10 साल बाद मिली सड़क, नालियां ऐसी कि बारिश का पानी तालाब में पहुंचे

Anchalik News - ब्लॉक मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर महानदी तट पर बसा छोटा सा गांव है मुड़ियाडीह। यहां के निवासी 10 साल से धमनी तक 3 किमी...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:15 AM IST
Palari News - chhattisgarh news after 10 years mud road drains such that the rain water reached the pond
ब्लॉक मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर महानदी तट पर बसा छोटा सा गांव है मुड़ियाडीह। यहां के निवासी 10 साल से धमनी तक 3 किमी सड़क बनाने की मांग कर रहे थे जो दो माह पहले जाकर पूरी हुई। भास्कर तब से ही लगातार इस मुद्दे को उठा रहा था। इस 10 साल की पीड़ा में पानी के दर्द को गांव वालों ने जान समझ लिया था, सो सड़क बनाने के दौरान ग्रामीणों ने अनुरोध किया कि सड़क के दोनों ओर नालियां ऐसी बनाएं जिससे होकर बरसात का पानी सीधे तालाब में पहुंचे। सड़क बनाने मुरुम की जरूरत थी, सो गांव के एक गड्ढे से ही खोदकर मुरुम दी जिससे तालाब भी बन गया और सड़क भी। यानी एक पंथ दो काज, तालाब भी बन गया और सड़क भी बन गई। इस बरसात का पानी इन नालियों से होकर सीधे इस तालाब में जाएगा जिससे भू-जलस्तर तो बढ़ेगा ही, बोर भी रिचार्ज होंगे।

मरीज का सहारा खाट ही थी, कई जानें गंवाईं: सड़क नहीं होने से बरसात में लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ता था, अगर कोई बीमार हो जाए तो भगवान ही मालिक होता था क्योंकि धमनी तक 3 किमी मात्र एक पगडंडी ही सहारा थी। रात बेरात खाट ही सहारा थी मरीज की, पर उसे उठाने भी 4 लोग चाहिए होते थे। फिर धमनी से 17 किमी पलारी तक एंबुलेंस का इंतजार भी महंगा पड़ता था।

इलाज के अभाव में जान तक गंवानी पड़ी

पलारी. ऐसी ही नालियों से इस नए तालाब में पहुंचेगा बरसात का पानी।

जल जोहार

ग्रामीण बोले- भास्कर अंत तक हमारे साथ रहा

उपसरपंच केदार गायकवाड़ उपसरपंच, ग्रामीण कन्हैया बंजारे, राजेन्द्र, श्यामाचरण, तीर्थ यादव, रामगोपाल, मंगलसिह, श्यामरतन, मानाराम, गोपाल, लखनलाल, संतराम गोपाल, रोहित, पुरुषोत्तम, लक्ष्मी, रूपनारायण, मुनिया आदि ने बताया कि धमनी तक सड़क बनाने के लिए हमारे बुजुर्गों ने बहुत तकलीफें झेलीं। इलाज के अभाव में लोगों को जान तक गंवानी पड़ी पर हमारी आवाज ऊपर तक पहुंच ही नहीं पाती थी। तभी सबसे पहले भास्कर ने हमारी पीड़ा साझा की, फिर यदाकदा दूसरे अखबार भी छापते रहे. सबसे लंबा साथ भास्कर ने दिया जो लगातार हमारे साथ खड़ा था। नतीजा बी सामने है, भास्कर को हम सभी का दिल से धन्यवाद देते हैं।

मुड़ियाडीह से धमनी तक दो माह पहले बनी 3 किलोमीटर की सड़क।

महानदी के किनारे रहकर भी गांव प्यासा था

यही हाल पानी का था। गांव में दो तालाब थे जो गर्मी में सूख जाते थे। इसके बाद निस्तारी की भीषण समस्या सामने आती थी। दो ही विकल्प थे-ग्रामीण धमनी से डेढ़ किमी पहले तालाब तक जाएं या डेढ़ किमी दूर महानदी तक। इस साल महानदी भी सूख गई, यानी नदी किनारे होकर भी गांव प्यासा था। यही वो दर्द था जिसने ग्रामीणों को पानी की किल्लत का पाठ किताबों से निकलकर हकीकत में पढ़ाया। जैसे ही सड़क बनने की खबर आई लोगों ने सड़क बनाने मुरुम देकर तालाब बनाया और बारिश के पानी को उसमें जमा करने नालियां बनाने का अनुरोध किया जिसे मान्य कर लिया गया। इस साल की बरसात पानी की सुबह लेकर आएगी, ऐसी उम्मीद है।

ईई बोले- ग्रामीणों की सूझबूझ के आगे नतमस्तक

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के ईई एचसी आिडल के कार्यकाल में यह सड़क बनी। इन दिनों वे धमतरी में पदस्थ हैं। उन्होंने बताया गांव वालों की इस जिद के आगे नालियों का ढलान तालाब की तरफ हो, वे भी नतमस्तक थे। उनकी सूझबूझ से ही हमें मुरूम मिली, जिससे सड़क तो बनी ही, तालाब भी बन गया। यह काम हमारे इस्टीमेट में नहीं था, फिर भी गांव की जरूरत को पूरा करने हमने इस्टीमेट में संशोधन किया।

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