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नई सरकार के इंतजार में रुका धान आने लगा बिकने, 37 दिन का समय बचा जो कम पड़ेगा

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 02:50 AM IST

Anchalik News - छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एक नवंबर से प्रारंभ गई है जो 31 जनवरी तक जारी रहेगी। चुनावी वर्ष...

Palari News - waiting for new government to stop the paddy arrival sell 37 days of time which will be less
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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एक नवंबर से प्रारंभ गई है जो 31 जनवरी तक जारी रहेगी। चुनावी वर्ष होने से राजनीतिक पार्टियों ने किसानों का वोट लेने के लिए अपने-अपने घोषणा पत्र में किसानों के हित की बात करते हुए कर्ज माफ़ी और समर्थन मूल्य अधिक देने की घोषणा कर दी जिसका असर खरीदी केंद्रों पर चुनाव के बाद भी साफ झलक रहा है।

बलौदाबाजार जिला में पूरी धान खरीदी पर नजर डालें तो जिले में कुल 1,33,600 पंजीकृत किसान हैं, जिसका कुल रकबा 1,81,637 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसके आधार जिले में लगभग 6 मेट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है लेकिन खरीदी के 21 दिन बाद भी मात्र 36 प्रतिशत धान की आवक खरीदी केंद्रों में हो सकी है। दरअसल साफ्टवेयर में एकहफ्ते से अधिक का टोकन नहीं कटता जिससे समितियों की मुश्किलें बढ़ रहीं हैं, फिर समितियों में क्षमता से अधिक दान रख भी नहीं सकते क्योंकि उनके पास जगह नहीं है। नई सरकार के गठन की तारीख नजदीक आते ही अब रफ्तार से धान भी बिकने आने लगा है।

16,82,000 क्विंटल धान की ख़रीदी की गई जो करीब 39813 किसानों से खरीदा गया जबकि अभी भी लगभग 94 हजार किसानों से 4 मेट्रिक टन धान खरीदना शेष है। जबकि जिले के 86 सहकारी समिति के 149 खरीदी केंद्रों में प्रति दिन करीब 2200 से 2300 किसान धान बेच रहे हैं। इन किसानों से एक लाख से सवा लाख क्विंटल धान की खरीद हो रही है, जबकि पिछले साल धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हुई थी और जिला अकाल के चपेट में था, उसके बाद भी 8 दिसंबर 2017 तक 19,19,370 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी थी। इस वर्ष 1 नवंबर से खरीदी शुरू हुई है और बंफर पैदावारी होने के बाद भी 16, 82,000 क्विंटल धान की खरीदी ही हुई है जो पिछले साल से कम है।

पलारी. पिछले साल अकाल के बावजूद ज्यादा धान बिका था, 15 दिन देर से भी चालू हुई थी खरीदी

समितियां व्यवस्था करें: डीएमओ

इस संबंध में डीएमओ आरपी मिश्रा का कहना है की शासन के निर्धारित समय पर ही धान खरीदना है और इसके लिए समितियां व्यवस्था दुरुस्त करें, मैन पावर बढ़ाए और पंजीकृत सभी किसानों को समय सीमा के अंदर धान बेचने के लिए टोकन जारी करे।

37 दिन शेष हैं धान बेचने के लिए और टोकन में चल रही एक माह की एडवांस बुकिंग

निर्धारित समय के अनुसार दिसंबर में 14 दिन और जनवरी में 23 दिन कुल 37 दिन ही खरीदी होना है। इस अवधि में लगभग 94,000 किसानों का धान बेचना अभी बाकी है। इसमें से अधिकांश किसान कर्ज माफ़ी और समर्थन मूल्य की बढ़ोतरी के लिए नई सरकार के गठन का इंतजार कर रहे हैं, जो 11 दिसंबर के बाद ही अपनी उपज बेचेंगे । अब धान बेचने के लिए किसान जब टोकन कटवा रहे हैं तो एक एक माह की एडवांस बुकिंग चल रही है। ऐसे में किसान अब चिंतित हो रहे हैं कि उनका धान बिक पायेगा कि नहीं क्योंकि समिति की खरीदी क्षमता 4000 कट्टा है, उससे ज्यादा वो खरीद नहीं सकतीं। क्षमता से अधिक रखने की समितियों के पास जगह नहीं है। जिन किसानों ने धान रोककर रखा है वो समय सीमा में धान ही नहीं बेच पाएंगे तो उनको नुकसान उठाना पड़ेगा।

साफ्टवेयर में एक हफ्ते का ही टोकन कटता है

पूरे धान को बेचने के लिए सरकार को समय बढ़ाना पड़ेगा । वहीं खरीदी केंद्रों के प्रभारी रोमनाथ साहू, कृषलाल चंद्राकर, खिलावन साहू, संतोष यादव, हेमलाल फेकर, मोहन वैष्णव, सुखीराम, केपी पटेल आदि ने बताया कि अब थोक के भाव में किसान टोकन कटवाने आ रहे हैं जिसको रजिस्टर में क्रम से नोट कर एक एक हफ्ते का टोकन दिया जा रहा है। साफ्टवेयर में एक सप्ताह से अधिक का टोकन नहीं कटता इसलिए रजिस्टर में लिखकर किसानों को टोकन जारी किया जा रहा है । वहीं किसान नेता अखिलेश्वर वर्मा, रोहित साहू, मुकेश साहू, गोविंद वर्मा, नाथूराम, देवव्रत, पीतांबर, जगदीश साहू, ओमनारायण केशरी, मोहन चेरियन, संतराम साहू, भागीरथी वर्मा, अरुणादेवी साहू, वामन टिकरिहा, राजकुमार बंजारे, मोहन कनोजे, संतोष साहू, हुलास वर्मा आदि ने शासन से खरीदी के लिए समय बढ़ाने की मांग की है ।

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