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जमीन वापसी आंदोलन को नहीं मिला दलों का समर्थन

टाटा ने हमारी जमीन को जिला प्रशासन के साथ मिलकर ले लिया था, लेकिन वहां उद्योग लगाने में सफल नहीं हो पाया है। उद्योग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 04, 2018, 04:15 AM IST

टाटा ने हमारी जमीन को जिला प्रशासन के साथ मिलकर ले लिया था, लेकिन वहां उद्योग लगाने में सफल नहीं हो पाया है। उद्योग का विरोध करने पर टाटा ने यहां पर अपना काम तो समेट लिया, लेकिन अब तक जमीन वापस नहीं की है। इसके चलते लोहांडीगुड़ा ब्लाक के करीब 500 से ज्यादा किसान अपनी जमीन पर खेती नहीं कर पा रहे हैं। यह बात शनिवार को हड़ताल में शामिल होने के लिए पहुंची मनकी, सुखदई, तुला, लच्छनदई, जयती, दयमती, सोनधर, बुदरू और अन्य किसानों ने कही।

किसानों ने कहा कि उनकी जमीन वापसी की मांग का समर्थन बीजेपी को छोड़ अन्य राजनीतिक पार्टियां करेंगी, ऐसी उम्मीद थी लेकिन धरना प्रदर्शन के दो दिन होने के बाद भी अब तक किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता यहां पर समर्थन के लिए नहीं पहुंचे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि पिछले कुछ सालों से जब भी बीजेपी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया जाता था तो सबसे पहले इसका समर्थन करने कांग्रेस पार्टी के नेता वहां पर पहुंचते थे, लेकिन हमारी मांगों का समर्थन करने के लिए कोई नहीं आया है। ग्रामीणाें ने जिला प्रशासन पर अाराेप लगाते हुए कहा कि जब टाटा को जमीन लेनी थी तो पूरा जिला प्रशासन लगा हुआ था, पर अब टाटा ने यहां से अपना काम समेट लिया तो भी जिला प्रशासन का कोई अधिकारी इस मामले पर बातचीत नहीं कर रहा है । आदिवासी महासभा के सदस्यों ने बताया कि रविवार को बचेली, किरंदुल और दंतेवाड़ा से मजदूर संगठन से जुड़े लोग इस धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आएंगे।

जगदलपुर. हाता ग्राउंड में धरना प्रदर्शन में बैठे लोहांडीगुड़ा ब्लाक के ग्रामीण।

अलग-अलग गांव के लोग हो रहे शामिल

धरना प्रदर्शन में शामिल होने ग्रामीणों को कोई परेशानी न हो इसलिए आदिवासी महासभा ने दो गाड़ियों की व्यवस्था की है। इसमें हर दिन में ग्रामीणों को लाने ले जाने की व्यवस्था की गई है। आदिवासी महासभा के जिला सचिव मंगलराम ने बताया कि लोहांडीगुड़ा ब्लाक की 10 पंचायतों के ग्रामीण इस धरना में शामिल हो रहे हैं। जमीन वापसी की मांग के लिए किया जा रहा यह धरना प्रदर्शन का असर आर्थिक रूप से ग्रामीणों को न हो इसलिए हर दिन अलग-अलग गांव के लोग शामिल हो रहे हैं। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

10 दिनों में मांग पूरी न हुई तो बेमुद्दत आंदोलन

जमीन वापसी की मांग के साथ ही अन्य चार मांगों को लेकर किए जा रहे धरना प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि जिला प्रशासन को उनकी मांगों को पूरा करने के लिए 10 दिनाें का समय दिया गया है। इसके बाद भी यदि उनकी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल की जाएगी। इस दौरान होने वाले किसी भी हादसे की जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।

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