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दो साल बाद भी साप्ताहिक बाजारों की सुरक्षा के लिए नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे

करीब दो साल की खामोशी के बाद दंतेवाड़ा के साप्ताहिक बाजारों को एक बार फिर नक्सलियों ने टारगेट बनाना शुरू कर दिया...

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2018, 01:20 PM IST
करीब दो साल की खामोशी के बाद दंतेवाड़ा के साप्ताहिक बाजारों को एक बार फिर नक्सलियों ने टारगेट बनाना शुरू कर दिया है। हफ्तेभर के अंदर दो अलग-अलग बाजारों में दो घटनाओं को नक्सली अंजाम दे चुके हैं। 2015 में तुमनार में व्यापारी पर हुए हमले के बाद हाट-बाजारों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय जिला प्रशासन ने लिया था, लेकिन अब तक नहीं लगाए गए हैं। सूत्र यह बताते हैं कि साप्ताहिक बाजार में नक्सली किसी भी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में इन बाजारों में सुरक्षा के लिए पुलिस को विशेष तौर पर रणनीति बनाने की जरूरत है।

20 जनवरी को तुमनार साप्ताहिक बाजार में आईईडी विस्फोट के ठीक 7 दिन बाद नकुलनार में साप्ताहिक बाजार के पास स्थित कांग्रेसी नेता अवधेश गौतम के सुरक्षा कर्मी पर नक्सलियों ने हमला किया। एएसपी गोरखनाथ बघेल ने बताया कि साप्ताहिक बाजारों में सुरक्षा को लेकर विशेष तौर पर रणनीति बनाई जा रही है।

2015 में कैमरे लगाने का लिया था निर्णय

जिले में 20 से ज्यादा गांवों में साप्ताहिक बाजार लगता है। 2015 में तुमनार में व्यापारी पर हुए हमले के बाद हाट-बाजारों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय जिला प्रशासन द्वारा लिया गया था, लेकिन अब तक प्रमुख बाजारों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए हैं। हालांकि इन दो सालों में बाजार में एक भी घटना घटित नहीं हुई।

बाजार से ही 12 नक्सलियों की गिरफ्तारियां हुई

साप्ताहिक बाजारों में ग्रामीण वेशभूषा में पहुंचे नक्सली न केवल पुलिस की रेकी करते हैं, बल्कि साधारण वेशभूषा में पुलिस के कर्मी भी संदिग्धों पर निगरानी रखते हैं। वजह यही है कि अब तक हुई नक्सलियों की गिरफ्तारियों में करीब 12 नक्सली साप्ताहिक बाजारों से ही दबोचे गए हैं। इनमें गीदम, पालनार, कटेकल्याण, नकुलनार व बारसूर से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई है।

तुमनार बाजार में 20 जनवरी को इसी पेड़ के पास नक्सलियों ने ब्लास्ट किया था।

इन बाजारों में हो चुकी है वारदात

जिले में पिछले डेढ़ दशक में तुमनार साप्ताहिक बाजार में 10 से ज्यादा लोगों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतारा है। इसी बाजार में आगजनी, विस्फोट जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया है। साल 2005 में गांव के सचिव अशोक सोरी की हत्या के बाद दो साल तक दहशत के चलते व्यापारियों के नहीं जाने पर यह बाजार बंद था। ग्रामीणों की मांग पर इसे फिर से शुरू किया गया। साल 2015 में इसी बाजार में गीदम के व्यापारी संतोष गुप्ता की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। इसके अलावा पालनार में भी गीदम के सराफा व्यापारी पर नक्सलियों ने धारदार हथियार से हमला किया था। बचेली, कटेकल्याण, भांसी, किरंदुल में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों में भी नक्सली जवानों पर हमला कर चुके हैं।

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