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250 नक्सलियों ने एक किमी लगाया था एंबुश, जवानों को दे रहे थे चुनौती

तीन दिनों तक नक्सलियों द्वारा मचाए गए उत्पात के बीच दंतेवाड़ा पुलिस को जनमिलिशिया कमांडर को ढेर करने में एक बड़ी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 09, 2018, 02:00 AM IST

तीन दिनों तक नक्सलियों द्वारा मचाए गए उत्पात के बीच दंतेवाड़ा पुलिस को जनमिलिशिया कमांडर को ढेर करने में एक बड़ी कामयाबी मिली है। इलाके में यह कामयाबी हिरोली-बेंगपाल के जंगलों में पुलिस को मिली है। बुधवार को डीआरजी-एसटीएफ के करीब 200 जवान हिरोली-बेंगपाल के जंगलों की ओर निकले थे।

यहां पहले से ही पहाड़ के उपर करीब 250 नक्सलियों का डेरा था। करीब एक किलोमीटर एंबुश नक्सलियों ने यहां लगा रखा था। शाम 6 बजे जैसे ही पहाड़ के नीचे जवान चल रहे थे, नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी नक्सलियों को यहां करारा जवाब दिया। नक्सली बार-बार जवानों को दम है तो सामने आओ कहकर चुनौती दे रहे थे। जवानों ने पूरी सूझबूझ का परिचय देते हुए नक्सलियों का डटकर मुकाबला किया। इस बीच मुठभेड़ में जवानों ने जनमिलिशिया कमांडर हुंगा को मार गिराया।

1000 जवान पहुंचे तब टूटा नक्सलियों का एंबुश : बेंगपाल के जंगल में नक्सलियों ने एक किलोमीटर का एंबुश लगाकर रखा था। जवान पहाड़ के नीचे चल रहे थे, नक्सली पहाड़ के उपर थे। यहां से नक्सली लगातार जवानों को लड़ने की चुनौती दे रहे थे। यहां जवानों ने सूझबूझ का परिचय दिया। मुठभेड़ के बाद 250 जवान नक्सलियों के एंबुश में फंसे रहे। इधर सुकमा, बीजापुर व दंतेवाड़ा से सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ की अतिरिक्त फोर्स रवाना किया गया। एंबुश में फंसे जवानों को करीब 1000 जवानों का सपोर्ट मिला, नक्सलियों का बड़ा एंबुश टूटा व नक्सली कमजोर होकर भाग खड़े हुए।

जंगल प्रवेश करते ही मिला नक्सल कैंप

डीआरजी व एसटीएफ के जवान दो दिनों से जंगल में ही थे। 200 जवानों ने जब बेंगपाल के जंगल में प्रवेश किया तो यहीं से ही नक्सलियों की मौजूदगी का आभास होने लगा था। इस पूरे आॅपरेशन को लीड कर रहे एसआई संग्राम सिंह ने बताया कि जंगल में घुसते ही सुबह 8 बजे नक्सलियों का एक कैंप मिला लेकिन यहां कोई नहीं था। चूल्हा व रखे बर्तन को जवानों ने वहीं नष्ट कर दिया। दिनभर चलने के बाद शाम 6 बजे पहाड़ पर एक किलोमीटर के दायरे में नक्सलियों के दो दर्जन से ज्यादा कैंप थे जहां करीब 250 नक्सली डेरा जमाए हुए थे। जैसे ही जवानों के आने की भनक लगी, फायरिंग शुरू की व लगातार चुनौती भी दे रहे थे। अंधेरा होने के कारण हमने किसी प्रकार का जोखिम नहीं लिया। यदि उत्तेजित होते तो बड़ा नुकसान हमें उठाना पड़ सकता था।

बंद के दौरान ये घटनाएं हुईं

बंद के दौरान गाटम में मुंशी मनोज की हत्या, भांसी-बचेली के बीच रेल पटरी उखाड़ी, फरसपाल-कोडोली मार्ग को काटने, गाटम में जेसीबी मशीन को आग के हवाले करने, कड़मपाल में वाहनों को आग लगाने, गढ़मिरी-धनीकरका के बीच सड़क काटने, एस्सार पाइप लाइन क्षतिग्रस्त करने, मलांगिर में कैंपर जलाए, डिपाॅजिट-13 में जीप जलाने का प्रयास भी नक्सलियों ने किया।

दरभा डिवीजन का प्रभारी लीड कर रहा था बंद की रणनीति

पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद हर बार नाकामयाब होने वाले नक्सली इस बार अपने बंद को सफल बनाने बेंगपाल में बैठकर रणनीति बना रहे थे। इसे सफल बनाने खुद दरभा डिवीजन का प्रभारी व दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य चैतू व दरभा डिवीजन का सदस्य, मलांगिर एरिया कमेटी का प्रभारी विनोद कमान संभाले हुए था।

यहीं से मजबूत रणनीति बनाकर वाहनों में आगजनी, रेलवे पटरी उखाड़ने, एस्सार पाइप लाइन को क्षतिग्रस्त करने, पूरे क्षेत्र में दहशत फैलाने की घटना को नक्सली अंजाम दे रहे थे। नक्सलियों ने जवानों को अपने एंबुश में फंसाने ठोस रणनीति भी तय कर रखी थी लेकिन जवानों की सूझबूझ से नक्सलियों को ही मुंह की खानी पड़ गई। एएसपी गोरखनाथ बघेल ने बताया कि पुलिस के बढ़ते दबाव से हर बार बंद के दौरान नक्सली किसी भी घटना को अंजाम देने असफल हो जाते हैं जिससे पूरी तरह बौखला गए हैं।

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