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दो माह में 87 दुर्घटना, 24 की मौत 137 लोग घायल, हादसे रोकने में ट्रैफिक पुलिस नाकाम

Baikunthpur News - शादी के सीजन में नियमों को ताक पर रखकर बिना परमिट और मालवाहक गाडि़यों की आवाजाही बढ़ जाती है। गाडि़यों में सवारी...

Dainik Bhaskar

May 09, 2018, 02:05 AM IST
दो माह में 87 दुर्घटना, 24 की मौत 137 लोग घायल, हादसे रोकने में ट्रैफिक पुलिस नाकाम
शादी के सीजन में नियमों को ताक पर रखकर बिना परमिट और मालवाहक गाडि़यों की आवाजाही बढ़ जाती है। गाडि़यों में सवारी भरकर ज्यादा से ज्यादा बुकिंग कर कमाने के चक्कर में मालिक नियम नियमों को तोड़ते हैं। इस वजह से साल 2017 में 119 दुर्घटनाएं फरवरी से मई माह में हुई। जिसमें 43 लोगों की मौत हुई जबकि 152 लोग घायल हुए।

इन आंकड़ों से सबक लेकर इस साल हालात सुधारने परिवहन विभाग, यातायात और पुलिस विभाग को कड़े कदम उठाने चाहिए थे। जिससे लोगों की जान को बचाया जा सके और नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों और मालिकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी थी। लेकिन उसी गलती की पुनरावृत्ति इस साल भी देखने को मिली है। 2018 में जनवरी से मार्च माह में अब 87 दुर्घटनाएं हुई है। इमसें 24 लोगों की मौत होने के साथ 137 सवारी घायल हुए है। इनमें ज्यादातर वे वाहन शामिल हैं जो शादी में बारातियों को ढोते हैं। माल वाहक गाडि़यों में शादी के सीजन में बारातियों भर कर ढोया जाता है। इसमें पिकअप, ट्रैक्टर सहित टैक्सी का इस्तेमाल किया जाता है। लगातार दुर्घटना होने और इसे रोकने यातायात पुलिस द्वारा केवल औपचारिता निभाई जाती है।

दुर्घटना रोकने ट्रैफिक पुलिस निभाती है औपचारिकता, चालानी कार्रवाई भी साबित होती है सिर्फ दिखावा

शहर में ट्रैक्टर-ट्राली और लोडिंग वाहनों में बारात लेकर जाते हैं, लेकिन पुलिस अफसर कार्रवाई नहीं करते।

वाहन पकड़ते ही आ जाता है किसी नेता का फोन

पुलिस कार्रवाई तो करती है लेकिन सिर्फ नाम के लिए। क्योंकि वाहन खड़ा करते ही किसी न किसी नेता का फोन आ जाता है। एेसे में सड़कों पर होने वाली दुर्घटना रोकना मुश्किल है। बाराती अब भी जान जोखिम मंे डालकर माल वाहक वाहनों में सवारी करते हैं। इसके लिए साथ ही शादी का सीजन होने के कारण यात्री बस व टैक्सी में भी आेवरलोडिंग हो रही है।

निजी और लोडिंग वाहनों को किराए पर चलाते हैं

ट्रैफिक विभाग के अुनसार मालवाहक वाहन में सवारी बैठाने की अनुमति ही नहीं है। माल वाहक वाहन केवल सामग्री ढोने के लिए इस्तेमाल किया जा सकते हैं। इसी तरह बिना टैक्सी परमिट वाले निजी वाहन कार, स्कार्पियों, बोलेरो, कमांडर जीप में भी सवारी बैठाना नियमों को उल्लघंन हैं। इसके बाद भी वाहनों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करती है।

ट्रैफिक प्रभारी के बाेल- चकमा देकर भाग जाते हैं

यातायात प्राभारी बुद्धेश्वर सिंह ने बताया कि माल वाहन में बाराती ले जाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन वे यातायात और पुलिस विभाग को चकमा देकर ग्रामीण क्षेत्र के अंदरूनी रास्ते से निकल जाते हैं। जबकि जांच मुख्य मार्गाें की की जाती है। जहां पर चालान काटने के साथ उन्हें चेतावनी भी दी जाती है।

अफसरों के सामने से निकल जाते हैं वाहन

जिला मुख्यालय में हर रोज दर्जनों मालवाहक वाहनों में लोगों को भरकर पुलिस और यातायात अधिकारियों व कर्मयचारियों के सामने से गाड़ी गुजरती है। शहर से बाहर से सिर्फ चलानी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर दी जाती है। जबकि मालवाहक गाडि़यों मंे ओवरलोड सवारी भर तेज रफ्तार से निकल जाती है लेकिन माल वाहन में सवार बाराती पुलिस और यातायात कर्मचारियों के सामने से नियमों को तोड़ते हुए निकल जाते हैं। वहीं भी दिन दहाड़े और रोकने में पुलिस नाकाम नजर आती है। अपैल माह में शहर से एेसे सैकड़ों वाहन गुजरे कार्रवाई भी की गई। लेकिन सख्ती नहीं करने के कारण जिले में लगातार एेसे वाहन मालिकों के हौसले बुलंद है। दुर्घटना की बड़ी वजह यह भी है। शादी के सीजन में यात्री वाहन के अलावा मालवाहक गाडि़यों के मालिक भी बेलगाम हो गए हैं। बिना परमिट बड़े वाहनों मंे बारातियों को ढोया जा रहा है। इस मामले में जिले का परिवाहन विभाग खमोस है। उनकी आंखों के सामने से ऐसे वाहन निकल जाते हैं। बारात के लिए बुक किए जा रहे छोटे वाहनों के पास परमिट नहीं है। इन पर भी कार्रवाई नहीं होती।

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दो माह में 87 दुर्घटना, 24 की मौत 137 लोग घायल, हादसे रोकने में ट्रैफिक पुलिस नाकाम
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