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देवभोग के सरगीगुड़ा गांव के लोग मिलकर करते थे सफाई, सिंचाई विभाग 1963 से पानी बेच रहा लेकिन सफाई नहीं करा रहा

Anchalik News - गावों के प्रभुत्व में रहते 100 साल से भी ज्यादा पुराने सरगीगुड़ा के 45 एकड़ में फैले तालाब में आसपास के 5 गांवों के लोग...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 06:40 AM IST
Devbhog News - chhattisgarh news the people of sarigigura village of devbhog used to do the cleaning the irrigation department selling water from 1963 but was not cleaning
गावों के प्रभुत्व में रहते 100 साल से भी ज्यादा पुराने सरगीगुड़ा के 45 एकड़ में फैले तालाब में आसपास के 5 गांवों के लोग निस्तारी करते थे। 57 साल पहले सिंचाई विभाग ने इसे अपने अधीन कर लिया, अब विभाग 50 से 120 एकड़ तक हर साल सिंचाई के लिये पानी छोड़कर राजस्व वसूली करता है लेकिन आज तक मरम्मत या कीचड़ की सफाई नहीं कराई।

इससे ग्रामीणों को अब निस्तारी में दिक्कत आ रही है जबकि पहले जब तालाब गांवों के कब्जे में था, ग्रामीण मिलकर इसकी साफ सफाई करते थे। यानी तालाब धीरे-धीरे सरकारी मौत की ओर अग्रसर है।

ब्लॉक मुख्यालय से 7 किमी की दूर बसे सरगीरगुडा में 45 एकड़ में फैले इस तालाब को ब्लॉक का सबसे विशाल तालाब का दर्जा मिला हुआ है। गांव के बुजुर्ग दशरथ बघेल, नरेंद्र ठाकुर, पृथ्वी सिंह बताते हैं कि इस तालाब में उनका पूरा बचपन बीता है। बाप दादा के समय से पास के 5 गांवों के लोग निस्तारी के लिये इसी तालाब पर निर्भर थे। इलाके में सिंचाई का कोई दूसरा विकल्प नहीं था। तालाब लबालब भरा रहता था इसलिए सिंचाई विभाग ने तालाब को अपने अधीन कर लिया।

रिकॉर्ड के मुताबिक तालाब में 2 गेट व नहर निर्माण का कार्य सिंचाई विभाग ने मई 1962 में करवाया, जिसकी लागत 12 लाख 57 हजार आई थी।1963 से सिंचाई विभाग ने तालाब में केवल 3 फीट पानी बचाकर शेष पानी को खरीफ में सिंचाई के लिये दे देता है। इस तालाब से विभाग गांव के 37 किसान परिवारों के 120 एकड़ खेत को सिंचाई सुविधा देने अनुबंध हर साल करता है।

पांच गांवों की निस्तारी करने वाला 45 एकड़ का तालाब लोगों के कब्जे में था तो साफ था, सरकारी होते ही अस्तित्व पर संकट

अनदेखी के चलते पुराने तालाब का अस्तित्व खतरे में दिख रहा है।

सफाई होती तो साफ पानी मिलता

सिंचाई के लिये पानी छोड़ने के बावजूद मई जून तक तालाब में निस्तारी के लिये पर्याप्त पानी रहता है लेकिन तालाब की लंबे से सफाई नहीं होने से पिछले 15 सालों से तालाब में गर्मी के दिनों में निस्तारी की बड़ी समस्या हो रही है। बेशरम व जलकुंभी से तालाब भरा पड़ा है, घाट के किनारे भी भारी मात्रा में कीचड़ मौजूद है। एक मीटर आगे जाते ही कीचड़ में पा‌ंव धंसने लगते हैं। ग्रामीणों का यही कहना है कि अगर तालाब की सफाई समय-समय पर होती तो उन्हें निस्तारी के लिये साफ पानी मिलता।

सफाई होगी, कार्ययोजना में शामिल है : जेई

तालाब के इंचार्ज जेई मनोज टांडील ने बताया कि फिलहाल गेट व नहर की मरम्मत का काम चल रहा है। आने वाले समय में मनरेगा से तालाब की सफाई भी कराई जाएगी। संभावित कार्य की सूची में इस तालाब का नाम शामिल है।

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