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अवैध निर्माण को वैध करने में निकाय फिसड्‌डी, महज 324 को ही नोटिस

जिले में अवैध निर्माण को वैध कराने में नगरीय निकायों की दिलचस्पी नहीं होने के कारण तीन क्षेत्र में अब तक 324 को ही...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 06, 2018, 05:10 AM IST

अवैध निर्माण को वैध करने में निकाय फिसड्‌डी, महज 324 को ही नोटिस
जिले में अवैध निर्माण को वैध कराने में नगरीय निकायों की दिलचस्पी नहीं होने के कारण तीन क्षेत्र में अब तक 324 को ही नोटिस जारी किया जा सका है। इसमें 115 मामलों का निपटारा ही अब तक किया जा सका है। जबकि बैकुंठपुर, मनेंद्रगढ़ सहित शिवपुर-चरचा को मिलाकर करीब 13 हजार अधिक अवैध निर्माण है। इन अवैध निर्माण को वैध कराने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग का पसीना निकल रहा है। दफ्तर की लचर व्यवस्था उपर से नगरीय निकायों में इसमें रुचि न लेना बड़ी वजह है। सख्त नियम बनने के बाद भी नियमितिकरण का काम काफी धीमी गति से चल रहा है।

जिले में कुल 7 नगरीय निकाय है। इन निकायों में जमीन भले ही आपकी हो, पर उसमें निर्माण की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति किए गए निर्माण को अवैध ही माना जा रहा है। ऐसे मामलों के नियमितिकरण को लेकर शासन ने नई गाइडलाइन जारी की गई है। अपने मकान को वैध कराने समझौता षुल्क जमाकर अपने अवैध निर्माण को वैध करा सकते है। नगर निवेश एेसे भवन मालिकों को लगातार नोटिस जारी कर रहा है। साथ ही भवन मालिकों द्वारा किए गए आवेदनों को निराकरण किया जा रहा है।

15 गुना पेनाल्टी जमाकर अवैध निर्माण को वैध करा सकते हैं

अब तक महज 324 लोगों को ही दिए नोटिस

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालय से जानकारी मिली है कि जिले के बैकुंठपुर, मनेंद्रगढ़ सहित शिवपुर-चरचा में 324 लोगों को नोटिस दिया गया था। इनमें से अबतक 115 के मामलों का निपटारा कर दिया गया है। जबकि सिर्फ बैकुंठपुर नपा के अंतर्गत ही 5500 से के करीब मकान हैं। वहीं मनेंद्रगढ़ में भी यही हाल है। मतलब दो नगरीय निकायों में दस हजार से अधिक मकानों में से अबतक 324 को ही नोटिस दिया जा सका है। इसमें भी निपटारें की गति भी बहुत तेज नहीं है।

काॅलोनाइजरों के लिए बढ़ी हुई दरें हुई लागू

जिले में एक निगम सहित तीन नगर पालिका और तीन नगर पंचायत है। कुल 7 नगरीय निकाय हैं। यहां क्षेत्रफल के हिसाब से दरें तय कर दी गई है। 100 वर्गमीटर तक अनुज्ञा शुल्क का 15 गुना समझौता शुल्क लेकर एेसे निर्माण को निकाय वैध सकर सकेगा। काॅलोनाइजर के मामले में विकास अनुमति की दरों में भी परिवर्तन किया है। नई गाइडलाइन से सभी निकाय प्रभावित होंगे। नपा में अधिकांष निर्माण अवैध है। यही हाल चिरमिरी और मनेंद्रगढ़ का भी है।

विकास अनुमति शुल्क बढ़ाकर 3750 रुपए तय

सरकार ने इस आदेश के संबंध में राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन कर दिया है। शासन ने सभी नगरीय निकायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। नगर निवेश सहायक संचालक कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार राज्य शासन ने इसे लेकर आदेश जारी किया है। इसमें अब नगरीयय निकायों के लिए समझौता शुल्क व विकास अनुमति शुल्क एक जैसा होगा। समझौता शुल्क मंे बढ़ोत्तरी नहीं हुई। लेकिन विकास अनुमति के शुल्क को बढ़ाया गया है। शासन से जो निर्देश मिले हैं, उसके अनुरूप ही आगे की कार्रवाई तय की जा रही है। इससे जिले के सभी निकाय प्रभावित होंगे। फिलहाल नियमितिकरण के मामले में समझौता शुल्क की दरें तय हंै। भू-विकास अधिनियिम के तहत तय अनज्ञा शुल्क 825 से 3700 रुपए हिसाब से समझौता शुल्क वसूली की जाती है। अधिकतम शुल्क 25 सौ रुपए रहा है। शासन ने 26 अप्रैल 2018 को एक आदेश जारी किया है। इसमें समझौता शुल्क के निए नए स्लैब तय कर दिए गए हैं। विकास अनुमति शुल्क बढ़ाकर 3750 रुपए कर दिया गया है इसके भी स्लैब तय किए गए हैं।

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