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गांव के 3 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ खतरे में 2652 मितानिन के पास दवाएं व मलेरिया किट नहीं

बारिश शुरू होने के साथ ही जिले में लोग मौसमी बीमारी की चपेट में है। इन दिनों प्रति दिन 450- 500 के बीच ओपीडी सिर्फ जिला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:00 AM IST

  • गांव के 3 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ खतरे में 2652 मितानिन के पास दवाएं व मलेरिया किट नहीं
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    बारिश शुरू होने के साथ ही जिले में लोग मौसमी बीमारी की चपेट में है। इन दिनों प्रति दिन 450- 500 के बीच ओपीडी सिर्फ जिला अस्पताल में हो रही है। इसके अलाव करीब 150 से अधिक मरीजों को एडमिट कर इलाज किया जा रहा है। इन समस्या के अलावा एक सबसे बड़ी समस्या यह है अस्पताल में दवाओं का टोटा है।

    दवाओं की कमी से सबसे बुरा हाल ग्रामीण इलाकों का है। जहां पर मितानिनों को पास ग्रामीणों के इलाज के लिए जरूरी दवाएं तक नहीं है। बताया जा रहा है कि सीजीएमएसी से ही सप्लाई बंद है। यही वजह है कि ग्रामीण शहरों में आकर 100 रुपए खर्च कर निजी पैथोलॉजी लैब में मलेरिया की जांच करा रहे हैं। जिला अस्पताल में जून लेकर से जुलाई तक 2 मलेरिया सहित एक डेंगू मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि इस बीच जून और जुलाई माह में 590 मलेरिया के जांच में दो मरीज मलेरिया पॉजीटिव और 359 टायफॉयड की जांच में टॉयफॉयड के 28 मरीज पॉजिटिव मिले। ये सिर्फ शहरी क्षेत्र के आंकड़े हैं। क्योंकि जिले के पांच ब्लाक की 2652 मितानिनों के हाथ करीब 3 लाख ग्रामीण मरीजों के इलाज का जिम्मा है।

    दवा नहीं होने से पहुंच विहीन गांवों में हो सकती है परेशानी, मितानिन के पास सिर्फ दो-तीन दिन की दवा

    अस्पताल में बढ़ने लगी मरीजों की भीड़, मुफ्त दवा नहीं मिलने बढ़ रही है परेशानी लैब के सामने लिए अपनी बारी का इंतजार करती हुई महिलाएं।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल में उपलब्ध कुछ दवाओं का वितरण मितानिनों को किया जा रहा है। जिससे अस्पताल में भी दवाओं की कमी होने लगी। इसका फायदा मेडिकल स्टोर संचालकों को मिल रहा है। दूसरी और बारिश के आने से पहले ही दूर दराज के पहुंच विहीन ग्रामीण इलाकों में दवा सहित मलेरिया किट उपलब्ध करा देना चाहिए था। क्योंकि भरतपुर-सोनहत ब्लाक में दर्जनों गांव ऐसे है, जो बारिश के दिनों में मुख्य मार्ग से कट जाते हैं।

    पहुंच विहीन गावं में भी अब तक नहीं पहुंची दवा

    पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो 1 जनवरी से 12 अगस्त तक केवल जिला अस्पताल में लगभग 83,678 लोगों के खून की जांच की गई है। इनमें से 1885 लोगों के मलेरिया से पीड़ित होने की पुष्टि हुई थी। जबकि इसमें अन्य अस्पतालों के मरीज शामिल नहीं हैं। मलेरिया से निपटने अब तक ग्रामीण इलाकों में दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सेकंड राउंड का डीडीटी पावडर का छिड़काव शुरू कराया जाएगा।

    पिछले साल 1885 को हुआ था मलेरिया

    मलेरिया विभाग ने ग्रामीण इलाकों में इस साल दो लाख मच्छरदानी वितरण करने का दावा किया है। लेकिन इधर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और दवा की कमी भी बनी हुई है। सरकार मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने प्रचार कार्यक्रम कागजों पर ही चल रहा है। जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों भीड़ देकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण इलाकों में बीमारी से निपटने क्या तैयारी की गई है।

    दो लाख परिवार को मच्छरदानी बांटने का दावा

    सीएमएचओ डाॅ. एसएस पैंकरा ने बताया कि जबसे सीजीएमएसी से दवा सप्लाई शुरू हुआ है, तब से इस प्रकार कि दिक्कतें सामने आ रहा है। अस्पताल में जरूरत के मुताबिक पर्याप्त दवा नहीं आ रही है। अभी हमारे पास जो दवाएं हैं, उसी से काम चला रहे है। लेकिन सच्चाई यह है कि दवाओं का शॉर्टेज है। वहीं मलेरिया के रोकथाम के लिए एक राउंड दवाओं का छिड़काव कर दिया गया है। दूसरा राउंड जल्द ही शुरू होने वाला है।

    अफसरे बोले-सीजीएमएसी से दवाओं की सप्लाई बंद

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