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गर्मी में तालाब सूखा तो पशु, पक्षियों के लिए घरों के बाहर पानी रख रहे लोग

भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर बीते 15 दिनों की भीषण गर्मी में जोड़ा तालाब पूरी तरह से सूख गया है। जिसके कारण मवेशी और...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 04:10 AM IST

गर्मी में तालाब सूखा तो पशु, पक्षियों के लिए घरों के बाहर पानी रख रहे लोग
भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर

बीते 15 दिनों की भीषण गर्मी में जोड़ा तालाब पूरी तरह से सूख गया है। जिसके कारण मवेशी और पशु पक्षियों के सामने पीने के पानी की दिक्कत सामने आ गई। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय नागरीकों ने पहले की ओर अपने घर, दुकान के बार कंटेनर रख दिन में दो बार पानी रखने लगे जिससे इनकी प्यास बुझ रही है। क्षेत्र में बीतेे तीन दिनों से पारा 43 के पार है। एेसे में इस भीषण गर्मी में इंसान और मवेशी सभी बेहाल हैं। गर्मी में पानी को अमृत के समान माना जाता है। मनुष्य को प्यास लगे, तो वह कहीं न कहीं से पानी मांग कर अपनी प्यास बुझा लेता हैं लेकिन मूक पशु, पक्षियों को प्यास लगे तो उन्हें तड़पना पड़ता है। हालांकि जब वे प्यासे होते है तो घरों के सामने दरवाजे पर आकर खड़ें हो जाते हैं। कुछ लोग उनकी इस हरकत को समझ जाते है और उन्हें पीने के लिए पानी दे देते है, तो कुछ उनकी इस भाषा को नहीं समझते और भगा देते है। इस साल बीते 15 दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। जिला मुख्यालय के नदी नाले सहित तालाब सूख गए हैं। एेसे में स्थानीय नागरीकों के प्रयास से पशु, पक्षियां व मवेशियों को पीने के लिए पानी की सुविधा अपने दुकानों व घरों के बाहर कर रखी है। गौरतलब है कि इस तरह के भीषण गर्मी में कई ग्रामीण क्षेत्रों में परिंदो और पशुओं की मौत पानी नहीं मिलने के कारण हो जाती है। यहां पर लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा रहा है। सुबह आंख खुलने के साथ ही घरों के आसपास गौरेया, मैना व अन्य पक्षियों की चहक सभी को मन को भाती है। घरों के बाहर फुदकती गौरेया बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करती है। गर्मी के मौसम में इनकी चहचहाहट बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका ध्यान रखें। जिले में इस साल गर्मी का थर्ड डिग्री टार्चर मई महीने शुरू हुआ है। इस भीषण गर्मी में जीव जंतु का भी बेहाल है। पशु, पक्षियों पूरी तरह प्रकृति में संरक्षित जल पर ही निर्भर रहते है। अगर इन स्रोतों में पानी के सूखने पर इन्हें यहां वहां भटकना पड़ता है। पानी नही मिलने की स्थिति में पक्षी उड़ते उड़ते बेहोश होकर गिर भी जाते हैं।

शहर के लोग मवेशियों के लिए रख रहे पानी की टंकी

लोगों ने घरों और दुकानों के सामने पानी की टंकी रखकर कर रहे इंतजाम।

भास्कर संवाददाता| बैकुंठपुर

बीते 15 दिनों की भीषण गर्मी में जोड़ा तालाब पूरी तरह से सूख गया है। जिसके कारण मवेशी और पशु पक्षियों के सामने पीने के पानी की दिक्कत सामने आ गई। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय नागरीकों ने पहले की ओर अपने घर, दुकान के बार कंटेनर रख दिन में दो बार पानी रखने लगे जिससे इनकी प्यास बुझ रही है। क्षेत्र में बीतेे तीन दिनों से पारा 43 के पार है। एेसे में इस भीषण गर्मी में इंसान और मवेशी सभी बेहाल हैं। गर्मी में पानी को अमृत के समान माना जाता है। मनुष्य को प्यास लगे, तो वह कहीं न कहीं से पानी मांग कर अपनी प्यास बुझा लेता हैं लेकिन मूक पशु, पक्षियों को प्यास लगे तो उन्हें तड़पना पड़ता है। हालांकि जब वे प्यासे होते है तो घरों के सामने दरवाजे पर आकर खड़ें हो जाते हैं। कुछ लोग उनकी इस हरकत को समझ जाते है और उन्हें पीने के लिए पानी दे देते है, तो कुछ उनकी इस भाषा को नहीं समझते और भगा देते है। इस साल बीते 15 दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। जिला मुख्यालय के नदी नाले सहित तालाब सूख गए हैं। एेसे में स्थानीय नागरीकों के प्रयास से पशु, पक्षियां व मवेशियों को पीने के लिए पानी की सुविधा अपने दुकानों व घरों के बाहर कर रखी है। गौरतलब है कि इस तरह के भीषण गर्मी में कई ग्रामीण क्षेत्रों में परिंदो और पशुओं की मौत पानी नहीं मिलने के कारण हो जाती है। यहां पर लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा रहा है। सुबह आंख खुलने के साथ ही घरों के आसपास गौरेया, मैना व अन्य पक्षियों की चहक सभी को मन को भाती है। घरों के बाहर फुदकती गौरेया बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करती है। गर्मी के मौसम में इनकी चहचहाहट बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका ध्यान रखें। जिले में इस साल गर्मी का थर्ड डिग्री टार्चर मई महीने शुरू हुआ है। इस भीषण गर्मी में जीव जंतु का भी बेहाल है। पशु, पक्षियों पूरी तरह प्रकृति में संरक्षित जल पर ही निर्भर रहते है। अगर इन स्रोतों में पानी के सूखने पर इन्हें यहां वहां भटकना पड़ता है। पानी नही मिलने की स्थिति में पक्षी उड़ते उड़ते बेहोश होकर गिर भी जाते हैं।

गर्मी में पानी और भोजन की रहती है कमी

गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए भोजन की कमी रहती है। जिससे पक्षियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है और भोजन खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस भीषण गर्मी में कई ग्रामीण क्षेत्र में हैंडपंप बंद होने के कारण पालतू जानवरो के लिए भी पीने के पानी की दिक्कत हुई। पशु चिकित्सक डा.बघेल ने बताया कि भीषण गर्मी में पषु,पक्षि व मवेशियों को बचाने के लिए पानी की व्यवस्था घरो के बाहर करें तो उन्हें राहत मिलेगी।

बेजुबानों को राहत देने कर सकते हंै ये काम

घरों के बाहर पानी के बर्तन भरकर टांगे या किसी बड़े पात्र जिसमें 10 से 15 लीटर पानी समा सके। उसमें पानी भरकर घर के बाहर छाया में रखें, जिससे पशु, पक्षी व मवेशी भी पानी पी सके।

पक्षियों के लिए चना, चावल, ज्वार, गेंहू आदि जो भी घर में उपलब्ध हो उसे चारे की व्यवस्था में करें।

कम पानी वाले जल स्रोत को गंदा नहीं करना चाहिए, इससे पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था हो।

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