11 में 8 गांव बोले-नहीं करेंगे मतदान, टेंट गाड़कर करेंगे विरोध

Anchalik News - तेल नदी के सेनमुड़ा घाट पर पुलिया निर्माण की मांग को लेकर जिन 11 गांवों के लोगों ने बहिष्कार का ऐलान किया था उनमें से...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 06:50 AM IST
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तेल नदी के सेनमुड़ा घाट पर पुलिया निर्माण की मांग को लेकर जिन 11 गांवों के लोगों ने बहिष्कार का ऐलान किया था उनमें से निष्टिगुड़ा, झिरीपानी व फुलीमुडा के ग्रामीण नेताओं व अफसरों की समझाइश के बाद मतदान करने मान गए हैं जबकि 8 गांवों सेनमुड़ा, सुपेबेड़ा, मोटरापारा, सगौनभाड़ी, खोकसरा, खम्हारगुड़ा, परेवापाली, ठीरलीगड़ा के ग्रामीण मतदान नहीं करने के फैसले पर अडिग हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि मतदान के दिन गांव में पंडाल लगाकर एक जगह सभी वोटर्स अपने आने गांव में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। यह भी निर्णय लिया गया है कि निर्माण की प्रक्रिया शुरू न होने तक किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेंगे। सेनमुड़ा के सुंदर यादव समेत कई ग्राम प्रमुखों ने बताया कि जो लोग अब मनाने आ रहे हैं, उनके पास हम लोग पहले पुलिया बनवाने के लिए चक्कर लगा चुके हैं, इसलिए पूल नहीं बनते तक कोई समझौता नहीं होगा।

अफसर बोले मान गए हैं ग्रामीण : सोमवार को स्थानीय प्रशासनिक अमले ने सभी 11 गांवों के लोगों से मिला। जनपद सीईओ मोहनीश देवांगन, नायब तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान एवं थाना प्रभारी सत्येन्द्र सिंह श्याम 5 गा‌ंवों में बैठक कर ग्रामीणों से रूबरू हुए। सीईओ देवांगन ने बताया कि ग्रामीणों को पुल निर्माण की वर्तमान स्थिति व आगे किस तरह से बनेगा इस प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया। ये भी कहा गया कि वोट देकर जागरूक मतदाता का कर्तव्य निभाएं। अफसरों का दावा है कि उनकी समझाइश से ग्रामीण मान गए हैं और मतदान प्रक्रिया में जरूर भाग लेंगे।

देवभोग. खोकसरा में ग्रामीणों को समझाइश देते विधायक।

मनाने पहुंचे विधायक को सुनना पड़ा खरी खरी

प्रचार अभियान थमने के 4 घण्टे पहले विधायक डमरूधर पुजारी इन 8 गांवों में ग्रामीणों से मिलकर मतदान करने की अपील की। शाम 5 बजे से पहले उन्होंने चौपाल लगाकर ग्रामीणों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि प्रक्रिया में आ चुके पुल का निर्माण हर हाल में होना ही है। विधायक के साथ भाजपा के कई स्थानीय पदाधिकारी भी थे जिन्हें ग्रामीणों ने खूब खरी खरी सुनाई। सेनमुड़ा व सगौनभाड़ी के लोग यहां तक बोले कि काम न आने वाले एनीकट के लिये 50 करोड़ पूर्व सरकार दे सकती थी तो पुल निर्माण के लिये बढ़ी हुई राशि क्यों नही दे सकी। हालांकि विधायक ने भी दावा किया है कि उनकी बातें ग्रामीण मान गए हैं और वे मतदान में हिस्सा जरूर लेंगे।

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