टाॅयलेट गंदे हो जा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब एमएस (मेडिकल सुपरिटेंडेंट) रोज वार्डों का राउंड लेते हैं। इस स्थिति से जाहिर है मरम्मत कराने के लिए गर्मी से पहले प्रबंधन ने कोई तैयारी नहीं की। अब मार्च में बिल पास नहीं होने से बजट का रोना रोया जा रहा है। भास्कर ने मंगलवार को अस्पताल का जायजा लिया तो अधिकारियों के कमरे को छोड़कर कहीं भी व्यवस्था संतोषजनक नजर नहीं आई। इस संबंध में पहले एमएस से मोबाइल पर कई बार बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। फिर डीन से बात की गई।

किसी कूलर का खत तो किसी का पंप खराब, 39 डिग्री तापमान में मरीज बेहाल

एमसीएच में एक सप्ताह से वार्ड के नल में नहीं आ रहा पानी

अस्पताल के एमसीएच यूनिट में सप्ताहभर से पानी नहीं आ रहा है। भवन के सबसे आखिरी चौथी मंजिल पर शिशु वार्ड हैं। यहां वाड्रफनगर के विरेंद्रनगर निवासी देवचरण पंडो की 11 वर्षीय पुत्री देवंती भर्ती है। देवचरण दोपहर में ओपीडी वाले परिसर के हैंडपंप से बाल्टी व बोतल में पानी लेकर वार्ड में जाते मिला। पूछने पर उसने बताया कि वह एक सप्ताह से यहां बेटी को लेकर है। रोज पानी के लिए ऐसी ही मशक्कत करनी पड़ती है। ग्राम भिट्‌ठीकला निवासी अमित सिंह ने भी यही समस्या बताई। उनका भी पुत्र दस्त से पीड़ित होने के कारण शिशु वार्ड में भर्ती है।

सर्जिकल वार्ड में स्थिति ज्यादा खराब

सर्जिकल, आर्थो, आइसोलेशन वार्ड में लगभग 20 कूलर लगाए गए हैं लेकिन इनमें कोई पूरी तरह ठीक नहीं है। सभी के खस पूरी तरह सड़ गए हैं। इसके अलावा आधे से ज्यादा के पंप खराब हैं। महिला सर्जिकल में तो चार में तीन कूलर पूरी तरह बंद हैं। दोपहर में तो गर्मी से स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है।

मेडिकल वार्ड में नर्सिंग स्टाफ का ही कूलर बंद

मेडिकल वार्ड में 9 कूलर लगाए गए हैं। नर्सिंग स्टाफ के कमरे का ही कूलर खराब है। यह चलता नहीं है। बाकी के कूलर चलते हैं लेकिन इनमें पानी नहीं भरा जाता है। यह वार्ड पश्चिम तरफ है। दोपहर बाद धूप सीधे वार्ड में आती है। नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि दोपहर बाद गर्मी से यहां परेशानी बढ़ जाती है।

सर्जिकल वार्ड में लगे कूलर का खस है खराब।

1-1 हजार लीटर की 12 टंकियां फिर भी दिक्कत

सौ बिस्तर वाले एमसीएच भवन का दिसंबर महीने में ही उद्घाटन हुआ है। पानी के लिए टाप लेवल पर एक-एक हजार की 12 टंकियां लगाई गई है लेकिन इन टंकियों में पानी है कि नहीं, यह देखने वाला कोई नहीं है। इसके बाद भी यहां पानी की समस्या बनी रहती है।

सीएम की आज 4 सभाएं, भाजपा की 5 दिन में हाेंगी 3 सभाएं

जीत उसी की जिसने जातीय समीकरण को साध लिया

सरगुजा लोकसभा सीट पर जीत हार में जातीय समीकरण बड़ा फैक्टर रहा है। गोंड़, कंवर और उरांव वोटर यहां लीडिंग पोजिशन में है और इस वर्ग के वोटों को जिस दल ने साध लिया जीत उसी की होगी। भाजपा और कांग्रेस ने जातीय समीकरण के हिसाब से ही गोंड़ समाज से प्रत्याशी उतारा है। कांग्रेस प्रत्याशी विधायक खेलसाय सिंह तीन बार सांसद रह चुके हैं जबकि रेणुका सिंह विधायक रह चुकी हैं। दोनों इस वर्ग के रुख का पता लगाने में लगे हैं।

अधिकारियों और डाॅक्टर के डयूटी रूम में सबकुछ ठीक

अधिकारियों व डाॅक्टर्स के कमरे का जायजा लिया गया। यहां अभी पिछले कुछ महीनों में गर्मी से राहत के लिए कोई नया सामान तो नहीं लगाया गया लेकिन यहां सबकुछ ठीक मिला। एमएस, डिप्टी एमएस, शिशु विभाग ओपीडी, कैजुअल्टी वार्ड डाॅक्टर ड्यूटी रूम में एसी लगा है। ये सभी एसी ठीक हैं। यानी जहां अधिकारी व डाॅक्टर हैं वहां सबकुछ ठीक है लेकिन वार्डों पर ध्यान नहीं है।

मुझे जानकारी नहीं, पता कर ठीक कराया जाएगा


विधानसभा चुनाव की लीड और खाई दोनों पार्टियों के लिए चुनौती

पिछले तीन लोस की अपेक्षा इस बार के चुनाव में परिस्थितियां बदली हुई है। पिछले तीनों चुनाव में भाजपा के लिए प्लस प्वाइंट यह था कि प्रदेश में भी उसकी सरकार थी जबकि इस बार कांग्रेस की सरकार है। विस चुनाव के हिसाब से देखा जाए तो साढ़े पांच महीने पहले हुए चुनाव में कांग्रेस लोस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विस की सभी आठों सीटों पर दो लाख वोटों से भाजपा से आगे थी। कांग्रेस के लिए लीड को बरकरार रखने की तो भाजपा के सामने इस अंतर को पाटकर जीत हासिल करने की चुनौती है।

चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में दोनों दल पिछले चुनावों में जीत हार के हिसाब से लगा रहे जोर

सूरजपुर और सामरी इलाके में भाजपा को मिली थी लीड

पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सूरजपुर जिले के अलावा सामरी विधानसभा क्षेत्र से बड़ी लीड मिली थी। करीब डेढ़ लाख वोटों से भाजपा पिछला लोकसभा चुनाव जीती थी ओर सूरजपुर और सामरी इलाके से 60 हजार से अधिक की लीड थी। इसे देखते हुए कांग्रेस इस बार इन क्षेत्रों में अधिक जोर लगा रही है। भाजपा भी पिछले चुनावों को देखते हुए इन क्षेत्रों में बड़ी सभाओं के जरिए जोर लगा रही है।

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