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पुरुषोत्तम मास में होगी पूजा, रमजान में रखेंगे रोजे, दोनों माह एक साथ

भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर विरोधकृत नामक नवसंवत्सर 2075 प्रारंभ हो चुका है। इस नवीन संवत्सर में अधिक मास रहेगा।...

Dainik Bhaskar

Apr 30, 2018, 02:00 AM IST
भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर

विरोधकृत नामक नवसंवत्सर 2075 प्रारंभ हो चुका है। इस नवीन संवत्सर में अधिक मास रहेगा। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है जब हिन्दी कैलेण्डर में पंचांग की गणनानुसार 1 मास अधिक होता है तब उसे अधिक मास कहा जाता है। हिन्दू शास्त्रों में अधिक मास को बड़ा ही पवित्र माना गया है, इसलिए अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। पुरुषोत्तम मास अर्थात् भगवान पुरुषोत्तम का मास। शास्त्रों के अनुसार अधिक मास में व्रत पारायण करना, पवित्र नदियों में स्नान करना एवं तीर्थ स्थानों की यात्रा का बहुत पुण्यप्रद होती है। इस बार मई में दो धर्मों के त्योहार एक साथ मनाए जाएंगे। तीन साल बाद ज्येष्ठ माह में हिंदुओं का पवित्र त्योहार अधिक मास 16 मई से शुरू हो रहा है। मुस्लिमों का रमजान 17 मई से शुरू होगा। इस वर्ष अधिक मास प्रारंभ होने के एक दिन बाद से रमजान शुरू हो रहे हैं। 10 साल बाद पूजा व इबादत के इस संयोग में दोनों धर्म के लोग एक साथ अपने-अपने पर्व मनाएंगे। इससे पहले साल 2008 में अधिक मास और रमजान एक साथ आए थे। हिंदू धर्म के लोग मंदिरों, आश्रमों में पूजा, पाठ, जप, अनुष्ठान व कथा-प्रवचन करेंगे। रमजान में नमाज व इबादत के साथ रोजे रखकर दुआ मांगने का दौर चलेगा। अधिक मास 16 मई से 14 जून तक चलेगा। रमजान माह में चांद दिखने पर 17 मई से शुरू होगा जो एक माह तक चलेगा। पं. नित्यानंद महाराज ने बताया कि अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। 2015 में आषाढ़ में अधिक मास आया था। इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास रहेगा। उन्होंने बताया 1 मई से 15 मई तक ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष में रहेगा। यह 15 दिन विशेष होते हैं। फिर 16 मई से अधिक मास शुरू हो जाएगा। 14 से 28 जून तक शुक्ल पक्ष में ज्येष्ठ माह रहेगा।

चांद दिखते ही रमजान होगा शुरू

मुस्लिम त्योहार कमेटी के मो.रफीक ने बताया कि रमजान माह की शुरुआत चांद देखने के साथ मानी जाती है। कुछ वर्ष के अंतराल में माह शुरू होने के दिन कभी घटते तो कभी बढ़ते हैं। वर्ष 2014 से 2016 तक रमजान जून माह में आया था। पर इस बार अधिक मास के 1 दिन बाद 17 मई को शुरू होगा। यदि 16 मई को चांद दिखता है तो मस्जिदों में तराबीह की नमाज अदा कर रमजान शुरू किए जाएंगे। दोनों त्योहार एक माह तक चलते हैं, जो इस बार एक साथ मनाए जाएंगे। भागवत, स्नान, दान, पूजन आदि का अधिक महत्व माना जाता है। यह माह हिंदुओं का पवित्र त्योहार होता है। पूजा पाठ करने से कई गुना फल प्राप्त होता है। इस्लाम की बुनियाद में चार अरकान हैं, इनमें से एक अरकान रोजा रखना होता है। एक माह का रोजा मुसलमान को सब्र सिखाता है। रोजे की 26 वीं रात शबे कद्र कहलाती है।

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