शिक्षक एक, ग्रुप स्टडी काम आई, स्कूल का रिजल्ट रहा @ 94.44%

Anchalik News - 8 साल पहले मगररोडा में हाई स्कूल खोला गया जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहा था। परिणाम प्रभावित होते देख पालकों ने पिछले...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 06:41 AM IST
Devbhog News - chhattisgarh news teacher a group study work school result 9444
8 साल पहले मगररोडा में हाई स्कूल खोला गया जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहा था। परिणाम प्रभावित होते देख पालकों ने पिछले साल टीसी तक मांग ली थी। इस बीच शिक्षक ने समूह पठन की तरकीब निकाली। तरकीब कारगर रही और इस बार स्कूल का रिजल्ट ब्लॉक में 94.44 प्रतिशत के साथ अव्वल आया। शिक्षा में प्रयोग की यह अनोखी पहल अब चर्चा का विषय बनी हुई है।

देवभोग ब्लॉक के मगररोडा हाईस्कूल का इस बार का परीक्षा परिणाम 94.44 प्रतिशत आया है। ब्लॉक के 18 हाईस्कूल में यहां का परिणाम अव्वल रहा है। विषय शिक्षकों की कमी के कारण ज्यादातर स्कूलों का परिणाम इसी तरह का था। 2016 से पहले मगररोडा स्कूल मिडिल स्कूल के शिक्षकों के भरोसे चल रहा था। 2016 में आदित्य सतपथी को प्रमोट कर मगररोडा हाई स्कूल प्रभारी बनाया गया। पालकों के आक्रोश को देखते हुए सतपथी ने ग्रुप स्टडी पैटर्न पर पढ़ाना शुरू किया। विषयों की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के अलावा लेखन का निरंतर अभ्यास कराया। स्कूल के रिकार्ड के मुताबिक 2015 में 30 प्रतिशत, 2016 में 42 प्रतिशत, 2017 में 31 प्रतिशत, 2018 में 76 प्रतिशत रिजल्ट रहा था।

18 छात्र में से 17 पास

7 को प्रथम स्थान

इस बार 18 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे, जिसमें 17 उत्तीर्ण हुए, इसमें से भी 7 छात्र प्रथम स्थान पर रहे। 89.83 प्रतिशत अंक लेकर मुकेश साहू यहां के सभी सरकारी स्कूलों में प्रथम स्थान प्राप्त किय। इससे पहले तक इस स्कूल का परिणाम बहुत ही कम था। ग्राम प्रमुख लम्बूधर नेताम, नोहर सिंह ने बताया कि खराब रिजल्ट के चलते पिछले सत्र में पालक टीसी मांगने लगे थे,लेकिन शिक्षक आदित्य सतपथी ने परिणाम सुधारने तरकीब निकाली ,अब अच्छे परिणाम को लेकर सभी खुश हैं।

देवभोग. मगररोडा स्कूल में ग्रुप स्टडी से सुधरा रिजल्ट।

समूह बनाकर छात्र को बनाया लीडर

हाईस्कूल में 10वीं के 18 बच्चों के अलावा 9वीं को मिलाकर 45 बच्चे मगररोडा स्कूल में पढ़ रहे थे। 10वीं बोर्ड की तैयारी के साथ-साथ 9वीं को भी पढ़ाना था। ऐसे में शिक्षक आदित्य सतपथी ने 10वीं के 18 बच्चों को 5 समूहों में बांट दिया। हर समूह में एक होशियार बच्चे था जो समूह को लीड करता था। रोजाना एक चैप्टर को सॉल्व करने का लक्ष्य दिया जाता था। 9वीं में भी इसी तरह समूह बनाकर पढ़ाई करवाई गई। समूह को केवल मार्गदर्शन दिया जाता रहा। इससे एक ही समय में दोनों कक्षाओं में आसानी से पढ़ाई हो जाती थी। अगली सुबह प्रेयर के समय पढ़े गए चेप्टर का मौखिक टेस्ट भी हो जाता था। प्रेयर में किसी भी छात्र से रैंडम सवाल पूछा जाता था, इसलिए सभी इसकी तैयारी के साथ आते थे।

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