अटल निश्चय से ही कठिन कार्य पूरे होते हैं

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:02 AM IST

Anchalik News - समीपस्थ ग्राम लिमतरी में जय संतोषी मां महिला समिति और ग्रामवासियों के तत्वावधान में संगीतमय भागवत कथा का आयोजन...

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समीपस्थ ग्राम लिमतरी में जय संतोषी मां महिला समिति और ग्रामवासियों के तत्वावधान में संगीतमय भागवत कथा का आयोजन किया गया है। दूसरे दिन कथा सुनाते हुए पं. प्रेमनारायण शर्मा ने बताया कि पांच साल का ध्रुव विमाता के वचनों से दुखी होकर तप करके कुछ महीने में ही भगवान को प्रकट कर लिया।

यह सब गुरु जी की मार्गदर्शन से संभव हुआ। उसे ध्रुव लोक की प्राप्ति हुई। अंत में मृत्यु के सिर पर पैर रखकर बैकुंठ गए। यह बात भागवत के चौथे स्कंध के 12वें अध्याय के तीसरे श्लोक में है कि मृत्यु के सिर पर पांव रखकर ध्रुव जी विमान पर बैठे। भगवान के भक्त मृत्यु से नहीं उतरे जो ईश्वर की शरण मे गया है, वह निर्भय बनाता है। ध्रुव ने भगवान की शरणागति स्वीकार की तो उनको दर्शन मिला, राज्य मिला और बैकुंठ मिला। ध्रुव कथा हमें बताता है कि अटल निश्चय से कठिनता कार्य भी सिद्ध होता है। बाल्यावस्था से जो भगवान की अक्ति करता है, उसे ही भगवान मिलते हैं। वृद्धावस्था में भजन करने से अगला जन्म सुधरता है।

महाराज ने पुरंजन उपाख्यान का वर्णन करते हुए बताए कि पुरंजन है। पुरंजनी है। अविज्ञात ईश्वर सखा है। ईश्वर अज्ञात रूप से जीव की सहायता करता है। पुरंजन जीव यह नहीं सोचता कि वह किसी की सहायता के कारण सुखी है। परमात्मा की लीला अविज्ञात है।

वहा पुरंजनी बुद्धि कुछ काम नहीं दे सकती। जीवात्मा यात्री है, परमात्मा चालक यदि भगवान सो जाए तो गोविंदाय नमो नम: हो जाए। मान लो यदि रेलवे का इंजन चालक सो जाए तो गाड़ी रुक जाती है, कुछ भी हो सकता है। यात्री सो सकता है, चालक सूत्रधार ईश्वर नहीं। फिर भी जीव सोचता तक नहीं है उसे सुख सुनि देने वाला है कौन। माया के चक्कर पड़ा जीव के समक्ष जिस अविज्ञात ईश्वर सखा को जीव भूल जाता है, वही सद्गुरु के रूप में आकर ब्रह्मविद्या का उपदेश करता है कि तू इस संसार में स्त्री-पुरुष योनियों में कब तक भटकता रहेगा। अब परमात्मा का आश्रय लेकर कृतार्थ हो जा। आत्मा परमात्मा का अंश है। आत्मस्वरूप का ज्ञान हो जाए और शरीर का विस्मरण हो जाए तो मनुष्यों को जीते जी मुक्ति प्राप्ति हो सकती है। भागवत कथा श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण एवं ग्रामवासी पहुंचे थे।

मातृत्व भाव वाली महिलाएं ही अपने पराए को कराती हैं स्तनपान

तिल्दा-नेवरा| ग्राम लखना (सोमनाथ) में श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ समारोह 6 से 14 जनवरी तक किया जा रहा है। फेकूराम-कुमारी बाई साहू के यहां कथा चल रही है। कथा व्यास हरिहर प्रसाद तिवारी ने श्रीकृष्ण की बाल लीला और रुक्मिणी रुक्मिणी मंगल कथा सुनाई।

प्रसंग में बताया कि श्रीकृष्ण को जब पूतना अपना दूध पिलाने के लिए आती है, तब उसमें मातृत्व का भाव नहीं था। जिस मां में मातृत्व का भाव होता है वही मां अपने और पराए बालक को स्तनपान कराती है। जब पूतना कृष्ण के बालक स्वरूप को देखता है तो वह अपने मातृत्व को रोक नहीं पाई और वह यह भी भूल गई कि मेरे स्तन में विष लगा है। पूतना स्तनपान कराने लगती है और जैसे ही वही श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती है, वे उसका वध कर देते हैं। पूतना पूर्वजन्म में किए पाप से मुक्त पाने ही इस युग में आई थी और भगवान ने जब भी अवतार लिया, सर्वप्रथम वह स्त्री को ही मुक्त किए। जैसे राम अवतार में ताड़का का वध कर उसे मुक्त किया। अंत में रुक्मिणी विवाह हुआ। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

बेटे नारायण का नाम लेने पर ही अजामिल ने श्रीधाम को प्राप्त हुआ: चैतन्य किशोर

भाटापारा| बाल मंदिर मैदान में श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। तीसरे दिन वृंदावन धाम के चैतन्य किशोर कटारे ने भागवत कथा के दौरान कहा कि श्रीमद् भागवत मनुष्य के सभी कष्टों को दूर करती है एवं श्रीमद् भागवत भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी गंगा है, जिसमें तीनों समुचित रूप से विद्यमान है। उन्होंने भगवान के परम भक्त विदुर चरित्र और कपिल चरित्र का वर्णन किया। कपिल एवं देव हूति संवाद अंतर्गत जीव की माता के गर्भ में क्या स्थिति होती है, का वर्णन किया। ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, सती चरित्र और भगवान नाम महिमा के अंतर्गत अजामिल की कथा का वर्णन किया, जिसमें अजामिल अपने पुत्र नारायण का नाम पुकार कर यमदूतों के बंधन से छूटकर भगवान के श्रीधाम को प्राप्त किया। कथा रोज दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक सुनाई जा रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं।

तिल्दा-नेवरा. लखना (सोमनाथ) में भागवत महापुराण सुनते हुए श्रद्धालु।

पं. हरिहर प्रसाद तिवारी ने परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाया

ग्राम लखना में श्रीमद्भागवत के 7वें दिन पं. हरिहर प्रसाद तिवारी ने परीक्षित मोक्ष प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने अपने मोक्ष के लिए अपने यहां श्रीमद्भागवत गीता का आयोजन कर अपने आप को मोक्ष कर लिया तथा जिस सर्प से उनकी मृत्यु होने वाली थी, उस सर्प के लिए फूलों से सजावट कर रखा था। साथ ही दत्तात्रय महाराज द्वारा चौबीस प्रकार की शिक्षा प्राप्त करने के बारे में भी विस्तार से श्रद्धालुओं को बताया।

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