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राक्षसों का अत्याचार बढ़ने पर विष्णु से गुहार, किया गया समुद्र मंथन, विष पीकर शिव कहलाए नीलकंठ / राक्षसों का अत्याचार बढ़ने पर विष्णु से गुहार, किया गया समुद्र मंथन, विष पीकर शिव कहलाए नीलकंठ

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 02:50 AM IST

Anchalik News - ग्राम रवेली के शिव चौक पर चल रहे श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन प्रवचन कर्ता पं. ऋषिकेश तिवारी ने अजामिल, गजेंद्र...

Nayapara Rajim News - when the atrocities of the monsters grew they were killed by vishnu sea churning poisoning and saying shiva nilkanth
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ग्राम रवेली के शिव चौक पर चल रहे श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन प्रवचन कर्ता पं. ऋषिकेश तिवारी ने अजामिल, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन तथा वामन अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब देवताओं को राक्षसों ने सताने शुरू किया तो सभी देवता भगवान विष्णु के पास जाकर राक्षसों से मुक्ति के लिए गुहार लगाने लगे।

इस पर भगवान श्रीहरि ने देवताओं को समुद्र मंथन कर वहां से अमृत प्राप्त करने कहा। समुद्र मंथन मात्र देवताओं से नहीं हो पाया। इसके बाद इस कार्य के लिए राक्षसों का भी सहारा लिया गया। राक्षसों-देवताओं ने मिलकर समुद्र मंथन शुरू करने किया तो सबसे पहले जहर निकला। सारे जगत को बचाने के लिए भगवान शंकर ने जहर पीकर नीलकंठ कहलाया। अंत में समुद्र मंथन से भगवान धनवंतरी कलश में अमृत लेकर निकले, जिसे पकड़ने के लिए राक्षस भागे।

अमृत को बांटते समय भगवान विष्णु ने यह भी ध्यान रखा कि अगर इस अमृत को राक्षस भी पी लेंगे तो संसार में अत्याचार पूरी तरह बढ़ जाएगा। इस कारण से भगवान विष्णु महिला के भेष में दोनों दलों को अमृत बांटे जा रहे थे। लेकिन राक्षसों को अमृत के बजाय पानी को पिला रहे थे। उसी समय एक राक्षस देवता के भेष में देवताओं के दल में बैठ गया, जो अमृत पी गया। तब श्रीहरि ने उस राक्षस का गला काट दिया। लेकिन अमृत पीने के कारण राहु और केतु के रूप जीवित रहे।

कोपरा नवापारा- रवेली के शिव चौक पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सुनने हुए श्रद्धालु।

तीन में वामन अवतार में नाप लिया नभ-जल और पाताल

पं. तिवारी ने आगे वामन अवतार की कथा बताते हुए कहा कि जब राजा बली इंद्र से युद्ध कर उसे हरा दिए और उसके राजसिंहासन पर कब्जा कर लिया तो भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर राजा बली की परीक्षा लेने गए। जिसे राजा बली ने तीन कदम जमीन नाप कर रखने कहा। वामन देवता ने एक पग में जमीन, दूसरे पग में आसमान को नाप लिया। तब तीसरा पग रखने के लिए राजा बली से कहा तो बोले सिर पर रख दो। इस प्रकार उसके चौकीदार के रूप में रहने लगे। एक दिन माता लक्ष्मी रक्षाबंधन के दिन कोई भाई नहीं है, कहकर रो रही थी। तो राजा बली ने उससे राखी बंधवाकर कुछ मांगने कहा तो लक्ष्मी उनकी चौकीदार बनी और भगवान को वापस मांग लिया। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

कोपरा नवापारा. कथा के दौरान वामन अवतार के रूप में बालक।

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