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सरकारी डॉक्टरों पर नकेल की तैयारी, प्राइवेट प्रैक्टिस की तो देना पड़ेगी फीस की रसीद

भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर अब आप जिले के किसी सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज कराने जाएंगे,...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 02:00 AM IST

सरकारी डॉक्टरों पर नकेल की तैयारी, प्राइवेट प्रैक्टिस की तो देना पड़ेगी फीस की रसीद
भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर

अब आप जिले के किसी सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज कराने जाएंगे, तो डॉक्टर को इलाज के बदले ली गई फीस की रसीद भी देनी होगी। यह रसीद क्लीनिक में सामान्य चेकअप करवाने के बाद भी दी जाएगी। इतना ही नहीं क्लीनिक या हॉस्पिटल के बाहर डॉक्टर को इलाज के बदले ली जाने वाली फीस और क्लीनिक या हॉस्पिटल के संचालन का समय भी लिखना होगा। सरकारी हॉस्पिटल में नौकरी के साथ निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए शासन ने कई संशोधित नियम जारी कर दिए है। सरकारी हॉस्पिटल में नौकरी करते हुए अच्छा-खास वेतन लेने के बाद भी निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की काफी शिकायतें मिल रही थीं। इसमें निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने, बाहर से जांच करवाने और कई बार मरीजों की जान पर बन आने जैसे मामले शामिल थे। बिलासपुर हाईकोर्ट में ऐसे ही एक केस में पीआईएल लगाई गई थी। हाईकोर्ट के आदेश को देखते हुए सरकार ने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर शिकंजा कसा है। 1 मई को सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में पुरानी व्यवस्था में कई तरह के संशोधन किए गए हैं। इससे पहले सरकारी हॉस्पिटल और कॉलेजों में काम करने वाले डॉक्टर ड्यूटी के दौरान भी मिलने वाले ब्रेक में निजी क्लीनिक व हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर लिया करते थे। इतना ही नहीं कई प्राइवेट हॉस्पिटल में जाकर भी वे इलाज भी करते थे। हॉस्पिटलों के प्रशासकीय पद पर बैठे डॉक्टर भी प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे थे। सभी डॉक्टरों के क्लीनिक के खुलने और बंद होने का समय तय नहीं था। मरीज की बीमारी और हैसियत के हिसाब से मनमाने पैसे वसूले जा रहे थे।

अभी कहीं भी डॉक्टर फीस की रसीद मरीजों को नहीं देते

निजी क्लीनिक पर मरीजों का इलाज करते हुए डॉक्टर।

सख्ती से ही मरीजों को होगा फायदा:नए नियमों को सख्ती के साथ लागू किया गया, तो इसका मरीजों को सीधा फायदा होगा। क्लीनिकों और निजी हॉस्पिटलों में इलाज के बदले ली जाने वाली फीस का साफ उल्लेख होगा। चूंकि डॉक्टरों को मरीज का ट्रीटमेंट भी सरकार को दिखाना पड़ेगा ऐसे में लाइन ऑफ ट्रीटमेंट से हटकर कमीशन के चक्कर में दीगर जांच डॉक्टर नहीं करवा पाएंगे। इसके अलावा ऐसा माना जा रहा है कि अब निगरानी के कारण सरकारी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की हाजिरी ज्यादा दिखेगी। वैसे इसमें ये भी मायने रखता है कि सरकार डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर किस तरह नजर रख पाती है।

भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर

अब आप जिले के किसी सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज कराने जाएंगे, तो डॉक्टर को इलाज के बदले ली गई फीस की रसीद भी देनी होगी। यह रसीद क्लीनिक में सामान्य चेकअप करवाने के बाद भी दी जाएगी। इतना ही नहीं क्लीनिक या हॉस्पिटल के बाहर डॉक्टर को इलाज के बदले ली जाने वाली फीस और क्लीनिक या हॉस्पिटल के संचालन का समय भी लिखना होगा। सरकारी हॉस्पिटल में नौकरी के साथ निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए शासन ने कई संशोधित नियम जारी कर दिए है। सरकारी हॉस्पिटल में नौकरी करते हुए अच्छा-खास वेतन लेने के बाद भी निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की काफी शिकायतें मिल रही थीं। इसमें निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने, बाहर से जांच करवाने और कई बार मरीजों की जान पर बन आने जैसे मामले शामिल थे। बिलासपुर हाईकोर्ट में ऐसे ही एक केस में पीआईएल लगाई गई थी। हाईकोर्ट के आदेश को देखते हुए सरकार ने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर शिकंजा कसा है। 1 मई को सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में पुरानी व्यवस्था में कई तरह के संशोधन किए गए हैं। इससे पहले सरकारी हॉस्पिटल और कॉलेजों में काम करने वाले डॉक्टर ड्यूटी के दौरान भी मिलने वाले ब्रेक में निजी क्लीनिक व हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर लिया करते थे। इतना ही नहीं कई प्राइवेट हॉस्पिटल में जाकर भी वे इलाज भी करते थे। हॉस्पिटलों के प्रशासकीय पद पर बैठे डॉक्टर भी प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे थे। सभी डॉक्टरों के क्लीनिक के खुलने और बंद होने का समय तय नहीं था। मरीज की बीमारी और हैसियत के हिसाब से मनमाने पैसे वसूले जा रहे थे।

सरकार ने पुनरीक्षित आदेश में डॉक्टरों पर एेसे कसी है नकेल

कोई भी सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं करेगा, अगर बेहद जरूरी है तो मेडिकल कॉलेज के डीन, प्राचार्य या किसी बड़े अफसर को लिखित जानकारी देकर अनुमति मांगना होगी।

चिकित्सा शिक्षक अपनी ड्यूटी टाइम के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस कर पाएंगे। जितना समय ड्यूटी के लिए निर्धारित किया गया है उस दौरान उन्हें वहां मौजूद रहना पड़ेगा।

आपात स्थिति में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर को प्राइवेट क्लीनिक या हॉस्पिटल छोड़कर ड्यूटी पर आना पड़ेगा।

प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर दिन में तीन घंटे ही कहीं और अपनी सेवाएं दे पाएंगे। छुट्टी के दिन वे 5 घंटे प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं।

सरकारी हॉस्पिटल में आए किसी भी मरीज को डॉक्टर अपने निजी क्लीनिक का पता नहीं बताएंगे।

डॉक्टरों को ये बताना होगा कि प्राइवेट प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने कितने मरीजों का इलाज किया, किस बीमारी के लिए कौन-सी दवा दी और बदले में कितनी फीस ली। मरीज को रसीद देने के साथ इसका रिकॉर्ड भी रखना होगा।

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