विज्ञापन

चूल्हे पर ही बन रहा मध्याह्न भोजन उज्ज्वला गैस कनेक्शन का पता नहीं

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 02:55 AM IST

Anchalik News - केंद्र सरकार द्वारा पिछले दो-तीन सालों से चलाई जा रही अत्यंत महत्वाकांक्षी उज्ज्वला गैस योजना से कितने लाभान्वित...

Simga News - chhattisgarh news mid day meals on the stove are not known for the bright gas connection
  • comment
केंद्र सरकार द्वारा पिछले दो-तीन सालों से चलाई जा रही अत्यंत महत्वाकांक्षी उज्ज्वला गैस योजना से कितने लाभान्वित हुए अथवा नहीं, ये दीगर बात है परंतु विडंबना है कि इतनी बड़ी योजना के बाद भी मध्याह्न भोजन का संचालन करने वाले समूहों की महिलाएं आज भी कंडों व लकड़ियों से निकलने वाले धुएं के बीच प्रतिदिन सैकड़ों बच्चों के लिए भोजन पका रही हैं।

भास्कर प्रतिनिधि ने मटिया, पेंड्री ,लोहारी, सुहेला सहित कई गांवों के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शालाओं में जाकर इसकी जानकारी ली तो रसोइयों ने बताया कि उन्हें गैस चूल्हा मिला ही नहीं है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि चूल्हा व गैस तो दशक भर पहले ही मिल चुकी है परंतु इसे चलाने का प्रशिक्षण आज तक नहीं दिया गया है जिसके कारण हम परंपरागत तरीके से ही भोजन पका रही हैं। लोहारी एवं मटिया मिडिल स्कूल में भोजन पका रहीं इंदु देवदास व रूपा यादव आदि ने आंखें मलते हुए बताया कि हमें शासन से आज तक गैस चूल्हा नहीं मिल पाया है, जिससे ठंड, बरसात हो अथवा गर्मी हो परंपरागत साधन लकड़ी और कंडे के धुएं के बीच ही भोजन पकाती हैं।

सुहेला. चूल्हे में आग जलाने का प्रयास करती लोहारी मिडिल स्कूल की रसोइया

गैस 4 दिन में खत्म

महिलाओं ने कहा कि सुनने में यह भी आया है कि 80 से 100 बच्चों का भोजन पकाने में सिलेंडर की गैस 4 दिन में ही खत्म हो जाती है। ऐसी हालत में तो हमें अपनी रोजी मजदूरी से भी वंचित होना पड़ जाएगा। इससे बेहतर तो चूल्हे पर ही खाना बनाएं, जिससे दो पैसे बचेंगे।

डब्बानुमा किचन सेट

लोहारी एवं मटिया मिडिल स्कूल में बिना पर्याप्त खिड़कियों के डब्बानुमा पक्का किचन सेट बना दिया गया है, जिसमें से धुआं पास ही नहीं होता।

बढ़ी हुई तनख्वाह मिली ही नहीं

महिलाओं ने बताया कि जानकारी मिली है की रसोइयों की तनख्वाह 1200 से बढ़ाकर 1500 रुपए कर दी गई है परंतु बढ़ी हुई तनख्वाह अभी तक मिली नहीं है। स्थानीय बालक प्राथमिक शाला में मध्यान भोजन पकाने वाली विश्वासा व आसीन वर्मा एवं लोहारी प्रायमरी स्कूल की राधा वर्मा व लक्ष्मी यादव ने बताया कि स्कूल में करीब 12 साल पहले ही बड़ा सा चूल्हा भारत गैस के सिलेंडर के साथ लाकर रख दिया गया है, परंतु हमें प्रशिक्षण नहीं दिया गया है, न ही हमको गैस चूल्हा जलाना आता । तब से लेकर आज तक हम परंपरागत तरीके से ही भोजन पका रही हैं और हमें किसी ने मना भी नहीं किया है।

सुहेला. धुएं से भरे कमरे में ही भोजन पकातीं मटिया एवं लोहारी प्राथमिक शाला की रसोइया।

मिडिल स्कूल को नहीं दिया कनेक्शन

लोहारी मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक डीएन वर्मा ने बताया कि काफी पहले प्राथमिक शालाओं में गैस सिलेंडर चूल्हा शासन द्वारा दिया गया था परंतु किसी भी मिडिल स्कूल में नहीं मिल पाया है।

सुहेला. धुएं से भरे कमरे में आंखें मलती हुई स्थानीय नवीन प्राथमिक शाला की रसोइया।

होली के बाद स्कूलों से मंगाएंगे जानकारी

सिमगा बीईओ एसके गेंदले ने इस संबंध में बताया कि मध्याह्न भोजन के लिए ऑप्शनल है कि समूह चाहे तो लकड़ी-कंडे से बनाए अथवा गैस चूल्हे से। गैस चूल्हे से बनाने पर मिडिल में 30 और प्राइमरी में 20 पैसे प्रति बच्चे अधिक देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि होली के बाद सभी स्कूलों से जानकारी मंगाई जाएगी, कहां गैस चूल्हा मिला है कहां नहीं मिल पाया है।

X
Simga News - chhattisgarh news mid day meals on the stove are not known for the bright gas connection
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन