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दंतेवाड़ा में जरूरी चीजों के लिये भटके, कोंडागांव में पेयजल सप्लाई ठप

एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में भारत बंद का जिले में व्यापक असर रहा। संयुक्त मोर्चा के...

Danik Bhaskar | Apr 03, 2018, 02:10 AM IST
एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में भारत बंद का जिले में व्यापक असर रहा। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सभी ब्लॉक मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन किया गया। यात्री परिवहन और मेडिकल स्टोर्स जैसी आवश्यक सेवाओं को इस बंद से मुक्त रखा गया, लेकिन छोटी-बड़ी दुकानों के अलावा होटल व गुमटियां तक बंद रहने से लोग चाय-पानी तक को तरसते रहे। दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय समेत, गीदम, बचेली, किरंदुल, नकुलनार, भांसी, कटेकल्याण भी पूरी तरह से बंद रहे।

सुकमा में बंद का मिलाजुला असर रहा, रैली निकाल धरना प्रदर्शन किया : सुकमा।अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के विरोध में बंद का सुकमा में मिला-जुला असर रहा कुछ घंटे के लिए व्यापारिक प्रष्ठिान बंद थी तो दुसरी और साप्ताहिक बाजार भी लग गया था।

सर्व आदिवासी समाज और अनुसूचित जाति समाज के द्वारा रैली निकाली गई और धरना प्रदर्शन किया गया। जिसको समर्थन देने कांग्रेस के विधायक व सीपीआई के नेता भी पहुंचे। विधायक कवासी लखमा ने भी राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन एसडीएम को दिया। जिसमें इस फैसले को खारिज करने की बात लिखी गई है।

आदिवासी समाज के लोगों को संबोधित करते कोया समाज के बल्लू भवानी

फरसगांव में साप्ताहिक बाजार बंद करवा दिया

फरसगांव |
बंद के समर्थन में सोमवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार को भी बंद करवा दिया गया।दोपहर 12 बजे अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय के लोगों ने गोंडवाना समाज से एक रैली निकालकर तहसील कार्यालय में तहसीलदार के समक्ष एक ज्ञापन सौंपा।

किरंदुल में बंद का मिला जुला असर

किरंदुल/बचेली |
किरंदुल में बंद का मिला जुला असर ही देखने को मिला। 20 से 25 की संख्या में लोग जबरन दुकानें बंद करवाते नजर आय। छोटे व्यापारियों में इस बंद को लेकर नाराज़गी भी दिखी। बचेली में बंद को व्यापारियों का पूरा सहयोग मिला।

कोंडागांव में असर नहीं, व्यापारियों ने नहीं दिया समर्थन

कोण्डागांव |
सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले के विरोध में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों ने नगर बंद कराने की कोशिश की। लेकिन उनकी अपील को व्यापरियों ने नकार दिया। बंद के चलते कर्मचारियों ने पानी की सप्लाई कुछ देर के लिए बंद की थी। जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। इसके अलावा सरकारी अधिकारियों व कर्मचरियों के धरना- प्रदर्शन में शामिल होने से कार्यालय खाली रहे।