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मनरेगा मजदूरी मात्र Rs.2 बढ़ने से मजदूरों में मायूसी

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 06:30 AM IST

Anchalik News - मनरेगा मजदूरों के मानदेय में वृद्धि के नाम पर 2 रुपए का लॉलीपॉप केंद्र ने थमाया है। केंद्र ने हर प्रदेश के मजदूरों...

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मनरेगा मजदूरों के मानदेय में वृद्धि के नाम पर 2 रुपए का लॉलीपॉप केंद्र ने थमाया है। केंद्र ने हर प्रदेश के मजदूरों की दर में इजाफा किया है। इसमें छत्तीसगढ़ के मजदूरों का प्रतिदिन मानदेय 2 रुपए बढ़ाए जाने से मनरेगा मजदूरों में मायूसी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय दिल्ली हर साल मनरेगा मजदूरों की मजदूरी बढ़ाती है। इस बार शासन से छत्तीसगढ़ के मजदूरों की मजदूरी दर दो रुपए बढ़ाई है। प्रतिदिन की दर अब 174 से 176 हो गई है, जो एक अप्रैल से लागू हो गई है।

गौरतलब है कि प्रदेश से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन होता है। वहीं मजदूरी में महज 2 रुपए का इजाफा होने से पलायन रोकना राज्य सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। इसका असर आम चुनाव में भी पड़ सकता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 29 मार्च को अधिसूचना जारी की है। इसके मुताबिक 2019-20 के लिए मजदूरों की दर तय कर दी गई है। कई राज्यों में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी न्यूनतम खेतिहर मजदूरों से कम है और कई राज्यों में ज्यादा भी है। छत्तीसगढ़ में मजदूरों की प्रतिदिन की दर अब तक 174 रुपए तय थी, जिसे महज दो रुपए बढ़ाया गया है, जो बढ़कर 176 रुपए हो गई है। इससे अब मनरेगा मजदूरों को हर महीने 60 रुपए का लाभ मिलेगा। अब मजदूरों 5280 रुपए मिलेंगे।

हालांकि मनरेगा के मजदूरों का बजट हर साल कम हो रहा है। वहीं अन्य प्रदेश में 10 से 15 रुपए तक का मानदेय में इजाफा हुआ है। जबकि अब भी प्रदेश में कई जगह खेतिहर मजदूरों की मजदूरी मनरेगा के मजदूरी से अधिक है। एेसे में मजदूरी कम से कम 190 रुपए तक होने की उम्मीद प्रदेश के मजदूरों को थी। बहरहाल 2 रुपए इजाफा होने से जिले के 1 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरो में नाराजगी है।

मानदेय बढ़ने के नाम पर केंद्र केंद्र सरकार ने इस साल Rs.2 की वृद्धि की

बलौदा बाजार. जिलें के एक गांव में मनरेगा के तहत काम करते हुए मजदूर।

मेहनताना में तीन साल में महज 6 रुपए का इजाफा

प्रदेश में यह पहली बार नहीं है, जब मनरेगा मजदूरों की दर इतनी कम बढ़ाई गई है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी प्रदेश के मजदूरों की दर सिर्फ 2 रुपए बढ़ाई गई थी। पिछले साल मजदूरी बढ़कर 174 रुपए हुई थी, जो अब बढ़कर 176 रुपए हो चुकी है। लगातार तीन साल से केंद्र सरकार प्रदेश के मनरेगा मजदूरों की आशा पर पानी फेरा जा रहा है। इससे मनरेगा मजदूरों में सरकार के प्रति नाराजगी भी है।

पलायन रोकना बनेगा चुनौती

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के अंतर्गत आने वाले 250 से अधिक ग्राम के ग्रामीणों द्वारा पंजाब हरियाणा के ईंट भट्टे एवं तेलंगाना, केरल में बोरिंग गाड़ियों में मजदूरी का काम करने से महज अत्यधिक मेहनताना मिलने के एवज में जाते हैं। कई बार बंधक बनाए जाने की बात भी सामने आती है। वही दो रुपए का मानदेय बढ़ने से रायगढ़ जिले के मजदूरों को मजदूरी की तालाश में पलायन को रोकना किसी चुनौती से कम नहीं होगी।

यहां मजदूरी ज्यादा (रुपए में)

हरियाणा - 281

पंजाब - 240

गोआ - 254

केरल - 271

तामिलनाड - 224

तेलंगना - 205

हरियाणा में मनरेगा मानदेय सबसे अधिक

मनरेगा को लागू करने का मुख्य उद्देश्य पलायन रोकने के साथ ही गांवों का विकास करना है। इसमें एक ही परिवार के पांच लोगों को काम दिया जाता है। इसमें उनकी मजदूरी भी तय है। एक ओर जहां प्रदेश में दो रुपए इजाफा होने के बाद 176 रुपए मजदूरी है। वहीं हरियाणा में मजदूरों को एक दिन का मेहनताना सबसे अधिक 281 रुपए दिया जा रहा है। जबकि नए बने राज्य तेलंगाना में 205 रुपए है।

वर्तमान में लगे मजदूर

बलौदा बाजार - 13840

भाठापारा - 15869

बिलाईगढ़ - 19554

कसडोल - 19972

पलारी - 17803

सिमगा - 14695

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