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58 काॅलेजों में 21 हजार सीटें, 55 प्रतिशत खाली यूनिवर्सिटी का जवाब- यह जिम्मेदारी हमारी नहीं

भास्कर संवाददाता| अंबिकापुर संभाग के काॅलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया नियमों के जाल में उलझकर रह गई है। सरगुजा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:00 AM IST

58 काॅलेजों में 21 हजार सीटें, 55 प्रतिशत खाली यूनिवर्सिटी का जवाब- यह जिम्मेदारी हमारी नहीं
भास्कर संवाददाता| अंबिकापुर

संभाग के काॅलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया नियमों के जाल में उलझकर रह गई है। सरगुजा यूनिवर्सिटी ने पहली व दूसरी मेरिट लिस्ट को 3 बार आगे बढ़ाया पर अभी तक काॅलेजों की 45 फीसदी सीटें भी नहीं भर पाई हैं। 58 काॅलेजों में अभी तक सिर्फ साढ़े 8 हजार ही एडमिशन हो पाए हैं जबकि सीटें 21 हजार से ज्यादा हैं।

एडमिशन नहीं होने से काॅलेजों में पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है। तीसरी मेरिट लिस्ट जारी नहीं होने से पंजीयन कराने वाले दूसरे छात्रों को अभी तक एक मौका नहीं मिल पाया है। एडमिशन होगा कि नहीं, इसे लेकर वे परेशान हैं और काॅलेजों के चक्कर काट रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने शुक्रवार को पहली व दूसरी मेरिट लिस्ट को ही 19 जुलाई तक बढ़ा दिया। यानी दूसरे छात्रों को फिर इंतजार करना पड़ेगा। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी प्रबंधन कह रहा कि कम एडमिशन के लिए वह जिम्मेदार नहीं। हमने तो काॅलेजों को मेरिट लिस्ट दे दी। सरगुजा यूनिवर्सिटी ने पहली मेरिट लिस्ट 26 जून को घोषित की थी। इसके बाद से ही एडमिशन चल रहा है। इस बीच पोर्टल पर भी एडमिशन के लिए पंजीयन होता रहा। पहले के शेड्यूल के अनुसार 5 जुलाई को दूसरी लिस्ट निकलनी थी लेकिन एडमिशन इतने कम हुए कि पहली मेरिट लिस्ट ही आगे बढ़ती रही। 9 जुलाई को पहली मेरिट लिस्ट के साथ दूसरी लिस्ट भी कुछ काॅलेजों को निकली, जबकि नियमों के अनुसार पहली मेरिट लिस्ट को इसमें शामिल नहीं करना था। काॅलेज ने तीसरी मेरिट लिस्ट जारी नहीं की।

पहली और चौथी मेरिट लिस्ट का चौथी बार बढ़ाया समय, अब 17 जुलाई को तीसरी लिस्ट

एडमिशन पूरे नहीं होने से अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं

काॅलेजों में नया सत्र 1 जुलाई से ही शुरू हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 14 जुलाई तक ही एडमिशन के लिए अंतिम तिथि निर्धारित की है लेकिन यहां एडमिशन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई है। इससे काॅलेजों में अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है। जबकि पिछले साल आॅनलाइन एडमिशन में पहली मेरिट लिस्ट में 50 फीसदी से ज्यादा सीटें भर गई थीं और कक्षाएं भी 15 जुलाई से शुरू हो गई थीं।

सीधी बात

प्रो. रोहणी प्रसाद, कुलपति, सरगुजा यूनिवर्सिटी, अंबिकापुर

सरगुजा यूनि. के काॅलेजों में कितने छात्रों ने पंजीयन कराया, कितने एडमिशन हुए?

-विभिन्न काॅलेजों के लिए अब तक 21 हजार से ज्यादा छात्रों ने एडमिशन के लिए पंजीयन कराया है। अभी तक साढे आठ हजार छात्रों ने एडमिशन लिया है।

चार बार एडमिशन का समय बढ़ाने पर भी 50 % सीटें नहीं भरी, क्या कारण हैं?

-हमारी प्राथमिकता सभी छात्रों को अच्छा अवसर देना है। हमने कॉलेजों को मेरिट लिस्ट जारी कर दी है। अब एडमिशन दिलवाना यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी नहीं है।

इससे दूसरे छात्रों को मौका नहीं मिलेगा, जो लेट से पंजीयन कराए या नंबर कम हैं?

- हमारा उद्देश्य यह नहीं है। पहली मेरिट लिस्ट के छात्रों के लिए यह अंतिम अवसर है। 17 जुलाई को तीसरी मेरिट लिस्ट जारी होगी। उसमें सभी का नाम शामिल होगा।

आॅनलाइन पंजीयन व एडमिशन की जटिल प्रक्रिया जिम्मेदार नहीं हैं। छात्र नेट पार्लरों में पंजीयन कराने व फीस जमा करने के चक्कर में ठगे जा रहे हैं?

-यह बहुत ही सरल प्रक्रिया है और गड़बड़ी राेकने ऐसा किया गया है। यदि छात्र नेटपार्लर में जाकर पंजीयन कर रहा है तो इसके लिए मैं क्या कर सकता हूं?

जब एडमिशन के लिए 21 हजार से ज्यादा पंजीयन हुआ है तो दूसरी मेरिट लिस्ट जारी कर दूसरे छात्रों को मौका देना चाहिए था। ऐसा तो किसी दूसरी यूनिवर्सिटी में नहीं हो रहा?

- आप की बात सही है लेकिन छात्रहित में ऐसा किया जा रहा है और कोई छात्र एडमिशन से वंचित नहीं रहेगा। पिछली बार 13 हजार छात्रों ने एडमिशन लिया था।

यूनिवर्सिटी ने एक ही मेरिट लिस्ट को लगातार आगे बढ़ाया, जिससे दूसरे छात्रों को मौका नहीं मिल रहा है।

आॅनलाइन प्रक्रिया में यदि किसी छात्र ने गलती से किसी केटगरी में नाम डाल दिया तो काॅलेज में काउंसिलिंग के समय सुधारने का कोई मौका नहीं। उसका नाम सामान्य श्रेणी में भी जोड़ने का प्रावधान नहीं है, जिससे वह डिस्क्वालीफाई हो जाता है।

किसी भी गलती को सुधरवाने काॅलेज में आॅप्शन नहीं है। छात्रों को इसके लिए यूनिवर्सिटी जाना पड़ता है। इससे भी दूर के छात्र एडमिशन से वंचित हो जा रहे हैं।

एडमिशन फीस कैश लेस करने से भी एडमिशन प्रभावित हुआ है। यूनिवर्सिटी ने नेट बैकिंग, स्वाइप और चालान से फीस पटाने आॅप्शन दिया है। इससे भी एडमिशन कम हुए।

एडमिशन कम होने की यह बताई जा रही बड़ी वजह

गर्ल्स काॅलेज में तीसरी मेरिट लिस्ट के इंतजार में पहुंची छात्राएं।

मेरिट लिस्ट दे दी, एडमिशन के लिए यूनि. जिम्मेदार नहीं

तीन बड़े सरकारी काॅलेजों में एडमिशन की स्थिति

पीजी काॅलेज- यह संभाग का सबसे बड़ा काॅलेज हैं। यहां यूजी की 19 सौ सीटें हैं लेकिन अभी तक यहां 800 एडमिशन भी नहीं हुए हैं। बीएस में यहां 8 सौ सीटें हैं और अभी भी चार सौ से ज्यादा खाली हैं। यही स्थिति बीएससी और बीकाॅम सहित अन्य कोर्स की है।

गर्ल्स पीजी काॅलेज- यहां 820 सीटें हैं जबकि 440 सीटों पर एडमिशन हुआ है। बीएससी मैथ्स में एडमिशन के लिए आवेदन करने वाली छात्रा ममता गुप्ता ने बताया कि पहली मेरिट लिस्ट में उसका नाम नहीं आया है। वह दूसरी लिस्ट का इंतजार कर रही है लेकिन अभी तक यहां की दूसरी लिस्ट भी नहीं आई है। काॅलेज से कुछ जानकारी ही नहीं मिलती है।

साइंस काॅलेज- साइंस काॅलेज में विभिन्न संकाय में कुल 300 सीटें है। यहां अभी तक सिर्फ 61 छात्रों ने ही एडमिशन लिया है। यहां पहली मेरिट लिस्ट में सिर्फ 117 छात्रों का नाम था। दूसरी मेरिट लिस्ट में 11 छात्रों का नाम आया। यानी यहां सीट के बराबर भी पहली और दूसरी मेरिट लिस्ट में उम्मीदवारों के नाम नहीं है। यहां तीसरी मेरिट लिस्ट के इंतजार में छात्र काॅलेज आ रहे हैं।

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