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पाउच में बंद अमानक पानी बिगाड़ रहा लोगों की सेहत, जिले में रोजाना 500 बोरी की खपत

नगर समेत आसपास के ग्रामीण इलाके में बीते कई वर्षों से आरओ फिल्टर पानी के नाम पर लोगों को जमकर बेवकूफ बनाया जा रहा है...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 02:05 AM IST

पाउच में बंद अमानक पानी बिगाड़ रहा लोगों की सेहत, जिले में रोजाना 500 बोरी की खपत
नगर समेत आसपास के ग्रामीण इलाके में बीते कई वर्षों से आरओ फिल्टर पानी के नाम पर लोगों को जमकर बेवकूफ बनाया जा रहा है तथा उनसे रुपए ऐठे जा रहे हैं।

खुलेआम बिक रहे लोकल ब्रांड के पानी पाउच तथा बोतलबंद पानी में न तो शुद्धता का कोई पैमाना तय किया जाता है और न ही पैकिंग की कोई तिथि निर्धारित लिखी होती है। इसके चलते महीनों पहले से पैक पानी की बिक्री होती रहती है। खुलेआम बिक रहे इस तरह के पानी पाउच तथा बोतलबंद पानी की न तो कभी जांच की जाती है और ना ही इनके निर्माताओं पर कार्रवाई ही होती है। विदित हो कि 4-5 वर्ष पूर्व तक जिले में राष्ट्रीय स्तर के कुछ ही ब्रांड के पानी पाउच तथा बोतल मिलती थी जो अब धीरे-धीरे कम हो गई है। बीते तीन-चार सालों में लोकल ब्रांड के पानी पाउच की बाढ़ सी आ गयी है।

खुलेआम बिक रहे ये पानी पाउच सीधे-सीधे बीमारियों का घर हैं। पानी पाउच में इतनी अशुद्धियां होती हैं कि ये हैजा, पीलिया जैसी दर्जनों बीमारियों का कारण बनते हैं। व्यापारी से खरीदने के बाद स्थानीय रिटेलर द्वारा भी इनके रखरखाव को लेकर सावधानी नहीं बरती जाती तथा पानी पाउच के बोरों को फ्रीजर की बजाए दुकान के कोने में पटक दिया जाता है।

फूड सेफ्टी विभाग के अफसर नहीं करते कार्रवाई इसलिए गली-गली में खुल गईं पाउच की फैक्टरी

किसी नियम का पालन नहीं

नियमानुसार प्रत्येक पानी पाउच में पैकिंग की तिथि, पैकिंग समाप्ति की तिथि (एक्सपायरी डेट), आरओ तथा फिल्टर है या नहीं इसकी जानकारी, पानी में शुद्धता का मानक, पैकिंग नंबर, पैकिंग के स्थान का नाम व पता आदि जानकारी लिखना आवश्यक है जो बाजार में बिक रहे अधिकांश पानी पाउच में नहीं होती। शुद्धता का कोई पैमाना न होने की वजह से इन पाउच से मच्छर, कीड़े, कचरा निकलना साधारण बात हो गयी है।

अशुद्ध पानी बेखौफ बेच रहे

अधिकांश पाउच का पानी पंप से ही निकाला गया लोकल पानी होता है। इस पानी को न तो फिल्टर किया जाता है और न ही इसकी पैकिंग वाली पालिथीन ही क्वालिटी की होती है। अमूमन इस तरह के एक पानी पाउच की कीमत अधिकतम 50 पैसे होती है जिसे दुकानदारों द्वारा दो से ढाई रु़पए तक में बेखाैफ होकर बेचा जा रहा है।

जिम्मेदार विभाग नहीं देते ध्यान

नियमानुसार खाद्य सामग्री, पानी पाउच आदि की जांच फूड एंड सैंपलिंग विभाग के अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए लेकिन जिला निर्माण के बाद आज तक इस विभाग का कार्यालय ही प्रारंभ नहीं हुआ है। जिमेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी की वजह से जिला प्रशासन नगर पालिका, खाद्य विभाग आदि से पानी पाउच की जांच तो करा सकता है परंतु कार्रवाई नहीं हो सकती जिसकी वजह से निर्माताओं के हौसले बुलंद हैं।

५ सौ बोरी से अधिक की खपत

बाजार में बोतलबंद पानी की तुलना में पाउच वाले पानी की खपत अधिक होती है। रिटेलर के पास से लेकर शादी-ब्याह के अवसर पर इनकी खपत के चलते बोतल की बजाए पाउच में दुकानदारों को अधिक मुनाफा होता है। जिसके चलते नगर तथा ग्रामीण इलाकों में खपत बढ़ती जा रही है। प्रतिदिन लगभग ५ सौ बोरी से अधिक के पानी पाउच बिक जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में इसकी खपत कई गुना बढ़ जाती है। हर सीजन में पानी पाउच बेचने वाली चार-छह लोकल कंपनी और बढ़ती जा रही है।

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