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अवैध प्लाटिंग और काॅलोनी पर लगेगी रोक, टी एंड सीपी से ले-आउट पास कराए बगैर नहीं होगी रजिस्ट्री

अवैध प्लाटिंग पर कड़ाई से रोक लगाने अब शासन ने नया आदेश जारी किया है। लेआउट स्वीकृत कराए बगैर जमीन पर प्लाटिंग नहीं...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 05, 2018, 02:00 AM IST

अवैध प्लाटिंग और काॅलोनी पर लगेगी रोक, टी एंड सीपी से ले-आउट पास कराए बगैर नहीं होगी रजिस्ट्री
अवैध प्लाटिंग पर कड़ाई से रोक लगाने अब शासन ने नया आदेश जारी किया है। लेआउट स्वीकृत कराए बगैर जमीन पर प्लाटिंग नहीं हो पाएगी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से लेआउट अप्रूवल की कापी के आधार पर ही जमीन की रजिस्ट्री होगी। इसके बाद ही मकान बनाने का काम शुरू हो सकेगा। इससे न सिर्फ कालोनियों के नाम पर प्लाटिंग करने वालों पर अंकुश लगेगा बल्कि सीधे जमीन खरीदने वाले ठगी के शिकार होने से बच सकेंगे।

गौरतलब है कि पहले भी बिना ले-आउट के रजिस्ट्री का प्रावधान नहीं था लेकिन कुछ लोग रजिस्ट्री कार्यालय में गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री करा लेते थे। अब शासन की नई गाइडलाइन से इस प्रकार की खरीदी बिक्री पर रोक लगेगी। इस आदेश के लागू होने पर अपनी जमा पूंजी खर्च कर घर बनाने का सपना देखने या निवेश करने वालों के साथ धोखाधड़ी करना आसान नहीं रहेगा। शहर में 4 से अधिक अवैध कालोनियां हैं। जहां बगैर लेआउट पास कराए टुकड़ों में जमीन बेची जा रही है। एेसी कालोनियों मंे न तो सड़क बनाई जाती है, न ही पानी बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाती है। अवैध कालोनी बनाने वाले ओपन एरिया भी नहीं छोड़ते हैं।

अभी कॉलोनियों में नाली, रोड, पानी व गार्डन जैसी सुविधाएं नहीं मिलती

अवैध कालोनाइजर लोगों से वादे करके प्लाट और मकान बेच देते हैं। बाद में लोग परेशान होते हैं।

नए नियम से सीधे आम लोगों को होगा फायदा

ले-आउट अप्रूव कराए बगैर अवैध प्लाटिंग करने वाले भूमाफिया प्लाट को कम रेट में बेंच देते थे। कम कीमत पर जमीन खरीदने वाले अधिकांश लोगों को यह पता नहीं रहता है कि प्लाट वैध है या अवैध। नगरीय निकाय बिना लेआउट अप्रूव कराई गई जमीन पर मकान बनाने की अनुमति नहीं देता। मकान बनाने के लिए नगरीय निकाय के चक्कर काटने पर लोगों को गलती का पता चलता था। नए नियम से आम लोगों को काॅलोनाइजरों की ठगी से राहत मिल जाएगी।

अप्रूवल कराने अब छोड़ना होगा 55 फीसदी जमीन

जमीन की प्लाटिंग करने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से लेआउट अप्रूव कराना जरूरी है। अप्रूवल के लिए सड़क, नाली, गार्डन के लिए 55 प्रतिशत जमीन रिजर्व रखनी पड़ती है। बाकी बची 45 प्रतिशत जमीन पर ही प्लाटिंग करके बेचा जा सकता है। जबकि कालोनाइजर 15 प्रतिशत भू-खंड छोड़कर प्लाटिंग कर देते हैं।

जेल की जमीन पर कब्जा

राज्य सरकार ने जिला जेल बैकुंठपुर को 35.88 एकड़ जमीन का आवंटन किया था। इसमंे से प्रेमाबाग की आवंटित 4.63 एकड़ जमीन गायब हो गई। जेल प्रशासन के पास गायब हुई जमीन का रिकार्ड तो है लेकिन जमीन के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है गायब हुए जमीन में निजी और सरकारी मकान बना लिए गए हंै। वहीं जेल बगीचा के लिए आंवटित 15.68 एकड़ जमीन के अधिकांश भाग में कब्जा हो गया।

ये होगा लोगों को फायदा

ले-आउट अप्रूवल होने पर प्लाट की बिक्री होने पर उस एरिया में चौड़ी सड़क, गार्डन और ड्रेनेज सिस्टम का प्रावधान नियमानूसार किया जाएगा। अभी सड़क की जमीन भी भूमाफिया बेच देते थे।

शासन को पीएम आवास के लिए ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए पर्याप्त जमीन मिलेगी। अभी तक ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 15 प्रतिशत जमीन छोड़े बगैर ही पूरी जमीन बेच दी जाती थी।

ले-आउट एप्रूवल होने पर बिल्डिंग के लिए अनुमति आसानी से मिलेगी। एप्रूव न होने के कारण नगरीय निकाय से अनुमति नहीं मिलती थी। लोगों के लिए राहत वाली बात है।

लोगों को इसके लिए चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे।

नियमों में फेरबदल हो गया अभी तक आदेश नहीं मिला

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के सहायक संचालक एएस. कंवर ने बताया कि जमीन खरीदी-बिक्री को लेकर नियमों में फेर बदल किया गया है। इसकी जानकारी मिली है लेकिन यह आदेश कब से लागू होगा, इस बारें में कोई लिखित आदेश हमारे पास अभी नहीं आया है।

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