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परिवार की सुख समृद्धि व अखंड सुहाग की कामना के लिए महिलाओं ने की वटवृक्ष पूजा

जिला मुख्यालय बैकुंठपुर समेत चिरमिरी व मनेन्द्रगढ़ में सभी शहरी व ग्रामीण इलाकों में वट सावित्री का पर्व धूमधाम...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 16, 2018, 02:00 AM IST

परिवार की सुख समृद्धि व अखंड सुहाग की कामना के लिए महिलाओं ने की वटवृक्ष पूजा
जिला मुख्यालय बैकुंठपुर समेत चिरमिरी व मनेन्द्रगढ़ में सभी शहरी व ग्रामीण इलाकों में वट सावित्री का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे पहुंचकर अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पूजा-अर्चना की और वटवृक्ष की पूजा-अर्चना कर उसकी परिक्रमा की।

वट सावित्री व्रत हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है जिसे सौभाग्य और संतान की प्राप्ति के लिए किया जाता है। वट सावित्री व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और संतान के कुशल भविष्य के लिए रखती हंै। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को पड़ने वाले इस व्रत में सभी सुहागन महिलाएं वटवृक्ष यानी बरगद के पेड़ का पूजन कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। इसे वरदगाई भी कहा जाता है। बैकुंठपुर के कचहरीपारा, तलवापारा, बाजारपारा, भट्टीपारा, रामपुर स्थानों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होने लगी थी। महिलाओं ने भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। माना जाता है इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यभान के प्राण यमराज से भी वापस ले लिए थे। तभी इस इस दिन को वट सावित्री व्रत के रूप में पति की लंबी आयु के लिए मनाया जाता है।

वट वृक्ष की परिक्रमा कर सुनी कथा, दिन भर चलता रहा पूजा-अर्चना का सिलसिला

वटवृक्ष की परिक्रमा करतीं महिलाएं।

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की अमावस्या को पड़ता त्योहार

चिरमिरी| पति की लंबी उम्र की प्रार्थना तथा सदा सुहागन रहने के संकल्प के साथ मंगलवार को को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत रखा। सुबह 7 बजे से ही महिलाओं ने वटवृक्ष के पास पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने 108 बार बरगद की परिक्रमा कर पूजा की। गोदरीपारा के गोरखनाथ मंदिर में, डोमनहिल संकट मोचन मंदिर, पोड़ी हनुमान मंदिर, हल्दीबाड़ी पंखा दफाई में महिलाओं ने पूजा की और वट वृक्ष की परिक्रमा की। इसके बाद घर पहुंचकर महिलाओं ने अपने पतियों की भी पूजा की। ले लिया था। शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की अमावस्या तिथि को हर साल मनाया जाता है।

वटवृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

पटना| पति की लंबी उम्र की कामना के साथ सुहागिन महिलाओं ने रखा व्रत। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए जेष्ठ माह की कृष्ण पक्ष के दिन मंगलवार को महिलाओं ने रखा वट सावित्रि का व्रत। सुबह महिलाएं बरगद और पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना किए। महिलाओं ने बताया कि इस व्रत के पीछे सावित्री और सत्यवान की कथा है। पौराणिक मान्यता है कि इस वृक्ष में काफी शाखाएं लटकी हुई होती है जिन्हें सावित्री देवी का रूप माना जाता है। वट सावित्री व्रत को सावित्री ने अपने पति को पुनः जीवित करने के लिए किया था। उन्हीं की स्मृति में महिलाएं इस व्रत को मनाती हैं। वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता इसलिए वटवृक्ष का पूजा-अर्चना करने से दीर्घायु, अखंड सौभाग्य व अक्षय उन्नति की प्राप्ति होती है।

ऐसी मान्यता इस वृत से वैवाहिक जीवन सुखी रहता

पुराणों के अनुसार इस दिन सावित्री अपने पति सत्यभान के प्राण यमराज के यहां से वापस ले आई थी। इसीलिए बाद में उन्हें सती सावित्री कहा जाता है। इस व्रत का विवाहित स्त्रियों के लिए बड़ा खास महत्व होता है जिसे अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए रखा जाता है। माना जाता है इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में आने वाले सभी कष्ट दूर हो जाते है। और हमेशा सुख शांति बनी रहती है। इस व्रत में वट वृक्ष का बहुत खास महत्व होता है जिसका अर्थ है बरगद का पेड़। इस पेड़ में काफी शाखाएं लटकी हुई होती है जिन्हें सावित्री देवी का रूप माना जाता है।

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