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पानी से नहीं बुझी कुरासिया माइंस की आग अब मिट्टी-रेत से फिलिंग करने की तैयारी

Dainik Bhaskar

May 04, 2018, 05:10 AM IST

Baikunthpur News - भास्कर संवाददाता|चिरमिरी.बैकुंठपुर वर्ष 2012 में कुरासिया ओपन कास्ट माइंस से कोयला उत्पादन बंद कर दिया गया था।...

पानी से नहीं बुझी कुरासिया माइंस की आग अब मिट्टी-रेत से फिलिंग करने की तैयारी
भास्कर संवाददाता|चिरमिरी.बैकुंठपुर

वर्ष 2012 में कुरासिया ओपन कास्ट माइंस से कोयला उत्पादन बंद कर दिया गया था। उसके बाद से वहां आसपास के क्षेत्र में कोल माफिया के द्वारा अवैध उत्खनन का काम शुरू किया गया। पहाड़ खोदकर अंदर ही अंदर सुरंग में तब्दील कर दिया कर गया है। एसईसीएल प्रबंधन को इस बात की जानकारी होने के बाद भी समय रहते उन जगहों को सेफ करने की कोशिश नहीं की। अब एसईसीएल रेत और मिट्‌टी की फिलंग करके आग बुझाने की तैयारी कर रहा है। पहाड़ के उपर बसे हुए लेागों के घरों के नीचे 100 फीट से भी लम्बी सुरंग बना दी गई। जहां बीतें 10 दिनों से आग धधक रही है।

आधिकारिक रूप से साल 2015 में माइंस को क्लोज किया गया था। लेकिन इससे पहले से ही कोयले का अवैध उत्खनन यहां षुरू कर दिया गया था, जो आज तक चलता रहा है। जिलें में अवैध कोयला उत्खनन का यह कोई पहला मामला नही है लेकिन एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही के कारण स्थानीय नागरीको को इसका खामियाजा भुगतना पड रहा है। बीते 10 दिनों से एसईसीएल कर्मचारी और अधिकारी अवैध कोयला उत्खनन वाले क्षेत्र मंे आग बुझाने की कोशिश कर रहे है लेकिन सफलता नहीं मिल रही है।

2012 से बंद कुरासिया माइंस में बीते 10 दिनों से आग धधक रही है, जिससे लोगों का जीना मुश्किल कर दिया

बंद माइंस में पिछले 10 दिनों से लगातार धधक रही है आग। इसे बुझाने के तमाम उपाए नाकाफी साबित हो रहे हैं।

रहवासियों को नोटिस देकर कब्जा हटाने कहा

बड़ा बाजार कुरासिया नाले के ऊपर बसे 21 रहवासी को कुरासिया प्रबंधन ने नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने को कहा है। जारी किए गए नोटिस में लिखा है कि नाले के अवैध खदान की कोयले सीम में लगी आग के कारण यह क्षेत्र खतरे में है। इससे पूर्व नगर निगम चिरमिरी ने भी नोटिस जारी कर वहां के आवास, दूकानों को खाली करने कहा था।

एसईसीएल और पुलिस को मालूम था खदान से अवैध उत्खनन हो रहा है, इसके बाद भी सब चुपचाप देखते रहे

एसईसीएल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस प्रशासन के द्वारा इसमें बड़ी लापरवाही बरती गई। लगातार अवैध कोयले का उत्खनन कर अवैध रूप से चल रहे ईंट भट्टों में कोयला को खपाया जा रहा है। बिकने वाले कोयले का कमीशन थाने तक पहुचता है। इसलिए कार्रवाई नहीं हुई। वही माइंस बंद करने के बाद प्रतिबंधित क्षेत्र में कटीले तार की फेंसिंग नहीं कराई गई। जिससे बेखौफ होकर अवैध माइंस का संचालन बीते 6 साल से किया जा रहा है। कोयला खदानों की प्रकृति होती है कि कोयला आॅक्सीजन के सम्पर्क में आते ही आग का रूप ले लेता है। यही वजह है कि लम्बे समय से यह प्रक्रिया चल रही थी और अंततः अवैध माइंस में आग लग गई। पहाड़ के नीचें चारों ओर आग लगी हुई है। साल 2014 में इसी पहाड़ के नीचे आग लगी थी।



एसईसीएल के अफसर कुछ भी कहने से बच रहे

एसईसीएल की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आग बुझाने अब मिट्टी और रेत फिलिंग करने का काम किया जाएगा। जिससे फायर वाले एरिया में आॅक्सीजन न पहुच सके। एेसा करने से ही आग पर काबू पाया जा सकेगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई। वहीं इन दिनो एसईसीएल के जिम्मेदार अफसर छुटटी पर चले गए है। जो है वे कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

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