Hindi News »Chhatisgarh »Ankira» शहीदों के गांव में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं अंतिम संस्कार के समय किए गए वादे भी भूले

शहीदों के गांव में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं अंतिम संस्कार के समय किए गए वादे भी भूले

विकासखंड फरसाबहार के शहीदों के तीन गांव आज भी मुलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। हालांकि इनके अंतिम संस्कार के समय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:00 AM IST

विकासखंड फरसाबहार के शहीदों के तीन गांव आज भी मुलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। हालांकि इनके अंतिम संस्कार के समय सुविधाएं देने की बात कही गई थी, लेकिन अन्य विभागों की तरह इन्हें भी मुआवजा एवं अनुकंपा नियुक्ति देने के बाद गांव के विकास में किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण आज भी तामामुण्डा, बाबूसाजबहार एवं पेरवांआरा के लोग बिजली, पानी जैसे जरूरी मुलभूत सुविधाओं के लिए अब भी मोहताज हैं। शेष पेज 16

अपनी जान जोखिम में डालकर हमारी सुरक्षा करने वाले जवानों के शहादत के बाद उनके प्रति देशवासियों की श्रद्धा और ज्यादा बढ़ती है। वहीं इनके अंतिम संस्कार में जनप्रतिनिधी एवं उच्चाधिकारी भी उपस्थित होते हैं। जहां शहीद के परिवार सहित गांव के विकास का भरोसा भी देते हैं। विभाग की अोर से नियमानुसार इनके परिवारों को मुआवजा एवं अनुकंपा नियुक्ति देकर कुछ हद तक परिवार वालों को मरहम लगाने की कोशिश की जाती है, किंतु इन शहीदों की याद में गांव में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता, जिससे शहीद के गांव के रूप में जाना जा सके। फरसाबहार विकासखंड के तामामुण्डा, बाबूसाजबहार एवं पेरवांआरा गांव के तीन जवान शहीद हो चुके हैं। जहां अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा इनके याद के लिए गांव को एक अलग पहचान देने की बात कही गई थी, लेकिन मुआवजा एवं अनुकंपा नौकरी देकर शासन अपने कर्तव्य से इतिश्री कर ली। हालांकि तामामुण्डा में शहीद के नाम पर एक स्तंभ बनाया गया है। वहीं बाबूसाजबहार एवं पेरवांआरा में तो शासन द्वारा कुछ यादगार निर्माण तो दूर इनके गांव के लोेग आज भी गुमनाम रहने पर मजबूर हैं।

विडंबना

माटीहेजा, जमुनाडीपा, सोनाजोरी, विवराटोली, सुदरटोली, बडेक पारा में लालटेन युग

पिता ने खुद पैसे खर्च कर

बनवाया शहीद स्मारक

पेरवाआरा के शहीद बसील टोप्पो के पिता ने स्मारक बनाए जाने के लिए दो वर्ष का इंतजार करने के बाद निराश होकर पिता ने अपने बेटे की याद में स्वयं के खर्च कर स्मारक बनवाकर अपने शहीद बेटे का प्रतिमा स्थापित किया। जिसके बाद क्षेत्र के लोग इस गांव को शहीद के गांव के रूप में जानते हैं। शहीदों की गांव की उपेक्षा देख क्षेत्र के अनेक लोगों का मानना है कि, शहीद के गांवों में शासन विकास के साथ कुछ ऐसा कर दिखाना चाहिए, जिससे क्षेत्रवासियों में देश ही रक्षा करने का ललक बढ़े।

कई गांव में अब तक बिजली नहीं

शहीद के अंतिम संस्कार के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास के कई दावे किए थे। तब ग्रामीणों में आश बंधी थी, कि हमें जल्द से जल्द मूलभूत सुविधा मिलेगी। सालों बीतने के बाद भी माटीहेजा, जमुनाडीपा, सोनाजोरी, विवराटोली, सुदरटोली, बडेक पारा सहित अनेक टोले माजरे के लगभग साढ़े तीन सौ परिवार लालटेन युग में जी रहे है। इसमें से माटीहेजा में 2-3 वर्ष पहले ही खंभे गड़े है। बावजूद अभी तक बिजली के तार नहीं लग पाए है। जबकि यह क्षेत्र ओडिसा सीमा से लगा हुआ है एवं नदी नाला सहित जंगल से घिरा होने के कारण वर्ष भर हाथियों का आवाजाही बना रहता है। इससे क्षेत्र के लोग दहशत में रात बिताने के लिए मजबूर हैं। वहीं बिजली के बिना स्कूली बच्चों की रात की पढाई भी बाधित हो रही है। सरपंच अंतोनी टोप्पो ने बताया की इन टोलों माजरों में बिजली के लिए लोक सुराज अभियान जन समस्या निवारण शिविर सहित अनेक जगह दर्जनों से भी अधिक आवेदन दिया जा चुका है। बावजूद अब तक आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Ankira

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×