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40 दिनों के चालीसा काल के बाद आज मनेगा ईस्टर

ख्रीस्तीय विश्वास के अनुसार चालीसा काल, इस्टर व पास्का पर्व के पहले के समय को कहा जाता है। चालीसा काल राख बुधवार से...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:00 AM IST
40 दिनों के चालीसा काल के बाद आज मनेगा ईस्टर
ख्रीस्तीय विश्वास के अनुसार चालीसा काल, इस्टर व पास्का पर्व के पहले के समय को कहा जाता है। चालीसा काल राख बुधवार से शुरू होता है। राख बुधवार के दिन सभी मसीह समुदाय माथे पर राख का लेप लगते है जो अपने गलतियों के प्रायश्चित का प्रतीक माना जाता है।

चालीसा काल का यह समय पास्का मनाने के पहले मनन चिंतन और प्रायश्चित और आध्यात्मिक तैयारी का समय होता है। पवित्र बाइबिल के अनुसार ईसा मसीह चालीस दिन और चालीस रात मरुस्थल में रह कर प्रार्थना और उपवास किए। इसी घटना का अनुकरण सभी मसीह भाई चालीसा काल में करते है। यह भी माना गया है कि यहूदी लोग 40 साल तक मरू भूमि में प्रतिज्ञात देश पहुंचने के पहले बिताए। नबी मूसा भी 40 दिनों तक मरू भूमि में रहकर उपवास किया ईश्वर से दस आज्ञा पाने के पूर्व। इसी के उपलक्ष्य में ईसाई समुदाय चालीसा काल का स्मरण करते है और अपने जीवन में प्रार्थनाएं उपवास और प्रायश्चित करके इस्टर व पास्का पर्व मनाने हैं।

इसी चालीसा काल याने 40 दिन में लगभग सात सप्ताह होते है, और सातवें सप्ताह को पवित्र सप्ताह माना जाता है, और पवित्र सप्ताह खजूर रविवार से शुरू होता है। इस्टर के दिन ईसाई समुदाय का विश्वास है कि येसु मसीह जो मर गये थे तीन दिन के बाद जी उठे। इसी विशेष घटना के स्मरण में भक्त रात्रि जागरण कर जलती हुए मोमबत्ती लेकर इस त्योहार को बड़े हर्ष और उल्लास से मनाते हैं।

उत्सव

ईसा मसीह चालीस दिन और चालीस रात मरुस्थल में रह कर की थी प्रार्थना और उपवास

40 दिन में लगभग सात सप्ताह में सातवें सप्ताह को माना जाता है पवित्र सप्ताह

प्रभु यीसु मसीह के प्रार्थना सभा में उपस्थित समाज के सदस्य।

खजूर रविवार या खजूर पर्व

खजूर रविवार या खजूर पर्व मनाने का आशय यह है कि ईसा मसीह जब एक राजा के रूप में येरूसलेम कि ओर प्रस्थान किए तो उनके अनुयायियों ने उनका आदर एवं सम्मान से स्वागत किए। गरीब लोगों ने खजूर की डाला बिछा कर और धनी लोग राह पर कपड़ा बिछा कर उसका अभिनंदन किए थे। इस महान घटना को खजूर पर्व के रूप में ईसाई समुदाय मनाते है। इस दिन भक्त आपने साथ खजूर की डाली ले कर प्रार्थना के लिए चर्च आते है और पूजा के पहले जुलूस निकालते हैं।

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40 दिनों के चालीसा काल के बाद आज मनेगा ईस्टर
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